Monday, September 24, 2018 03:27 PM

कला के क्षेत्र में हिमाचली युवा

प्रीटि जिंटा  हो या कंगना रणौत, दीपक ठाकुर या गे्रट खली, ये सभी पहाड़ की माटी के वे  सितारे हैं , जो अपनी चमक से देश-दुनिया को रोशन कर रहे हैं। कला के क्षेत्र में हिमाचली युवाओं की प्रतिभा को दखल के जरिए बता रहे हैं.....

भावना शर्मा, प्रतिमा चौहान के साथ राकेश कथूरिया

कला के क्षेत्र में हिमाचल के युवक-युवतियों ने जिस कद्र तेजी से अपने कदम आगे बढ़ाएं हैं। उससे देश ही नहीं विदेशों में भी हिमाचल की शान बढ़ी है । गायकी के क्षेत्र में मोहित चौहान ने हिमाचल का नाम रोशन किया है तो वहीं कंगना रनौत ने भी पहाड़ी प्रदेश को बालीवुड में ख्याति दिलवाई है । हिमाचल का सम्मान पूरे भारत में बढ़ाने वाले कलाकारों की एक लंबी फेहरिस्त है। मुंबई में शिमला की  प्रीटि जिंटा को बालीवुड ने सिर आंखों पर बिठाया है तो टीवी शोज रॉकस्टार माटी के लाल में  कुनिहार की कृतिका तनवर ने अपनी बेहतरीन प्रतिभा का प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया कि हिमाचल में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उल्लेखनीय है कि कृतिका सोनी टीवी के इंडियन आइडल में भी टॉप 16 में अपना स्थान बना चुकी है । सोलन की रिया और श्रेया स्टार भारत पर सीरियल में अपनी पहचान बना चुकी हैं और वे डीडी पंजाबी के किसमें कितना है दम की विनर भी रही हैं। इन जुड़वां बहनों ने चाइना में भी हिमाचल को ख्याति  दिलवाई है । नूरपुर का अनुज शर्मा हो या कांगड़ा की बेटी सोनम चौधरी या चंबा का राजीव थापा बॉलीवुड की मूवी में गीतों को अपनी आवाज दे चुके हैं । विश्व में रेस्लिंग के क्षेत्र में हिमाचल को पहचान दिलवाने वाले दिलीप राणा उर्फ  द ग्रेट खली ने राज्य की शान पूरे विश्व में बढ़ाई है ,तो प्रो कबड्डी खिलाड़ी अजय ठाकुर तथा क्रिकेट खिलाड़ी ऋषि धवन व सुषमा वर्मा ने भी खेल के क्षेत्र में झंडे गाड़े हैं । धर्मशाला से ताल्लुक रखने वाले चौकस भारद्वाज ने क्रिएटिव डायरेक्टर की भूमिका  निभाते हुए कई कलाकारों को मुकाम दिया है। धर्मशाला के ही विजय सिंह ने  मुंबई में कई ब्रांड के शूट  कर अपनी अलग पहचान बनाई है । सोलन के मनोज वालिया  ने सावधान इंडिया  में कार्य किया तो हिमाचल के अशीम  आर मोहन  ने डायरेक्टर के रूप में अक्षय कुमार की मूवी खिलाड़ी 786 का निर्देशन किया। मंडी के पवन शर्मा  ने सीरियल वरीना में  बतौर डायरेक्टर  रहते  कई हिमाचली कलाकारों को  मौके दिए। गायकी के क्षेत्र में कांगड़ा का कुमार साहिल कई रियाल्टी शो का हिस्सा बन चुका है। सोलन से ताल्लुक रखने वाली कास्टिंग डायरेक्टर कंचन गुप्ता प्रदेश की उभरती प्रतिभाओं को सीरियल में काम देकर उनकी पहचान बनाने में जुटी हैं । सोनी टीवी पर शीघ्र  आने वाले सीरियल में हिमाचल की मोनिका नेगी शूटिंग में व्यस्त है , जबकि शिव्या पठानिया कई सीरियल में काम कर चुकी है । पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में बिलासपुर की उपमा शर्मा व कशिका पटियाल कांगड़ा की ईशा गुप्ता, सोलन की रचिका जोशी व शिमला की सुनिधि मेहता छाई हुई हैं। साउथ की फैशन इंडस्ट्री में रामपुर की राखी और चंबा की ईशा शर्मा तेजी से अपने कदम आगे बढ़ा रही हैं।

‘दिव्य हिमाचल’ ने तराशा इनका हुनर

रामपुर से ताल्लुक रखने वाले रविज ठाकुर ‘दिव्य हिमाचल’ के मिस्टर हिमाचल के मंच से आगे बढ़ते हुए पोरस सीरियल सहित दर्जनों धारावाहिकों में काम कर चुका है। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन व उनकी पत्नी जया बच्चन के साथ ‘मिस हिमाचल’ विजेता एंजल गोयल को कल्याण ज्वेलर्स के विज्ञापन में काम करने का मौका मिला है। ‘मिस हिमाचल’ रह चुकी नताशा सिंह, पूर्वा राणा व शिमला की प्रीति सूद ने भी बॉलीवुड में प्रदेश का नाम खूब चमकाया है ।

ये संस्थाएं दे रही सहयोग

हिल्लीवुड फिल्म म्यूजिक, कल्चरल एंड आर्टिस्ट एसोसिएशन हिमाचल प्रदेश,  प्रोमोटर्स ऑफ  सोशल एंड कल्चरल हेरिटेज ऑफ  हिमाचल प्रदेश व सामाजिक सांस्कृतिक संगठन दि प्रोमोटर्स के अलावा दर्जनों संस्थाएं हिमाचल प्रदेश में प्रतिभाओं को ऊंचा उठाने के लिए प्रयासरत हैं।

कांगड़ा के अंशज बैंड ग्रुप का कोई सानी नहीं

कांगड़ा के अंशज बैंड ग्रुप का भी कोई सानी नहीं है। सात नन्हे-मुन्ने का यह ग्रुप भी चैनल डीडी पंजाबी के रियलिटी शो किस में कितना है दम में अपना दमखम दिमाग दिखा चुके हैं । नॉर्थ जॉन  में  रनरअप का खिताब वह हासिल कर चुके हैं।

प्रोफेशनल कोर्स कर रहे छात्र

प्रोफेसर जोगेंद्र सकलानी का कहना है कि आज के समय में बच्चों का रुझान मात्र प्रोफेशनल कार्सेज तक ही सीमित रह गया है।  कुछ एक बच्चे ही जो पेंटिंग, स्कल्चर और म्यूजिक जैसे विषयों में प्रवेश लेने में रुचि दिखा रहे हैं। औपचारिक शिक्षा तो वैसे भी  कालेजों में दी ही जा रही है। ऐसे में छात्र इन्हीं कालेजों में प्रवेश लेकर औपचारिक शिक्षा ही ले रहे हैं, लेकिन कला की दिशा में छात्रों का रुझान न होने के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि इसके लिए सरकार द्वारा स्कूली स्तर पर ही प्रयास कम किए जा रहे हैं।

वेस्टर्न नृत्य युवाओं की पसंद

प्रोफेसर डाक्टर लक्ष्मी का कहना है कि छात्र डांस और म्यूजिक सीखने में ज्यादा उत्सुक हैं। इसमें क्लासिकल नृत्य को सीखने वाले अधिक हैं। छात्रों को वेस्टर्न नृत्य सीखना और उसे परफार्म करना ज्यादा बेहतर लगता है। इसके अलावा औपचारिक शिक्षा लेने के प्रति छात्रों का रूझान कम है, मात्र वहीं छात्र औपचारिक शिक्षा को लेने में रूचि दिखा रहे हैं, जिन्हें इसी विद्या में अपना करियर बनाना है।

म्यूजिक-पेंटिंग में गिने-चुने छात्र

प्रो. प्रवीण का कहना है कि जिन बच्चों को म्यूजिक, पेंटिंग, फाइन आर्ट्स में इंटरस्ट हैं, वहीं कला से जुड़े कालेज में प्रवेश पाने के लिए आ रहे हैं। छात्रों का रुझान ज्यादातर म्यूजिक और पेंटिंग में हैं, लेकिन बात अगर दूसरे कालेजों की की जाए तो वहां बच्चे कला से जुड़े विषयों को ज्यादा प्राथमिकता नहीं दे रहे। मात्र छात्र इसे अंक बढ़ाने के विकल्प के तौर पर ही अपना रहे हैं।

गीत-संगीत म्यूजिकल अकादमी कांगड़ा ने 200 को किया पारंगत

कांगड़ा में सात सालों से गीत-संगीत म्यूजिकल अकादमी चला रहे सुनील सूफी करीब 200 बच्चों को तालीम दे चुके हैं । वह बताते हैं कि भारतीय शास्त्रीय संगीत शैली में पहले ध्यान साधना करवाई जाती है । उसके बाद स्वर अभ्यास व अलंकारों का अभ्यास रागों का प्रशिक्षण दिया जाता है। वह कहते हैं कि पाश्चात्य संगीत महज दिखावा है, इसका आधार तो शास्त्रीय संगीत ही है । वह कहते हैं कि हिमाचल में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन हम बच्चों को मोटिवेट नहीं कर पा रहे हैं । सुनील सूफी बताते हैं कि अभिभावक जो पढ़े लिखे हैं, वे अपने बच्चों को 4.4 साल तक प्रशिक्षण दिलवाते हैं, लेकिन जिन्हें संगीत का ज्ञान नहीं है, वह बच्चों को महज 15 दिन की स्कूल की  छुट्टियों में ही संगीत के तमाम गुर सिखाने की चाहत रखते हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रभु श्री रामलाल संगीत महाविद्यालय झांसी से डाक्टर कृष्णकांत  के सानिध्य में संगीत में एमए, एमफिल व बीएड की है और अब पीएचडी करने की तैयारी में हैं।

डेजल इंस्टीच्यूट पालमपुर ने अब तक 500 को सिखाया डांस-म्यूजिक

पालमपुर में डेजल इंस्टीच्यूट चला रहे साहिल व सोनम शर्मा तीन सालों से यहां डांस और म्यूजिक का प्रशिक्षण बच्चों को दे रहे हैं । करीब 500 बच्चों को अभी तक वे डांस और म्यूजिक सिखा चुके हैं । वे बताते हैं कि क्लासिकल वेस्टर्न भरतनाट्यम के साथ-साथ गिटार हारमोनियम व बाकी संगीत का प्रशिक्षण दिया जाता है । नार्थ इंडिया डांस चैंपियनशिप में संस्थान के बच्चे फाइनल तक पहुंचे हैं तथा मुंबई में कई प्रोफेशनल डांसर बन चुके हैं । साहिल कहते हैं कि यहां प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन हिमाचल के स्तर पर कोई टीवी चैनल न होने की वजह से टैलेंट उभरकर सामने नहीं आ रहा है।  उल्लेखनीय है कि साहिल सोनम की जोड़ी जी टीवी पर होने वाले कार्यक्रमों में कोरियोग्राफर के रूप में कार्य कर चुकी है तथा विदेशों में भी इस जोड़ी ने कई बड़े स्टेज शो किए हैं।

एसजे डांस अकादमी सोलन ने 1000 का टेलेंट निखारा

सोलन में एसजे डांस अकादमी चला रहे नवीन पाल जॉनी 15 सालों से डांस की ट्रेनिंग बच्चों को दे रहे हैं । करीब 1000 बच्चों को डांस की ट्रेनिंग दे चुके नवीन पाल कहते हैं कि मौजूदा दौर में बच्चे रियालिटी शो की तरफ  आकर्षित हुए हैं। लिहाजा वे अपने भविष्य को देखते हुए बालीवुड और इंटरनेशनल स्टाइल डांस को ही तरजीह देते हैं । श्री जॉनी के मुताबिक 30 फीसदी बच्चे ही क्लासिकल सीखना पसंद करते हैं । वैसे क्लासिकल डांस का आधार है । वह कहते हैं कि यहां प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन बड़े पैमाने पर इन बच्चों को प्रशिक्षण देने की जरूरत है। वह बताते हैं कि हिमाचल में डांस सीखने वाले बच्चों की कतार लंबी हो रही है, लेकिन उसमें डांस अकादमी व प्रशिक्षण देने वाले कम हैं । ऐसे में हिमाचन में सरकारी प्रयासों की जरूरत होने लगी है।

तानसेन संगीत महाविद्यालय सोलन में हर साल 150 बच्च्े सीख रहे नाचना- गाना

तानसेन संगीत महाविद्यालय सोलन तीन सालों से नृत्य और संगीत की ट्रेनिंग बच्चों को दे रहा है । वर्ष में औसतन 150 बच्चे यहां संगीत और नृत्य का प्रशिक्षण ले रहे हैं । इस महाविद्यालय के बच्चे कई रियलिटी शो का हिस्सा बन चुके हैं और भविष्य में एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत यह महाविद्यालय इस संस्थान के बच्चों को विदेश भेजने की तैयारी में है , जबकि विदेश के बच्चे यहां संगीत और नृत्य की शिक्षा ले चुके हैं । इस महाविद्यालय में घरानों से सीखे हुए व प्रमाणित बोर्ड से मान्यता प्राप्त प्रशिक्षक डिप्लोमा व मास्टर डिग्री करवा रहे हैं । महाविद्यालय के प्रबंध निदेशक दीपक आर्य का कहना है कि यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है । अभिभावकों का भी साथ बच्चों को मिल रहा है । कुछ अभिभावक बच्चों को जल्दी में संगीत और नृत्य की शिक्षा दिलवाना चाहते हैं , लेकिन ऐसा संभव नहीं है । इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कड़ी तपस्या के साथ-साथ कड़े रियाज की भी जरूरत होती है।

70 कालेजों में वोकल म्यूजिक   की सुविधा

अमरजीत सिंह उच्च शिक्षा, निदेशक 

प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी शिक्षण संस्थानों को हाईटेक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हिमाचल के 70 कालेजों में वोकल म्यूजिक, म्यूजिक की कई कक्षाएं सफल रूप से चल रही हैं। पेंटिंग और आर्ट परफार्मिंग के तहत डांस, माइम, थियेटर परफार्मिंग भी कई कालेजों में चल रहे हैं। सरकार व शिक्षा विभाग की ओर से कालेजों में शुरू किए गए वोकेशनल कोर्सेज की ओर छात्रों का ज्यादा रुझान बढ़ रहा है।

बैग फ्री डे की सराहना

उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक का कहना है कि सरकारी स्कूलों में अभी तक सबसे अच्छा रुझान बैग फ्री डे पर आ रहा है। पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के मनोरंजन और उनकी कला को मंच तक लाने के लिए इस उत्सव की बहुत सराहना हो रही है।  इसके अलावा शिक्षा उत्सव और अखंड ज्योति अभियान का भी अच्छा रिस्पांस आने लगा है। वर्तमान में करीब 90,000 छात्र वोकेशनल विषय को पढ़ रहे हैं।

स्कूल-कालेजों में कला को जोड़ने का प्रयास

युवाओं की प्रतिभा समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके, इसका प्रयास किया जा रहा है। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र पढ़ाई के साथ कला में भी अपनी प्रतिभा दिखा सके,इसके लिए स्कूलों में विभिन्न प्रतियोगिताएं शुरू की गई हैं। स्कूल-कालेजों में हर विशेष दिन पर डांस, पेंटिंग, म्यूजिक, प्रश्नोत्तरी और अन्य प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। कालेजों में भी विभिन्न प्रतियोगिताएं छात्रों से करवाई जा रही हैं। इस साल भी कई छात्र स्कूल और कालेजों से विभिन्न कला प्रतियोगिता में स्टेट और नेशनल लेवल तक भाग लेने गए हैं।

सरकारी स्कूल में नहीं परफार्मिंग आर्ट

छात्रों की प्रतिभाओं को निखारने के लिए सरकार और शिक्षा विभाग योजनाएं शुरू करने में अभी तक नाकाम रहा है। मौजूदा समय में सरकारी स्कूलों में वोकेशनल कोर्सिस के अलावा परफार्मिंग आर्ट को लेकर कोई भी विषय छात्र नहीं पढ़ रहे हैं। हालांकि शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार स्कूलों में छात्र परफार्मिंग कला के माध्यम से अपनी कला को लोगों तक पहुंचा सके, इसके लिए स्कूलों में जल्द ही म्यूजिक, डांस, थियेटर परफार्मिंग, माइम जमा एक और दो के विषय छात्रों के लिए शुरू करने की योजना है। फिलहाल मौजूदा समय में सरकारी स्कूलों में छात्रों को अपनी कला दिखाने का सुनहरा मौका नहीं मिल रहा है। कक्षा के विषयों से हटकर अन्य परफार्मिंग विषयों से छात्र अछूते रह रहे हैं।

करोड़ों हो चुके हैं अक्ष बाघला के मुरीद

हिमाचल प्रदेश का युवा कलाकार अक्ष बाघला, जो विश्वभर में एक कलाकार है जो तीस आवाजों व वीडियो के लिए जाना जाता है। अक्ष हिमाचल से पहला ऐसा कलाकार बन कर उभरा है, जिसने यू-ट्यूब पर कामयाबी पाई । संगीतकार, गायक व कंपोजर अक्ष को हाल ही में यू-ट्यूब द्वारा पुरस्कारित और प्रमाणित किया गया। यू-ट्यूब चैनल पर अक्ष के 4.5 करोड़ से अधिक व्यूर्स और लगभग 9 लाख सब्सक्राइबर हैं, जो अपने आप में मायने रखते हैं। अक्ष शीघ्र ही ओरिजिनल गाने के साथ डेब्यू करने जा रहे हैं। अक्ष के पिता संजीव बाघला पालमपुर के जाने-माने व्यवसायी एवं समाजसेवी हैं, जबकि माता लतिका बाघला शिक्षक हैं। डीएवी कालेज चंडीगढ़ से वाणिज्य में स्नातक होने के बाद उन्होंने अगस्त 2016 में अपने यू-ट्यूब चैनल को शुरू किया। अक्ष ने बताया  कि इंटरनेट मेरा सबसे बड़ा शिक्षक हैं और उसने मुझे बहुत कुछ सिखाया है ।

कांगड़ा के ब्वायज मचा रहे धूम

कांगड़ा के ब्वायज  यू-ट्यूब के माध्यम से भी अपनी पहचान बनाने में लगातार जुटे हुए हैं । ऐसे कई वीडियो आज लाखों दर्शकों की पसंद बन चुके हैं । कांगड़ा के युवाओं की ही बात करें तो दा एडवोकेट इंजीनियर फनी, वीडियो ,चोर मचाए शोर, दोस्ती पार्टियां, टाइप्स ऑफ यार कमीने छोरु, ए कुडि़यां, देसी हलचल, स्कूल लाइफ  व सीआईडी जैसे वीडियो यू-ट्यूब पर धमाल मचा रहे हैं।

साहित्यकार-कवियों को किया जा रहा प्रोत्साहित

पूर्णिमा चौहान, सचिव भाषा एवं संस्कृति विभाग

भाषा संस्कृति विभाग हिमाचल के कवि, लेखकों, साहित्यकारों के लिए कई कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, ताकि उनके द्वारा लिखी गई किताबों, कहानियों को न केवल हिमाचल के युवा और पढ़ सके, बल्कि बाहरी राज्यों के लोगों तक भी हिमाचली लेखकों की किताबें उपलब्ध हों। विभाग ने सात पुरानी प्राचीन लिपियों की किताब भी बनाई हैं। प्रदेश में भाषा संस्कृति विभाग का यह पहला प्रयास है। वहीं जितनी भी पांच पुरानी लिपियां विभाग की ओर से तैयार की गई हैं, उनकी स्कोट टेप बनाई जाएगी, जिसे लोग किसी भी चीज में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके साथ ही भाषा विभाग ने म्यूजियम में फ्री फ्रेममेट बनाए हैं। कवि लेखकों के लि लीटरेचर फेस्टिवल, पहाड़ी उत्सव, डांस फेस्टिवल भी इस बार पहली बार विभाग द्वारा आयोजित किया गया। प्रदेश की संस्कृति व कला को संजोए रखने के लिए मीरा डांस, म्यूजिक क्लासिकल फेस्टिवल भी जल्द प्रदेश में करवाने जा रहे हैं। भाषा कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा कलाकारों के लिए सम्मेलन और संगोष्ठी आयोजित की जाती है, जिसमें देश भर के कवि और लेखक भी भाग लेते हैं। इसके साथ ही हिमाचल की कला को बढ़ावा देने के लिए पुरानी राहों के नाम से अपूर्सा योजना भी शुरू की है।  अपूर्सा के तहत कई मूमेंटो बनाए जाएंगे और उन मूमेंटो को सभी सरकारी विभागों के कार्यक्रमों में इस्तेमाल करने के लिए भी सरकार ने आदेश जारी किए गए हैं। अपूर्सा के तहत बनाए जाने वाले मूमेंटो और कई बैच प्रदेश के कलाकारों द्वारा ही बनाए गए होंगे।  भाषा एवं कला विभाग द्वारा हिमाचल को पर्यटन की दृष्टि से भी और विकसित करने के लिए उन जगहों पर अपूर्सा के तहत साइन बोर्ड लगाए जाएंगे, जहां-जहां महात्मा गांधी आए थे।  विभाग ने प्रदेश के ऐसी 11 जगहों का चयन कर लिया है, जहां महात्मा गांधी ने समय बिताया था।  इसके अलावा विभाग की ओर से एक और योजना बनाई जा रही है, जिसमें प्रदेश के ब्रांड हिमाचल को तलाशा जाएगा और उन्हें सम्मानित किया जाएगा। युवाओं को ज्यादा से ज्यादा कला से जोड़ा जा सके, इसके लिए जल्द ही राज्य में कलाग्राम मेला भी आयोजित किया जाएगा, इसके लिए जगह का चयन किया जा रहा है। प्रदेश के जो युवा टीवी, रेडियो, डांस, गायन में करियर बना रहे, उनके लिए जल्द ही स्कॉलरशिप की सुविधा दी जाएगी।  सरकार से इस बारे में बात चल रही है। युवाओं को तीन हजार से पांच हजार तक स्कॉलरशिप देने की योजना तैयार की जा रही है।

कला में जौहर दिखाने वाले युवाओं के लिए योजनाएं

हिमाचल के जो युवा कला के क्षेत्र में जौहर दिखा रहे हैं, उनकी सहायता के लिए विभाग तत्पर है।  जो युवा फिल्मों में करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए विभाग फिल्म प्रोडेक्शन में सहायता कर रहा  है। म्यूजियम ग्रांट स्कीम में भी सभी को अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए पूरी छूट दी गई है।  अपनी कला को देश भर में विकसित करने के लिए भारत सरकार ने मैपिक कल्चर रिसोर्सिस वेबसाइट बनाई है। इस पर कोई भी युवा अपना नाम रजिस्टर्ड कर सकते हैं।