Tuesday, December 07, 2021 05:28 AM

करवाचौथ...बाजारों में भीड़, मिल रहा स्पेशल डिस्काउंट

सोलन शहर में व्रत को लेकर महिलाओं में के्रज; बाजारों में लौटी रौनक, ब्यूटी पार्लर-मेहंदी लगवाने को सुबह से लग रही लाइनें

मोहिनी सूद-सोलन सुहागिन महिलाएं हर साल करवाचौथ का बेसब्री से इंतजार करती हैं। यह दिन उनके लिए बेहद ही खास होता है। पति की लंबी उम्र के लिए रखे जाने वाले और पति-पत्नी के प्रेम को दर्शाने वाले इस व्रत के लिए महिलाएं कुछ दिन पहले से ही तैयारियों में लग जाती है। ऐसे में बाजारों में भी महिलाओं के लिए ढेर सारे ऑफर्स निकाले गए हैं। हर बार की तरह इस बार भी करवाचौथ से दो दिन पहले से ही बाजार की रौनक देखते ही बन रही है।

पूरा दिन दुकानों पर महिलाओं की भीड़ लग रही है। मेहंदी लगाने वालों ने दाम बढ़ा दिए हैं। हालांकि पार्लरों में खूब डिस्काउंट दिए जा रहे हैं, जिनका दूर की महिलाएं लाभ भी उठा रही हैं। इस बार कलरफुल करवा के साथ-साथ मार्केट में कलर फुल दीये भी उपलब्ध हैं। जिसकी शुरुआती कीमत 60 रुपए है। इसके अलावा मार्केट में बिना कलर वाला करवा से 80 रुपए के बीच है। दुकानदार राजेश ने बताया कि इस बार मार्केट में लेस वाला स्पेशल करवा और छननी उपलब्ध हैं। इन करवों पर करवाचौथ लिखा है। लेस की क्वालिटी के हिसाब से इनकी कीमत तय की गई है। (एचडीएम)

व्रत में सरगी का विशेष महत्त्व करवाचौथ के दिन सरगी का भी विशेष महत्त्व है। इस दिन व्रत करने वाली महिलाएं और लड़कियां सूर्योदय से पहले उठकर सरगी खाती हैं। सरगी आमतौर पर सास तैयार करती है। सरगी में सूखे मेवे, नारियल, फल और मिठाई खाई जाती है। अगर सास नहीं है तो घर का कोई बड़ा भी अपनी बहू के लिए सरगी बना सकता है। सरगी सुबह सूरज उगने से पहले खाई जाती है ताकि दिन भर ऊर्जा बनी रहे।

करक चतुर्थी भी कहा जाता है... करवाचौथ के दिन को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। करवा या करक मिट्टी के पात्र को कहते हैं जिससे चंद्रमा को जल अर्पण, जो कि अर्घ कहलाता है, किया जाता है। पूजा के दौरान करवा बहुत महत्त्वपूर्ण होता है और इसे ब्राह्मण या किसी योग्य महिला को दान में भी दिया जाता है। करवाचौथ दक्षिण भारत की तुलना में उत्तरी भारत में ज्यादा प्रसिद्ध है। करवाचौथ के चार दिन बाद पुत्रों की दीर्घ आयु और समृद्धि के लिए अहोई अष्टमी व्रत किया जाता है। संकष्टी पर भगवान गणेश की पूजा करवाचौथ का दिन और संकष्टी चतुर्थी एक ही दिन होता है। संकष्टी पर भगवान गणेश की पूजा की जाती है और उनके लिए उपवास भी रखा जाता है। करवाचौथ के दिन माता पार्वती की पूजा करने से अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है। मां के साथ-साथ उनके पति भगवान शिव और उनके दोनों पुत्र कार्तिक और गणेश जी कि भी पूजा की जाती है।