Monday, September 23, 2019 02:21 AM

कर्नल मनीष धीमान

स्वतंत्र लेखक

सेनाओं में समन्वय जरूरी

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने लाल किले की प्राचीर से जब देशवासियों को संबोधित किया तो उन्होंने बहुत सारी बातों का जिक्र किया जिनमें तीन तलाक का हटाना, धारा 370 का खत्म करना, देश को जनसंख्या विस्फोट के बारे में आगाह करना आदि। इसके साथ उन्होंने कहा कि भारतीय सेना पर हमें गर्व है और सेना में और भी अच्छे तालमेल और समन्वय को बढ़ाने के लिए सरकार ने निर्णय लिया है कि चीफ  ऑफ  डिफेंस स्टाफ  के पद को सृजित किया जाएगा। पहली बार चर्चा कारगिल के ऑप विजय के बाद श्री के सुब्रमण्यम जो राष्ट्रीय सुरक्षा और स्ट्रैटेजिक एक्सपर्ट थे, के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया जिनको राष्ट्रीय सुरक्षा में कमियां और इनको कैसे दूर किया जा सकता ह,ै का काम सौंपा गया। इस कमेटी ने जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी उसमें उन्होंने चीफ  ऑफ  डिफेंस स्टाफ  के पद का पहली बार जिक्र किया। उनके अनुसार भारतीय सेना के तीनों अंगों जल, थल और वायु में एक आला दर्जे का समन्वय और तालमेल बैठाने के लिए हमें इन तीनों के ऊपर एक पद सृजित करना चाहिए, जो रक्षा मंत्रालय से सीधा संपर्क में हो और किसी भी तरह के सलाह- मशवरे और योजना के बारे में सिंगल पाइंट कांटैक्ट होगा।  इन्होंने  इसको पांच तारा जनरल बनाने का भी प्रस्ताव दिया । उसके बाद 2001 में एक और कारगिल रिव्यू कमेटी बनाई गई जिसमें सरकार के चुने हुए मंत्री व सांसद थे और उनकी अध्यक्षता देश के तब उपप्रधानमंत्री श्री लाल कृष्ण आडवाणी जी कर रहे थे। उस कमेटी ने भी चीफ  ऑफ  डिफेंस स्टॉफ  के पद को सृजित करने का समर्थन किया और उन्होंने इसके लिए संसद में चर्चा करने के बाद विपक्ष की भी समर्थन की बात कही, इसके बाद यह मुद्दा संसद में उठाया गया। चर्चा हुई, पर एक इस पर समर्थन न होने की वजह से अभी तक अधर में लटका हुआ था। इसके बाद 2011-12 में श्री नरेश चंद्रा जोकि मिनिस्ट्री ऑफ  डिफेंस में सेक्रेटरी थे, के नेतृत्व में एक टास्क फोर्स बनाई गई और तीनों सेनाओं में किस तरह से समन्वय और तालमेल बढ़ाया जाए, इसकी  की रिपोर्ट सौंपने का  जिम्मा दिया। नरेश चंद्रा की रिपोर्ट में उन्होंने तीनों सेनाओं में एक और चार तारा जनरल की पोस्ट सृजित करने को कहा और उसे परमानेंट चेयरमैन ऑफ  चीफ  ऑफ  स्टाफ  कमेटी कहा जाएगा और वो तीनों सेनाओं के अध्यक्ष के बराबर का पद होगा। मेरा मानना है यह पद सेना के तीनों अंगों में जल, थल और वायु में और अधिक सुधार लाएगा और जो कमियां हैं उनको दूर करने में मदद करेगा। जिस तरह से दुनिया में युद्ध नीति दिन प्रतिदिन बदल रही है, युद्ध लड़ने का तरीका बदल रहा है, ऐसे हालात में सिर्फ  हम सेना के किसी एक अंग पर निर्भर नहीं रह सकते। आज का युद्ध सेना के तीनों अंगों के आपसी सहयोग और एक-दूसरे का पूरक बनकर ही लड़ा जा सकता है।