Saturday, January 25, 2020 11:21 PM

करतारपुर में ना ‘पाक’ मंसूबे

करतारपुर कारिडोर के उद्घाटन के वक्त जो आशंका पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जताई थी, आज उससे जुड़े पाकिस्तान के ना’पाक मंसूबे बेनकाब हो रहे हैं। पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद ने कहा है कि फौज के मुखिया जनरल बाजवा की रणनीति के आधार पर करतारपुर कारिडोर खोला गया है। आने वाले दिनों में हिंदुस्तान उसका अंजाम भुगतेगा। एक और मुस्लिम नेता ने करतारपुर को ‘सिखों की गंदगी’ करार दिया और कहा कि सिख यूनिवर्सिटी और कारिडोर खोलने के लिए पाकिस्तान नहीं बना है। जिन्हें सिखों से मुहब्बत है, वे अमृतसर चले जाएं। गौरतलब बयान रेल मंत्री का है, जिसमें भारत के लिए धमकी निहित है। शेख रशीद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की कैबिनेट के सदस्य हैं। वह हुकूमत में फौज के नुमाइंदे माने जाते रहे हैं। वह फौज के मुख्यालय रावलपिंडी से चुनकर आते हैं। पाकिस्तान में सरकार किसी की भी बने, लेकिन शेख रशीद का वजीर बनना तय होता है, लिहाजा उनके बयान को यूं ही खारिज नहीं किया जा सकता। कारिडोर उद्घाटन के वक्त उन्होंने खालिस्तानी आतंकियों के स्वागत का बयान ही नहीं दिया था, बल्कि पाकिस्तान ने समारोह का जो वीडियो तैयार कराया था, उसमें खालिस्तानी उग्रवादियों के सरगना जरनैल सिंह भिंडरावाला का फोटो भी दिखाया गया था। उस मौके पर खाड़कू गोपाल चावला भी दिखाई दिया था, जो जनरल बाजवा सरीखे अतिविशिष्ट लोगों से गले मिल रहा था। भारत सरकार की आपत्ति के बावजूद वह आतंकी सक्रिय दिखाई दिया था। अब पाकिस्तान के साजिशाना मंसूबों की खबर लगी है कि वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई पाकिस्तान में ही सक्रिय खालिस्तानी तत्त्वों के जरिए भारत के पंजाब में या करतारपुर कारिडोर के आसपास कोई आतंकी उपद्रव फैलाना चाहती है। कोशिश आतंकी हमले की भी हो सकती है और खालिस्तान के दुष्प्रचार की भी...! कारिडोर की धर्मयात्रा से पंजाब या देश के अन्य हिस्सों में लौटे सिख श्रद्धालुओं ने भारत की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों को भी ब्रीफ  किया है। उन्होंने खुलासा किया है कि आईएसआई सिख संगत को गुमराह करने में जुटी है। नकली धर्मगुरुओं के जरिए सिखों को भड़काने की कोशिश की जा रही है और आईएसआई अपना जाल फैला रही है। आईएसआई के अलावा, वहां की अन्य स्थानीय एजेंसियों के एजेंट भी कारिडोर के आसपास के इलाके में सक्रिय हैं। ईश्वर न करे कि कल कोई हादसा या हमला हो जाए, तो कारिडोर के लिए किसे जिम्मेदार माना जाएगा? बेशक आईएसआई की हरकतों और उसके मंसूबों की जानकारी प्रधानमंत्री मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर आदि को जरूर होगी, लेकिन करतारपुर पर आस्था की आड़ में पाकिस्तान के साजिशाना चेहरे को लेकर भारत सरकार को आपत्ति जरूर दर्ज करानी चाहिए। करतारपुर सिखों के सर्वोच्च धर्मस्थलों में एक है, लिहाजा कारिडोर को बंद करने का फैसला तो सिख-विरोधी होगा और उनकी धार्मिक भावनाएं भी आहत होंगी। सरकार के स्तर पर यह ख्याल तो तुरंत छोड़ देना चाहिए। आतंकवाद तो हमारे लिए सनातन चिंता और सरोकार रहा है। पाकिस्तान बीते तीन दशकों से आतंकी हमलों को प्रायोजित करता रहा है। मुंबई हमले की हत्यारी, खूनी तारीख 26/11 हाल ही में गुजरी है। जुलाई, 2005 के लंदन आतंकी हमले में जिसकी भूमिका साबित हुई है, उसके पाकिस्तानी संबंध भी बेनकाब हुए हैं, लेकिन मौजूदा चिंता खालिस्तानी उग्रवाद की है, जिसे पाकिस्तान ने नए सिरे से हमारे पंजाब में सक्रिय करने की साजिश रची है। एक पवित्र धर्मस्थल की आड़ में आतंकवाद के मंसूबे...! पाकिस्तान की यह सोच इसी घटना से स्पष्ट हो जाती है कि करतारपुर में मत्था टेकने गई हरियाणा की मनजीत कौर अचानक लापता हो गई। सरकारों के स्तर पर दबाव बढ़ा, तो पाकिस्तान रेंजर्स ने एक लड़के के साथ उस लड़की को ढूंढ निकाला और भारत वापस भेजा। बताया जाता है कि चार लड़कों ने उस लड़की को बहला-फुसला कर धर्म-परिवर्तन के लिए तैयार कर लिया था। उनके मंसूबे क्या थे, ये तो साफ नहीं है और न ही आतंकवाद से मिलते-जुलते हैं, लेकिन भारत को अपमानित करने की कोशिश तो है और यह किसी भी स्तर तक जा सकती है। करतारपुर कारिडोर को इस कदर गंदला नहीं होने दिया जाए, यह हुकूमत के स्तर पर भारत सरकार की पहली जिम्मेदारी है।