Tuesday, September 17, 2019 03:47 PM

कथेड़ बाइपास पर बनेगा अस्पताल

जमीन स्थानांतरण करने की स्वीकृति मिलने पर निर्माण को प्रक्रिया तेज

सोलन -कथेड़ बाइपास पर अस्पताल बनाने के लिए जमीन स्थानांतरण करने की स्वीकृति मिलने के बाद आगामी प्रक्रिया तेज कर दी है। अस्पताल प्रशासन अब जल्द राजस्व विभाग को जगह की डिमार्केशन करने के लिए पत्राचार करेगा, ताकि जल्द चयनित भूमि पर फेंसिंग व अन्य कार्य शुरू किया जा सके। मंगलवार को भूमि के स्थानांतरण की स्वीकृति मिलने का पत्र अस्पताल कार्यालय पहुंचा, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने इस बारे में चर्चा की ओर जल्द इस भूमि की डिमार्केशन करने के लिए फैसला लिया। बता दें कि कथेड़ बाइपास पर अस्पताल बनने का रास्ता 16 अगस्त को साफ हो गया था। प्रदेश सरकार ने शहर के बाहर बाइपास पर चयनित भूमि की स्वीकृति दी है। राजस्व विभाग ने इस भूमि का हस्तांतरण स्वास्थ्य विभाग के नाम कर दिया है। यह भूमि कथेड़ में एचआरटीसी वर्कशॉप के समीप है, जिसका खसरा नंबर 807/3 और 854/3/2 है। अस्पताल निर्माण के लिए कुल 59 हजार 814 स्क्वेयर मीटर जमीन है। जानकारी के अनुसार बीती 24 मई को स्वास्थ्य विभाग ने राजस्व विभाग को पत्र लिखकर भूमि स्थानांतरण करने को कहा था। उस दौरान कयास लगाए जा रहे थे कि जैसे ही राजस्व विभाग की ओर से स्वास्थ्य विभाग के नाम भूमि का स्थानांतरण किया जाता है वैसे ही स्वास्थ्य विभाग की ओर नया अस्पताल बनाने की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। गौरतलब हो कि अस्पताल को बनाने के लिए कथेड़ में भूमि का चयन किया था। भूमि का चयन करने के बाद स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने भी निरीक्षण किया था। यही नहीं इस भूमि पर जल्द अस्पताल बने इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने राजस्व विभाग के साथ पत्राचार किया था। बता दंे कि अस्पताल सोलन शहर की भीड़भाड़ से बाहर शिफ्ट करने की मांग लोग काफी समय से करते आ रहे थे।  इसके लिए लोगों सहित कई राजनीतिज्ञों ने इस मांग को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास भी किए और जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भी सौंपे थे। बताया जा रहा है कि क्षेत्रीय अस्पताल में जच्चा-बच्चा वार्ड सहित अन्य कार्य के लिए लगभग दस करोड़ रुपए की राशि सरकार से आई थी। यह राशि अस्पताल प्रशासन उसी जगह पर खर्च करना चाहता था कि, जहां अस्पताल बना हुआ है, जिसके लिए लोग काफी नाराज भी हुए थे, लेकिन अब अस्पताल बनाने के लिए किए  गए प्रयासों को हरी झंडी मिल गई है और स्वास्थ्य विभाग भी अपनी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है।