Tuesday, September 17, 2019 04:23 PM

कर्नल मनीष धीमान

स्वतंत्र लेखक

सेना में लड़कियां

भारतीय थल सेना आज विश्व की सबसे ताकतवर  मानी जाने  वाली सेनाओं में से एक है । विश्व युद्ध दो की समाप्ति के बाद जब उसके परिणाम पर तब अंग्रेज साम्राज्य के आर्मी जनरल्स ने जो शोध पत्र पेश किया तो उसमें यह माना गया था कि दूसरे विश्व युद्ध में अंग्रेजों की तरफ  से लड़ने वाली सेनाओं में भारतीय सेना सबसे सशक्त और मजबूत सेना थी । अच्छे दर्जे के कपड़े और हथियार न होने के बावजूद जटिल व कठिन परिस्थितियों और वातावरण में जहां भी लड़ने के लिए भेजा गया वहां पर भारतीय सेना ने अपना लोहा मनवाया। आजादी के बाद भी भारतीय सेना ने चाहे वह 1948 में पाकिस्तानी कबाइलियों को श्रीनगर से खदेड़ना हो, या 1962 में  चीन के हिंदी- चीनी भाई- भाई के धोखे और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अच्छा प्रदर्शन, 1965 एवं 1971 हो या 1999 का कारगिल आपरेशन, भारतीय सेना ने समय-समय पर अपने शौर्य और साहस को प्रमाणित किया है। आजादी के बाद सेना में जरूरत के हिसाब से बदलाव लाए गए और सेना को आवश्यकता अनुसार आधुनिक हथियारों एवं तकनीक से युद्ध लड़ने के लिए सक्षम बनाने की कोशिश चलती रही। भारतीय थल सेना की कार्यकुशलता को और भी पैना करने के प्रयास में समय-समय पर नए-नए प्रयोग भी किए गए। इसकी एक कड़ी में 1993 में भारतीय सरकार ने सेना में औरतों को एक अधिकारी के तौर पर हिस्सा बनने का मौका दिया। औरतें भारतीय सेना में आज पिछले करीब 26 वर्षों से अधिकारी के तौर पर बड़ी ही सफलता से कार्य कर रही हैं। औरत   सैन्य अधिकारियों को सेना में लड़ाकू अंगों में न भेजकर उनको सहायक अंगों के तौर में काम करने वाली थलसेना की  टुकडि़यों में जगह दी गई है , जिसमें जज एडवोकेट जनरल एडुकेशन, सप्लाइए, आर्डिनेंस कोर्प तथा ई एम ई इंजीनियर और सिग्नल आदि तकनीकी अंगों में सेवा का मौका दिया है।  जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक तथा राजस्थान से लेकर अरुणाचल तक औरत सैन्य अधिकारी बड़ी ही मजबूती और काबिलीयत के साथ अपनी सेवाएं दे रही हैं। जनवरी 2019 में तब रक्षामंत्री श्रीमति निर्मला सीतारमण ने थल सेना पर लिए गए एक ऐतिहासिक फैसले की घोषणा करते हुए यह बताया कि अब लड़कियों को सेना में सिपाही  के पद में भी भर्ती किया जाएगा एवं सबसे पहले इनको सेना पुलिस में जगह दी जाएगी और धीरे-धीरे थल सेना के बाकी अंगों में भी आवश्यकतानुसार लड़कियों को मौका दिया जाएगा। मेरा यह मानना है कि आज जब लड़कियां हर क्षेत्र में लड़कों से कंधे से कंधा मिलाकर काम ही नहीं कर रही हैं अपितु ज्यादातर क्षेत्रों में इक्कीस साबित हो रही हैं और जब हम अपने देश के इतिहास के सबसे कुशल रणनीतिकारों, निडर और साहसी योद्धाओं या लड़ाकों की बात करते हैं तो रानी लक्ष्मीबाई का नाम प्रथम श्रेणी में आता है, तो सेना में भी औरतों को सेवा देने का पूरा अधिकार है। यह जरूरी नहीं है कि सेना का हर अंग सिर्फ  युद्ध ही लड़ता है, पर कुछ एक अंग लड़ाकू दस्तों को एडमिनिस्ट्रेटिव स्पोर्ट में भी काम करते हैं। अतः भारतीय सेना के लिपिक, मेकेनिक, अध्यापक आदि क्षेत्रों में लड़कियों को मौका दिए जाने से, एक तो औरतों के लिए और रोजगार के रास्ते खुलेंगे तथा दूसरा औरतों और मर्दों में समानता की तरफ  बढ़ाया गया यह बहुत बड़ा कदम होगा।