Saturday, July 04, 2020 04:34 PM

कांगड़ा चित्रकला केंद्र को माता का बाग बेस्ट

पार्क के अंदर संग्रहालय भी बनाने की पैरवी शुरू, कांगड़ा पेंटिंग को मिलेगी पहचान

कांगड़ा-पहले चुनाव आचार संहिता और अब लॉकडाउन की वजह से उद्घाटन से महरूम रहे माता के बाग वाले स्थल पर हालात सामान्य होने के बाद यहां कांगड़ा चित्रकला को तरजीह देने की बात हो रही है। दीगर है कांगड़ा चित्रकला व ऐतिहासिक धरोहर से यहां आने वाले लोग वाकिफ  हों इसके लिए कोई ठोस प्रयास नहीं हुए हैं । अलबत्ता अब माता के बाग वाले स्थल पर कांगड़ा चित्रकला केंद्र व संग्रहालय बनाने की पैरवी शुरू हो गई है । अगर ऐसा हुआ, तो जाहिर तौर पर यहां आने वाले पर्यटकों व धार्मिक पर्यटकों को यह जानकारी मिलेगी। वैसे कांगड़ा मंदिर के भीतर कांगड़ा चित्रकला के प्रयास हुए हैं और वर्षों से यहां संग्रहालय बनाने की बात भी की जा रही है, लेकिन इस दिशा में कुछ ठोस नहीं हो पाया है। कांगड़ा चित्रकला के वजूद को बरकरार रखने वाले प्रीतम चंद व धनीराम माता के बाग वाले स्थल पर बने पार्क के भीतर ही संग्रहालय और कांगड़ा चित्र कला केंद्र बनाने की वकालत करते हैं । उनका कहना है कि यहां जो प्रोजेक्ट बनाया गया है उसी के साथ ही यहां संग्रहालय और कांगड़ा चित्रकला केंद्र भी बन सकता है । प्रीतम चंद और धनीराम माता ब्रजेश्वरी मंदिर कांगड़ा में वर्षों से कांगड़ा चित्रकला पर कार्य करते आए हैं। प्रीतम चंद अब सेवानिवृत्त हो गए हैं, लेकिन धनीराम इस कार्य में जुटे हुए हैं । हालांकि अब इनकी सेवाएं धर्मशाला स्थित संग्रहालय में जा रही हैं । अगर माता के बाग वाले स्थल पर ऐसी कोशिश होती है, तो यहां आने वाले लोग कांगड़ा की संस्कृति और कांगड़ा चित्रकला से परिचित होंगे । यहां बहुत सी सैकड़ों साल पुरानी ऐसी चीजें मौजूद हैं, जिन्हें वहां प्रदर्शित किया जा सकता है। कांगड़ा मंदिर के अलावा लोगों के पास भी ऐसे चीजें मौजूद हैं इसके अलावा वर्षों पुरानी कांगड़ा पेंटिंग भी लोगों के पास मौजूद हैं, जिन्हें वहां प्रदर्शित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि चंदूलाल रैना  का परिवार पुराना कांगड़ा का गुग्गा परिवार सहित ऐसे कई परिवार हैं, जो  कांगड़ा चित्रकला व अन्य सैकड़ों वर्षों पुरानी चीजों को देने के लिए तैयार हैं । छत्तीसगढ़ के संग्रहालय में 40 पेंटिंग्स मौजूद हैं। कांगड़ा चित्रकला के माहिरों को  आज भी वहां अपनी कला दिखाने के लिए आमंत्रित किया जाता है, लेकिन  यहां सिर्फ  प्रस्तावना तैयार की जाती है । कांगड़ा बज्रेश्वरी देवी मंदिर कांगड़ा में भी कांगड़ा चित्रकला को  सिखाने के लिए सेंटर बनाने की प्रस्तावना तैयार की गई थी, लेकिन इस दिशा में कुछ भी सकारात्मक नहीं हो पाया । धनीराम कहते हैं कि यहां कांगड़ा पेंटिंग बच्चों को सिखाई जा सकती है। वे माता का बाग वाले स्थल को इसके लिए पूरी तरह माकूल मानते हैं । इस मसले पर वे जिला प्रशासन कांगड़ा से भी बात कर चुके हैं। वे बताते हैं कि उपायुक्त राकेश प्रजापति भी सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे चुके हैं कि ऐसी कोशिशें कांगड़ा में की जा सकती हैं । धनीराम कहते हैं कि कांगड़ा पेंटिंग के साथ-साथ कांगड़ा आर्ट को इस स्थल पर बढ़ावा दिया जा सकता है ।