Thursday, November 14, 2019 03:09 PM

करवाचौथ को बाजार… सुहागिनों से गुलजार

दौलतपुर चौक -करवा चौथ के पावनव्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह व्रत सभी व्रतों में सबसे खास है। यही वजह है कि करवाचौथ की पूर्व संध्या पर महिलाओं ने बाजार का रुख किया और मेहंदी रचवाने के साथ-साथ मनियारी, ज्वेलरी और कपड़ा विक्रेताओं की दुकानों का रुख किया। इसमें गृहिणियों के पतियों ने भी दिल खोल कर जेब ढीली की। विशेषकर लेटेस्ट ज्वेलरी, डायमंड के सेट, अंगूठी, लॉकेट के इलावा महंगे सूट, सारी की भी जमकर खरीददारी की। जबकि माथे की बिंदिया, कांच की चूडियां, लिपस्टिक, सुहागी इत्यादि की खूब बिक्री हुई। इसके अलावा फेणीयां, नारियल, सेब, केले, जलेबी एवं अन्य मिठाइयों के लगे बडे-बडे़ स्टालों से शहर सजा रहा। दौलतपुर चौक के इलावा घनारी, नंगल जरियाला, संघनई, नंगल जरियाला, चलेट, गोंदपुर बनेहड़ा, भंजाल, भद्रकाली, मरवाड़ी, बबेहड़ इत्यादि बाजारो में खूब रश रहा। एक अनुमान के मुताबिक पिछले दो तीन दिनों में करवाचौथ के नाम पर लाखों का व्यवसाय हुआ है। इससे व्यापारियों के चेहरों पर रौनक दिखी। अहम बात यह रही जिन दुकानों पर बड़ी मुश्किल दुकानदार खुद सामान की बिक्री करता दिखता था, उस दुकान पर आधा दर्जन सेल्समेन दिखे और दुकानदारों की पत्नियों ने भी इसमें खूब हाथ बंटबाया। इसके अलावा भारी रश के चलते ऑटोरिक्शा, टैक्सी चालकों और ट्रांसपोर्टर्स ने खूब चांदी कूटी। इसके अतिरिक्त महिलाओं ने सोलह शृंगार हेतू ब्यूटी पार्लर्स का रुख किया, ताकि इस दिन वो दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला दिखें। गौर रहे कि करवा चौथ के पावन व्रत पर महिलाएं दिन भर भूखी-प्यासी रहकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। यही नहीं कंुवारी लड़कियां भी मनवांछित वर के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन पूरे विधि-विधान से माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने के बाद करवा चौथ की कथा सुनी जाती है। फिर रात के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही यह व्रत संपन्न होता है। मान्यता यह भी है कि करवा चौथ का व्रत रखने से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। करवा चौथ की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। सुहागिन महिलाएं कपड़े, गहने, शृंगार का सामान और पूजा सामग्री खरीदती हैं। करवा चौथ वाले दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी खाती हैं। इसके अलावा हाथ और पैरों पर मेहंदी लगाई जाती है और पूजा की थालियों को सजाया जाता है। व्रत करने वाली आस-पड़ोस की महिलाएं शाम ढलने से पहले किसी मंदिर, घर या बगीचे में इकट्ठा होती है। यहां सभी महिलाएं एक साथ करवा चौथ की पूजा करती है। इस दौरान गोबर और पीली मिट्टी से पार्वती जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। आज कल माता गौरी की पहले से तैयार प्रतिमा को भी रख दिया जाता है। विधि-विधान से पूजा करने के बाद सभी महिलाएं किसी बुजुर्ग महिला से करवा चौथ की कथा सुनती है। इस दौरान सभी महिलाएं लाल जोड़े में पूरे सोलह शृंगार के साथ पूजा करती हैं। चंद्रमा के उदय पर अर्घय दिया जाता है और पति की आरती उतारी जाती है। पति के हाथों पानी पीकर महिलाओं के उपवास का समापन होने की परंपरा है जिसके लिए महिलाओं ने कमर कस ली है।