Thursday, December 12, 2019 03:02 PM

कटौला में साढ़नू मेले की धूूम

मंडी -मंडी जिला के उत्तरसाल क्षेत्र के मुख्यालय कटौला साढ़नू मेले की दो दिन से धूम मची हुई है। सावन की फुहारों के बीच होने वाला यह मेला स्थानीय भगवती चंडी चंडीहरी को समर्पित होता है,  जबकि आसपास के करीब आधा दर्जन देवी-देवताओं के साथ आए देवलु भी इस मेले में शिरकत कर स्थानीय लोगों की मेहमानचारी का आनंद उठाते हैं। स्थानीय पंचायत के प्रबंधन में चलने वाले इस मेले की ख्याति का पता इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां पर बाहरी प्रदेशों से आकर व्यापारी अपना कारोबार करते हैं। कटौला पंचायत के पूर्व प्रधान एवं माता चंडी चंडीहारी के कारदार हरदेव ठाकुर का कहना है कि कटौला में जहां माता का भंडार मौजूद है, वहां कभी मंडी रियासत की रानी प्रकाश देई का बेहड़ा यानी महल था। उन्होंने बताया कि रानी को अपने गहने रखने के संदूक में नाग ने दर्शन दिए। इस पर रानी ने पंडितों को बुलाकर सारा वृतांत सुनाया। पंडितों ने कहा कि यहां चंडी माता आई हुई है, इसकी स्थापना करनी पड़ेगी। रानी ने माता की मूर्ति और देहरा बनाकर स्थापना करवाई। एक और वर्णन के अनुसार कटौला में पांच मंजिला महल होने की बात कही जाती है। वहां पर रानी के दरबार के कर्मचारी भी रहते थे। उनके परिवार की एक महिला जब खेत में निंदाई कर रही थी, तो उसकी किलणी से कुछ टकराने की आवाज आई। जब उस महिला ने गौर से देखा तो एक मुखौटा था जो टूट गया। वह आज भी उसी हालत में है। इसे मूली मुख यानि मूल मुख कहा जाता है। जो माता के रथ के साथ आज भी है। कटौला का साढ़नू मेला माता का प्रमुख मेला माना जाता है। इस दौरान माता का रथ भंडार से निकल कर मुख्य मंदिर के पीछे के मैदान में अन्य मेहमान देवताओं के साथ बैठता है। जहां देवताओं के देवलू नाटी डालते हैं, जबकि पूरा कटौला बाजार और स्कूल का मैदान व्यापारियों की दुकानों से भरा पड़ा है। इस मेले में आसपास की करीब डेढ़ दर्जन पंचायतों बाशिंदे आकर खरीददारी कर रहे हैं।