कविता : वीर जवान

मौसम चाहे कोई भी हो सरहदों पर ये रहते हैं, सर्दी गर्मी सब सह लेते, डटकर ये खड़े रहते हैं। देश की रक्षा करने वाले ये हैं वीर जवान, नमन है मेरा इन वीरों को, जो हैं भारत की शान। देश की रक्षा के लिए खोते हैं ये अपनी जान, जुल्मों सितम ये सह लेते बेचते नहीं ईमान। जंग के मैदान में जाने से पहले कस लेते हैं ये कमर, मरकर भी जिंदा रहते कहलाते हैं अमर। घुसपैठीयों को रोकने के लिए बनते हैं ये ढाल, डरकर ये भागते नहीं चाहे दुश्मन चले गहरी चाल। गोली लगकर भी गिरते नहीं ये वीर जवान, सिर कट जाने पर भी आह न भरें ये भारत की शान। धन्य हैं वे माताएं जिनके ऐसे  वीर बच्चे हैं, बड़े दिल वाले वीर और देशभक्त  ये सच्चे हैं। देश की रक्षा करने के खातिर मौत गले लगाते हैं, दुश्मनों को टिकने नहीं देते उल्टे पैर भगाते हैं। धन्यवाद करता है हर वह प्राणी जो इस देश में जन्म लेता है अमन और शांतिप्रिय देश के ऐसे वीरों से वह मिलता है।

- मंजु शर्मा, सोलन

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