Saturday, August 08, 2020 11:08 AM

कसौली से निकले नायाब नगीने 

सरहदों को जवान, बॉलीवुड को सितारे और कई प्रदेशों को मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री देने देने वाले कसौली ने क्वालिटी एजुकेशन में डंका बजाया है। लाखों छात्रों का भविष्य संवारने में अहम योगदान दे रही सोलन की पर्यटन नगरी कसौली एजुकेशन हब बनकर भी उभरी है। कसौली के स्कूलों ने ऐसी क्रांति लाई कि शिक्षा के साथ-साथ खुले रोजगार के दरवाजों से प्रदेश ने तरक्की की राह पकड़ ली। हिमाचली ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के होनहारों का कल संवार रहे कसौली में क्या है शिक्षा की कहानी, बता रहे हैं हमारे संवाददाता

— सुरेंद्र मामटा

सोलन का कसौली वैसे तो पर्यटन की दृष्टि से विश्वविख्यात है, लेकिन इसका एक ऐसा पहलू भी है, जिससे लोग अनभिज्ञ हैं। पर्यटन के साथ-साथ कसौली शिक्षा का भी हब है। कसौली के स्कूलों ने सैकड़ों ऐसे नगीने देश-विदेश को दिए हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में कसौली को चमका रहे हैं। कसौली क्षेत्र में कुछ ऐसे शिक्षण संस्थान हैं, जिनकी तूती पूरे विश्व में बोलती है। इनमें लॉरेंस स्कूल सनावर, पाइनग्रोव स्कूल, सेंट मेरी कॉन्वेंट स्कूल और कसौली इंटरनेशनल स्कूल, सरस्वती निकेतन, केंद्रीय विद्यालय कसौली, सीआरआई और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कसौली शामिल हैं।

...कसौली इंटरनेशनल की स्पोर्ट्स के लिए भी पहचान

2007 में कसौली इंटरनेशनल स्कूल की स्थापना की गई। पढ़ाई के अलावा स्पोर्ट्स के क्षेत्र में यह स्कूल अपनी पहचान बना रहा है। दो बड़े स्कूल के बीच यह स्कूल भी धीरे-धीरे सफलता की सीढि़यां चढ़ रहा है। स्कूल की स्थापना का मूल उद्देश्य था कि छात्रों को उनकी आवश्यकताओं के लिए उपयुक्त सबसे आधुनिक शिक्षण से अवगत करवाया जाए। विश्व स्तर पर शिक्षण रणनीतियों और कार्यप्रणाली का पता लगाने के लिए प्रत्येक बच्चे को स्कूल के खेल के मैदान में प्रवेश करने दें और खुद को एक ध्वनि स्वास्थ्य से लैस करें और खेल और जीवन के नियमों का पालन करना सीखें। इसके अलावा प्रौद्योगिकी के नवीनतम साधनों से युवाओं को सशक्त बनाना और उन्हें यह बताने के लिए कि वे अपने स्वयं के धर्म और जाति के हैं, मानवता हर मनुष्य का एकमात्र धर्म है।

हुनर ने हर जगह गाड़े झंडे

कसौली का नाम वैसे तो सुनते ही पर्यटन स्थल की तस्वीर और आसपास की पहाडि़यां एवं वहां के सुंदर-सुंदर नजारे ही जहन में आते होंगे, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में कसौली की कितनी अहमियत है, इस बात का अंदाजा महज ही किसी को होगा। इतिहास के गर्भ में यदि देखें तो कसौली के शिक्षण संस्थानों ने देश को बहुत कुछ दिया। बात चाहे राजनीति की हो, या हो फिर बिजनेस की। बात बॉलीवुड की करें या फिर सेना की, फिर ज्यूडीशियल सर्विसेज या फिर स्पोर्ट्स की। हर जगह कसौली के छात्रों ने अपनी कामयाबी के झंडे गाड़े हैं। ये स्कूल जहां शिक्षा के क्षेत्र में सफलता की सीढि़यां चढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इन शिक्षण संस्थानों में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों के भी हजारों छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। खेल की गतिविधियों पर बात करें, तो साल में कई दफा इन स्कूलों में राष्ट्र स्तरीय खेलों का आयोजन होता है और बाहरी राज्यों के सैकड़ों छात्र भाग लेते हैं। यही कारण है कि यहां खेलों को बढ़ाया देने के लिए उच्च स्तरीय सुविधाएं और मैदान उपलब्ध है। इनमें से कई स्कूल ऐसे भी हैं, जिन्होंने आसपास के गांव गोद लिए हैं और सरकार के अलावा स्कूल भी इन गांवों का विकास कर रहे हैं। इसके अलावा नामी शिक्षण संस्थान होने से रोजगार के साधन भी हुए हैं। स्थानीय लोग टीचर एवं नॉन टीचर के पद पर सेवाएं देकर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। बड़ी बात यह है कि इन्हीं सभी के बीच एक सरकारी स्कूल भी है, जिसे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कसौली-गढ़खल के नाम से जाना जाता है। इस स्कूल में कसौली एवं गढ़खल के आसपास के गांव के सैकड़ों विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। मौजूदा समय में स्कूल में कुल 270 छात्र शिक्षारत हैं। इसके अतिरिक्त देश का एकमात्र सेंट्रल रिसर्च इंस्टीच्यूट स्थापित है। इसे 1905 में स्थापित किया गया था। यहां विशेषतौर पर वैक्सीन एवं एंटीसीरा तैयार की जाती है। यही नहीं सीआरआई से छात्र माइक्रोबायोलॉजी में एमएससी की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वर्तमान में पूरे देश से छात्र यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

बाहर के चक्करों से मिला छुटकारा

कसौली कुछ समय से शिक्षा का हब बनकर उभरा है। कसौली में बच्चों की बेहतरीन शिक्षा के लिए कई स्कूल खुल गए हैं। इस कारण  हिमाचल के बच्चों को बाहरी राज्यों में नहीं जाना पड़ता। यह प्रदेश सरकार की उपलब्धि मानी जा सकती है। इससे पहले बच्चों को अच्छी शिक्षा ग्रहण करने के लिए बाहरी राज्य का रुख करना पड़ता था, जिससे अभिभावकों को मोटी रकम चुकानी पड़ती थी                

—बबीता ठाकुर, शिक्षाविद

शिक्षकों की कोई कमी नहीं

कसौली पर्यटन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है और जिला मुख्यालय व चंडीगढ़ जैसे एडवांस शहरों से जुड़ा है, इसलिए क्षेत्र के लोग शिक्षा की महत्त्वता को भलीभांति जानते हैं। साथ ही क्षेत्र के विद्यालय आधुनिक सुविधाओं से युक्त हैं। विद्यालयों में शिक्षकों व गैर शिक्षकों की कमी नहीं है    

—डीआर भट्टी, शिक्षाविद

दस साल में बदल डाली तस्वीर

दस साल में हिमाचल के सभी जिलों की अपेक्षा सोलन जिला शिक्षा के केंद्र के रूप में उभरा है, विशेष रूप से कसौली। कसौली की प्राकृतिक सुंदरता और वातावरण के कारण पर्यटकों के साथ-साथ कसौली शिक्षा क्षेत्र में भी अग्रणी बना हुआ है। दूसरा पंजाब, हरियाणा व दिल्ली से निकट होने के कारण सुगमता से पहुंचा जा सकता है। कसौली व धर्मपुर में शिक्षण संस्थानों के आने से क्षेत्र की आर्थिक उन्नति के साथ-साथ स्थानीय लोगों में शिक्षा का प्रसार भी उच्च स्तर का हुआ है  

— हेमांग कपिल, शिक्षाविद

कुल छात्र 3344

यदि बात की जाए छात्रों की संख्या की तो सेंट मेरी कॉन्वेंट स्कूल में सबसे अधिक है। मौजूदा समय में स्कूल में करीब 1200 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसके अलावा पाइनग्रोव स्कूल में 922 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसके बाद लॉरेंस स्कूल सनावर में 700 और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में 270 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जबकि कसौली इंटरनेशनल स्कूल में 252 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

सरहदों से बॉलीवुड तक लॉरेंस के सितारे

कसौली के शैक्षणिक संस्थानों की बात आए तो शुरुआत लॉरेंस स्कूल सनावर से होना लाजिमी है। यह स्कूल वर्ष 1847 में स्थापित किया गया था और इसे एशिया के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक माना जाता है। 1750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्कूल 139 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस स्कूल को हेनरी लॉरेंस ने स्थापित किया था। उनका इरादा ब्रिटिश सैनिकों और अन्य गरीब श्वेत बच्चों के अनाथों की शिक्षा प्रदान करना था। 1845 में उन्होंने लड़कों और लड़कियों के लिए भारतीय हाइलैंड्स में एक बोर्डिंग स्कूल के निर्माण की रूपरेखा तैयार की। इसके परिणामस्वरूप 15 अप्रैल, 1847 को पहली ऐसी शरणस्थली के रूप में स्थापित हुआ, जब लॉरेंस की भाभी जॉर्ज लॉरेंस और एक अधीक्षक हीली के आरोप में 14 लड़कियां और लड़के सनावर पहुंचे। पहले पेशेवर हेडमास्टर के तहत, रेव डब्ल्यू, जे पार्कर थे, जिन्हें 1848 में नियुक्त किया गया था। 1853 तक स्कूल 195 विद्यार्थियों के लिए विकसित हो गया था, लेकिन मौजूदा समय में देश विदेश के करीब 700 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

कई संभाल रहे राज्य

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल, हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, हरियाणा के पूर्व उप मुख्यमंत्री चंद्र मोहन, भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला, केंद्रीय मंत्री और पर्यावरणविद् मेनका गांधी, भूटान की रानी जेट्सन पेमा, केंद्रीय रक्षा उत्पादन राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, पंजाब सरकार में पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया, जम्मू-कश्मीर सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री अजातशत्रु सिंह, पूर्व नौसेना प्रमुख विष्णु भागवत, परमवीर चक्र पाने वाले सबसे युवा अधिकारी लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल पीवीसी, एयर मार्शल केसी करियप्पा, लेफ्टिनेंट जनरल कमलजीत सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल एमएस शेरगिल, लेफ्टिनेंट जनरल टीएस शेरगिल, लेफ्टिनेंट जनरल बीएस ठक्कर, लेफ्टिनेंट जनरल राजेंद्र सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह, जनरल गौरव शमशेर, जंग बहादुर राणा, नेपाल के सेनाध्यक्ष, लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सहगल, जस्टिस सीके महाजन, जस्टिस मेहताब सिंह गिल, न्यायमूर्ति राजीव भल्ला, जस्टिस अमोल रतन सिंह नेस वाडिया, भारत पुरी, प्रबंध निदेशक पिडिलाइट इंडस्ट्रीज, राष्ट्रपति मोंडेलेज इंटरनेशनल, विपिन सोंधी, प्रबंध निदेशक जेसीबी इंडिया लिमिटेड।

प्रीटि जिंटा, संजय दत्त जैसे सितारे रहे छात्र

अभिनेता और निर्माता संजय दत्त। अभिनेता सैफ अली खान, अभिनेत्री प्रीटि जिंटा। अभिनेता साहेर बंबा, कीरत भट्टल, अभिनेता। स्टैंडअप कॉमेडियन पापा सीजे, फिल्म निर्देशक शाद अली। पूजा बेदी, अभिनेत्री और टॉक शो होस्ट। फिरोज़ गुजराल, नी फिरोज एवरी, मॉडल। सिद्धार्थ काक, फिल्म निर्माता। इकबाल खान, अभिनेता। अपूर्व लाखिया, फिल्म निर्माता। तरुण मनसुखानी, निर्देशक और लेखक। अभिनेता राहुल रॉय। परीक्षित साहनी, फिल्म और टेलीविजन अभिनेता। अभिनेता अमर तलवार। विक्रमजीत कंवरपाल फिल्म और टेलीविजन अभिनेता। अभिनेता वीर दास। अभिनेता वरुण शर्मा। इकबाल रिजवी। रोहित सिंह नेगी, ब्रांड-प्रचार फिल्म निर्माता और अभियान निर्माता।

खिलाड़ी ओलंपिक तक पहुंचे

भारतीय ओलंपिक टीम, 2012 मानवजीत सिंह संधू, वर्ल्ड ट्रैप शूटिंग चैंपियन 2010, कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक विजेता सतजीव एस, चहिल, सिलिकॉन वैली मल्टीमीडिया मार्केटर, पुनीत रेनजेन, डेलॉइट चेयरमैन। हीरो साइकिल्स के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पंकज एम मुंजाल। अजीत बजाज, रणजीत भाटिया ओबीई, एथलीट जो मैराथन में दौड़े और 1960 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में 5000 मीटर स्पर्धा, शिवा केशवन, एशियाई चैंपियन और 1998, 2002, 2006, 2010 और 2014 में पांच ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। भारतीय राष्ट्रीय रग्बी टीम मेंबर रोहित सिंह। पर्वतारोही शुभम कौशिक, राघव जोंजा, पर्वतारोही।

क्वालिटी एजुकेशन में पाइनग्रोव नंबर वन

कसौली शिक्षा का वह हब है, लॉरेंस स्कूल सनावर के बगल में ही प्राइनग्रोव बोर्डिंग स्कूल है। इसकी स्थापना वर्ष 1991 में हुई। 28 वर्षीय यह स्कूल भी क्वालिटी एजुकेशन के लिए जाना जाता है। स्कूल की स्थापना के बाद स्कूल ने कभी हटकर पीछे नहीं देखा। यही नतीजा है आज स्कूल की दो शाखाएं हैं और दोनों में सैकड़ों विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यहां बच्चों को वे सारी उच्च स्तरीय सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, जो एक बोर्डिंग स्कूल में होनी चाहिए। यही कारण है कि देश सहित विदेशों से भी छात्र यहां पढ़ाई कर रहे हैं। पाइनग्रोव राउंड स्क्वायर का एक क्षेत्रीय सदस्य है, जिसे आईएसओ 9001-2008 (बीएसआई) से मान्यता प्राप्त है और यह प्रतिष्ठित इंडियन पब्लिक स्कूल्स कान्फ्रेंस का सदस्य है। स्कूल यंग पीपल्स प्रोग्राम के लिए अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार का सदस्य भी है, जिसे पहले ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग पुरस्कार योजना के रूप में जाना जाता है। स्कूल सभी धर्मों, जातियों, पंथों, नस्ल या रंग से भेद किए बिना विद्यार्थियों को स्वीकार करता है और पूरे भारत और विदेशों से विद्यार्थियों को बुलाता है और किसी भी धर्म और अभी तक सभी धर्मों के सम्मान के साथ किसी भी धर्म पर जोर देने के साथ विद्यार्थियों में धर्मनिरपेक्षता की भावना पैदा करता है। कसौली हिल्ज में सेंट मेरी कॉन्वेंट स्कूल स्थित है। यह स्कूल अपनी गुणात्मक शिक्षा के लिए जाना जाता है। समुद्र तल से लगभग 6000 फीट ऊपर कसौली के प्राचीन वातावरण में स्थित सबसे पुरानी और शालीन संस्थाओं में से एक है। स्कूल का बुनियादी ढांचा बच्चों को अध्यात्मिक, नैतिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक वातावरण प्रदान करता है। स्कूल वर्ष फरवरी के मध्य तक शुरू होता है और दिसंबर के दूसरे सप्ताह में समाप्त होता है।

सेंट मेरी में ऑलराउंड डिवेलपमेंट

सेंट मेरी कॉन्वेंट स्कूल, कसौली, 1958 में स्थापित किया गया था, जो बहनों के बेसहारा पुष्पादम प्रांत के संघ के प्रबंधन के तहत है। संस्था द्वारा प्रदान की जाने वाली शिक्षा का उद्देश्य मानव जीवन के सभी पहलुओं को ऊंचा करना और बच्चों के व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास पर है। स्कूल की खासियत है कि स्कूल सभी जाति और पंथों के लड़कों और लड़कियों के लिए खुला है। एक सह-शिक्षा विद्यालय के रूप में, सेंट मेरी छोटे बच्चों को बढ़ने और सीखने के लिए एक संतुलित, सुरक्षित और यथार्थवादी वातावरण प्रदान करता है। स्कूल युवा लड़कों और लड़कियों को एक अच्छी तरह से विकसित व्यक्तित्व के साथ बाहर करता है, जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर समुदाय के साथ जुड़ने और योगदान करने के लिए तैयार हैं। स्कूल में एक बड़ी लाइब्रेरी और ऑडिटोरियम, एक ऑडियो-विजुअल रूम, अच्छी तरह से सुसज्जित भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान, गणित और कम्प्यूटर प्रयोगशालाओं सहित स्मार्ट, सनी और विशाल स्मार्ट क्लासरूम के साथ बहुत बड़ी वास्तुशिल्प इमारत है। नए प्रवेशकों के माता-पिता इस अग्रणी संस्थान में स्वागत करते हैं, जिन्होंने इस प्रतिष्ठित और सम्मानित संस्थान में अपने वार्ड के लिए प्रवेश पाने का एक सही निर्णय लिया है।

लॉरेंस का नाम ही काफी है

लॉरेंस स्कूल सनावर एक विश्वविख्यात स्कूल है। स्कूल का नाम ही काफी है। स्कूल में पढ़ाई का स्तर भी ऊंचा है। पढ़ाई के अलावा स्कूल में स्किल डिवेलपमेंट सहित स्पोर्ट्स में छात्रों की अच्छी भूमिका रहती है। वहां बच्चों के खान-पान के अलावा सुविधाएं भी काफी अच्छी हैं। इस कारण अभिभावक के तौर पर हम खुश हैं कि हमारा बच्चा ऐसे स्कूल में पढ़ाई कर रहा है, जहां से सैकड़ों हस्तियां निकलकर अलग-अलग क्षेत्रों में देश के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं

डा. रविंद्र कुमार शर्मा, अभिभावक

सेंट मेरी का माहौल फ्रेंडली

सेंट मेरी कॉन्वेंट स्कूल कसौली की सबसे अच्छी बात यह है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। पढ़ाई के साथ-साथ अन्य एक्टिविटी में भी स्कूल के छात्र अव्वल रहते हैं। यही नहीं, स्कूल में अध्यापकों एवं छात्रों के बीच एक फ्रेंडली माहौल है। छात्रों और अभिभावकों को इससे अधिक और क्या चाहिए होता है। कुल मिलाकर सेंट मेरी कन्वेंट स्कूल कसौली क्षेत्रों के अन्य स्कूलों के साथ-साथ सफलता की ओर अग्रसर है और यहां के छात्र लगातार स्कूल का नाम रोशन कर रहे हैं

अनिल कुमार, अभिभावक

पाइनग्रोव है, तो सब सही है

पाइनग्रोव स्कूल कसौली पर्यटन के अलावा शिक्षा के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम है। प्राइनग्रोव स्कूल देश का एक ऐसा स्कूल है, जहां किसी भी छात्र का सर्वांगीण विकास संभव है। खेल, पढ़ाई, स्किल डिवेलपमेंट, योग इत्यादि के क्षेत्र में स्कूल अच्छा कार्य कर रहा है। पढ़ाई में तो स्कूल के हर वर्ष दर्जनों छात्र टॉपर रहते हैं। अभिभावक के तौर पर हम बात करें, तो हम बेहद खुश है कि प्राइनग्रोव स्कूल जैसी सुविधाएं हमें सोलन शहर के इतने निकट मिल रही है

रविंद्र व रूबी गुप्ता, अभिभावक