कड़ी मेहनत ने पहले ही प्रयास में बना दिया आईएएस अफसर

प्रोफाइल

नाम  : राघव शर्मा

जन्मस्थान : श्री माधोपुर, सीकर जिला,राजस्थान

आईएएस बैच :  2013

पिता : मातादीन शर्मा

माता : सरोज शर्मा

शिक्षा : 12वीं कक्षा की पढ़ाई भीलवाड़ा शहर में, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर से बीएससी, एलएलबी में पांच वर्ष की संयुक्त डिग्र्री कॉरपोरेट लॉ विषय में स्पेशलाइजेशन के साथ।

अब तक इन पदों पर दी सेवाएं..

सितंबर - नवंबर 2015 : सहायक सचिव, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार , दिसंबर 2015 से जनवरी, 2018  उपमंडलाधिकारी  गोहर, जिला मंडी, जनवरी, 2018 से फरवरी, 2019  अतिरिक्त उपायुक्त, जिला मंडी फरवरी, 2019 से वर्तमान अतिरिक्त उपायुक्त, जिला कांगड़ा।

 ‘रहो धर्म में धीर, रहो कर्म में वीर, रखो उन्नत शिर, डरो न’।  इन पंक्तियों के साथ अपने जीवन की शुरुआत करते कांगड़ा के एडीसी राघव शर्मा ने अपने सपनों को पंख लगाए हैं। पिता से प्रेरणा पाकर राघव शर्मा बचपन से ही कुछ अलग करने की चाहत रखते थे। पिता मातादीन शर्मा और माता सरोज शर्मा के घर 12 नवंबर, 1986 को राजस्थान के सीकर जिले के श्री माधोपुर नामक स्थान पर जन्में राघव शर्मा बचपन से ही बहुत मेहनती हैं, उन्होंने जीवन में जो भी उपलब्धियां हासिल की हैं, सब मेरिट में हासिल की हैं। उनका कहना है कि माता-पिता भी हमें अच्छी राह में चलने की प्रेरणा देते हैं, जो हमारे भीतर आत्मविश्वास पैदा करती हैं। इनकी स्कूली शिक्षा राजस्थान के सात विभिन्न छोटे शहरों से हुई। 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई भीलवाड़ा शहर से करने के बाद उन्होंने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर से बीएससी, एलएलबी में पांच वर्ष की संयुक्त डिग्र्री कॉरपोरेट लॉ विषय में स्पेशलाइजेशन के साथ प्राप्त की है। 10वीं एवं 12वीं कक्षा में क्रमश : 93 प्रतिशत और 93.4 प्रतिशत अंक हासिल किए और सीबीएसई बोर्ड की मेरिट स्कालरशिप प्राप्त की थी। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर में स्नातक स्तर पर बैच में प्रथम रहने पर स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ था। यूनिवर्सिटी कैंपस में पढ़ते हुए ही देश की अग्र्रणी लॉ फर्म और ब्रिटेन की मैजिक सर्किल लॉ फर्म में जॉब मिल गया था।  एडीसी राघव  शर्मा का मानना है कि सकारात्मक कार्य करने वाले लोगों और हुनर रखने वाले लोगों  को पहले बढ़ावा दिया जाए।

मुलाकात: टाइम टेबल बनाकर नियमित रूप से पढ़ाई करें युवा...

प्रशासनिक अधिकारी बनने का क्या मतलब होता है?

मेरी नजर में प्रशासनिक अधिकारी बनना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, जिसमें उच्च कोटि के प्रोफेशनलिज्म की अपेक्षा की जाती है।  प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर हम नागरिकों के लिए सरकार का चेहरा हैं और लोगों से जुड़ी बहुत सारी योजनाओं के समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से क्रियान्वयन के लिए नागरिकों के प्रति उत्तरदायी हैं।  प्रशासनिक पद पर बैठकर लिए गए हर निर्णय से न्याय का प्रश्न जुड़ा हुआ है। इसलिए भय, वैर, वैमनस्य से दूर होकर निष्पक्ष भाव से इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए हम कटिबद्ध हैं।

आपने स्कूली शिक्षा और कालेज व विश्वविद्यालय की पढ़ाई कहां से पूरी की?

मेरी स्कूली शिक्षा राजस्थान के सात विभिन्न छोटे शहरों से हुई है। 12वीं कक्षा की पढ़ाई भीलवाड़ा शहर से करने के बाद, मैंने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर से बीएससी, एलएलबी में पांच वर्ष की संयुक्त डिग्र्री कॉरपोरेट लॉ विषय में स्पेशलाइजेशन के साथ प्राप्त की है।

खुद पर कितना विश्वास है और इसकी ताकत कहां से आती है। पढ़ाई की उपलब्धियां क्या रहीं?

मैंने जीवन में सभी कुछ मेरिट पर हासिल किया है और हर छोटी-मोटी उपलब्धि के लिए बहुत मेहनत की है। नियत साफ  रखता हूं और अपने विवेक पर यकीन है। माता-पिता से भी एक अच्छा इनसान बनने की प्रेरणा मिलती है। बस यही मेरे आत्म-विश्वास का स्रोत है। 

कितने प्रयास के बाद आईएएस के लिए चुने गए? और इसके पीछे प्रेरणा?

मैं पहले प्रयास में आईएएस के लिए चुना गया। आईएएस अफसर बनने की प्रेरणा सर्वप्रथम पिता से प्राप्त हुई। वह राजस्थान प्रशासनिक सेवा के एक ईमानदार और कर्मठ अधिकारी थे और आईएएस में प्रोमोट होकर सेवानिवृत्त हुए। उनके सान्निध्य में अन्य आईएएस अधिकारियों से मिलने का मौका मिला, जिन्होंने सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रेरित किया। आईएएस परीक्षा को विश्व की सबसे कठिन परीक्षा कहा जाता है और इसमें सफल होने की चुनौती का रोमांच भी एक बड़ी प्रेरणा रहा।

यह कब और कैसे सोचा कि आपको आईएएस अफसर ही बनना है?

आईएएस अफसर बनने का विचार बचपन में पिता को देखकर पनपा, पर स्वयं आईएएस बनने का निर्णय वर्ष 2011 में लिया। उस वक्त मैं देश की एक अग्रणी लॉ फर्म में काम कर रहा था और ब्रिटेन में मैजिक सर्किल लॉ फर्म की नौकरी का कॉन्ट्रैक्ट भी हाथ में था, पर मैं अपनी क्षमता का उपयोग व्यापक बदलाव के लिए करना चाहता था। साथ ही आईएएस में कार्य की विविधता और कुछ नया करने की चुनौती ने मुझे इस ओर आने के लिए प्रेरित किया।

आपने सिविल सेवा परीक्षा के दौरान कौन से विषय चुने और इसके पीछे का कारण?

सिविल सेवा परीक्षा के दौरान मैंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और लॉ विषयों का चुनाव किया। लॉ मेरा अपना विषय है और मेरे लिए सहज था।  पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विषय में प्रशासनिक दृष्टि से बहुत कुछ नया सीखने को मिलता है। ये दोनों विषय आईएएस की जॉब प्रोफाइल से घनिष्ठ रूप से जुड़े हैं और उस समय स्कोरिंग सब्जेक्ट भी माने जाते थे।

सामान्यतः यहां तक पहुंचने के लिए आपकी दिनचर्या क्या रही?

परीक्षा के लिए मेरा प्रथम प्रयास होने के कारण मैंने डेढ़ वर्ष तक प्रतिदिन 10 से 12 घंटे तैयारी की है। मैं सभी विषयों में कुछ न कुछ रोज तैयार करता था और एक निश्चित टाइम टेबल के अनुसार अध्ययन करता था। इस परीक्षा में नियमित रूप से तैयारी करना एवं रिवीजन करना सबसे ज्यादा मायने रखता है।

वैसे तैयारी में किताबों के अलावा और किस-किस सामग्री का सहारा मिला?

तैयारी के लिए अखबारों और मैग्जीन्स (फ्रंटलाइन, डाउन टू अर्थ, स्ट्रेटेजिक एनालिसिस, योजना) का भी अध्ययन किया। साथ में इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी का भी सहारा लिया। 

आजकल कोचिंग क्लासेज का चलन बढ़ रहा है। क्या सफलता पाने के लिए कोचिंग क्लास जरूरी है अथवा हम खुद भी सफलता पा सकते हैं?

इस सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं दिया जा सकता। आईएएस जैसी कठिन परीक्षाओं में मार्र्गदर्शन और स्पष्टता के लिए कई प्रतिभागी अपने आर्थिक सामर्थ्य अनुसार कोचिंग लेते हैं। व्यक्तिगत तौर पर मुझे कोचिंग कक्षा या ट्यूशन अटेंड करने का अवसर कभी प्राप्त नहीं हुआ। मेरा मानना है कि यदि आप विषय में सैद्धांतिक स्पष्टता  पर ध्यान देते हैं, तो ज्यादा कठिनाई नहीं होती है। यह एक व्यक्तिगत च्वाइस है।

आपकी कार्यशैली आम अफसर की तरह ही है या कि कुछ हटकर है?

रहो धर्म में धीर , रहो कर्म में वीर, रखो उन्नत शिर, डरो न- यह मसूरी स्थित आईएएस ट्रेनिंग अकादमी के मूलगीत की पंक्ति है, जो आईएएस की मूल भावना है और मेरी सतत प्रेरणा है। मैं प्रोफेशनलिज्म और निष्पक्ष व्यवहार को सबसे जरूरी मानता हूं।  मैं सभी को अपना पक्ष रखने का मौका देने में विश्वास करता हूं। मुझसे मिलने वाले हर नागरिक की समस्या को पूरी तरह सुनकर व्यावहारिक दृष्टिकोण से उसकी मदद करने की कोशिश करता हूं। विशेषकर मेरा प्रयास रहता है कि सकारात्मक कार्य करने वाले लोगों और हुनर रखने वाले लोगों को बढ़ावा दूं। सर्विस डिलीवरी के लिए सरकारी तंत्र को मोनिटरिंग से सुदृढ़ करना मेरी प्राथमिकता है।

जो युवा आईएएस अफसर बनने का सपना देख रहे हैं, उनको आप क्या सुझाव देना चाहेंगे?

आईएएस अफसर बनने का सपना देख रहे युवाओं को मैं यह कहना चाहूंगा कि परीक्षा के लिए यूपीएससी द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार टाइम टेबल बनाकर नियमित रूप से पढ़ाई करें। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाओं में रुचि लेकर उन पर संतुलित विचार विकसित करें और आंकड़ों पर आधारित विश्लेषणात्मक, एप्रोच रखें। यदि कोई भी युवा तैयारी के लिए मार्गदर्शन चाहता है, तो मुझसे मिल सकता है। इसके साथ ही वह मुझसे या raghavsharma1986@gmail.com  पर ईमेल से संपर्क कर सकता है।

पवन शर्मा , धर्मशाला