Thursday, November 14, 2019 03:15 PM

कमाई का साधन है पुष्प उत्पादन

फ्लोरीकल्चर में करियर संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए  हमनें डा. यशवंत सिंह परमार बागबानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के फ्लोरीकल्चर एवं लैंडस्केपिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डा. राजेश भल्ला से बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंश...

डा. राजेश भल्ला

विभागाध्यक्ष, फ्लोरीकल्चर एंड  लैंडस्केपिंग डिपार्टमेंट, बागबानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी

आजकल के दौर में फ्लोरीकल्चर का व्यावसायिक महत्व क्या है?

आधुनिक समय शहरीकरण का है। इसके साथ ही फूलों का महत्व और व्यापार दोनों ही बढ़े हैं। किसानों की ओर से देखा जाए तो फ्लोरीकल्चर से कम स्थान से अधिक आय प्राप्त की जा सकती है। आज पुष्प उत्पादन पारंपरिक कृषि के एक प्रबल विविधिकरण के रूप में सामने आया है। कट फूलों का उत्पादन, खुले॒फूलों का उत्पादन, बीज उत्पादन और स्थल सौंदर्य फ्लोरीकल्चर के प्रमुख आयाम हैं। फ्लोरीकल्चर से अधिक आय होने से ही इसे लो वॉल्यूम, हाई वैल्यू क्रॉप भी कहा जाता है।

फ्लोरीकल्चर को करियर के रूप में अपनाने के लिए शैक्षणिक योग्यता क्या होनी चाहिए?

पुष्प उत्पादन सब्जी व फल उत्पादन जैसा ही है, जिसमें किसान थोड़ा सा प्रशिक्षण प्राप्त करके सफलतापूर्वक खेती कर सकते हैं। युवा वर्ग अगर उच्च तकनीक फ्लोरीकल्चर करना चाहते हैं तो उसके लिए जिन युवाओं ने +2 या उसके ऊपर शिक्षा प्राप्त की हो॒उनके लिए विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण कैंप लगाए जाते हैं। यद्यपि युवा वर्ग स्थल सौंदर्यीकरण को व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहते हैं तो उसके लिए देश में स्थित विभिन्न विश्वविद्यालयों में जहां फ्लोरीकल्चर और लैंडस्केप की पढ़ाई करवाई जाती है वहां से स्नातक और पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री की जा सकती है। किसान यदि पढ़े- लिखे हों तो आधुनिक तकनीकों को समझ कर अधिक लाभ कमा सकते हैं।

इस क्षेत्र में प्रशिक्षण लेने के बाद रोजगार की संभावनाएं किन क्षेत्रों में है?

फ्लोरीकल्चर में रोजगार की संभावनाएं प्रशिक्षण पर निर्भर करती हैं। जिन युवाओं के पास जमीन हो वहां स्वरोजगार ही आय का महत्त्वपूर्ण साधन है। जमीन पर विभिन्न प्रकार के पुष्पों का उत्पादन कर मंडी में अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है। हिमाचल प्रदेश में खुले स्थानों में ग्लैडिओलस, गेंदा, गुलदाऊदी की खेती की जाती है, जबकि यदि पोलीहाउस की सुविधा हो तो कारनेशन, जरबेरा, गुलाब, लिलियम, इत्यादि की खेती अलग-अलग क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जा सकती है। यदि पुष्पों के विक्रय में समस्याएं हों तो किसान केवल पौध उत्पादन, बीज उत्पादन और कंद उत्पादन से ही अधिकाधिक लाभ कमा सकते हैं।

आपके लिहाज से यह क्षेत्र कैसा है? अमूमन महीने की कितनी आमदनी होती है?

पुष्प उत्पादन पारंपरिक कृषि के एक महत्त्वपूर्ण विकल्प के रूप में सामने आया है। सीजन के अनुसार और पुष्पों की फसल के प्रकार और खिलने के सीजन के अनुसार आय प्राप्त की जा सकती है।

हिमाचल प्रदेश में इस फील्ड से संबंधित पढ़ाई कहां-कहां की जा सकती है?

हिमाचल प्रदेश में डा. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में पुष्प एवं स्थल सौंदर्य विभाग में प्रशिक्षण एवं स्नाकोत्तर डिग्री दी जाती है। स्नाकोत्तर डिग्री प्राप्त करने के लिए +2 विज्ञान और औद्यानिकी या कृषि में स्नातक डिग्री पास होनी चाहिए, जबकि प्रशिक्षण कोई भी प्राप्त कर सकता है।

फ्लोरीकल्चर को करियर के रूप में अपनाने वाले युवाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

युवाओं के लिए फ्लोरीकल्चर नई और उत्तम व्यवस्था सिद्ध हो सकती है। फ्लोरीकल्चर शुरू करने से पूर्व प्रशिक्षण जरूरी है। युवाओं को मंडी का ज्ञान होना भी बहुत जरूरी है क्योंकि स्थान विशेष और मंडी तक फूल पहुंचाना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसी प्रकार फूलों का चुनाव सोच समझ कर और वैज्ञानिक सलाह से ही करें।

- मोहिनी सूद-नौणी (सोलन)