Saturday, July 11, 2020 07:56 PM

कविता : बाल दिवस

खुशबू

9वीं कक्षा की छात्रा,

गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा

जब देखती हूं नन्हें मुन्ने बच्चों को खेलते हुए, तो याद आता है बचपन।
जब आता है बालदिवस
तो याद आता है बचपन।
जब देखती हूं, मां की गोद में बैठे हुए बच्चों को याद आता है बचपन।
जब देखती हूं, बच्चों को अपनी मां के हाथ से खाना खाते हुए, याद आता है बचपन।
जब देखती हूं  बच्चों को आंगन में
किलकारी मारते हुए, तो याद आता है बचपन।
जब देखती हूं
बच्चों को खुशी से नाचते हुए तो याद आता है बचपन।