कांग्रेस में फूटा बड़ा बम

प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर की खिलाफत में उतरे मंडी के सात पदाधिकारियों ने दिए त्यागपत्र

मंडी  – प्रदेश कांग्रेस में चल रहा विवाद अब और बढ़ गया है। मंडी में रविवार को धाम के बहाने हुई राजनीति व पूर्व मंत्री कौल सिंह के खिलाफ पारित किए प्रस्ताव के बाद मंडी से कांग्रेस के अंदर बड़ा बम फूटा है। सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर की खिलाफत करते हुए मंडी के सात कांग्रेसी पदाधिकारियों ने त्यागपत्र दे दिया है। ब्लॉक से लेकर जिला और प्रदेश स्तर के इन पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक कुलदीप सिंह राठौर प्रदेशाध्यक्ष हैं, तब तक सब लोग पार्टी पद काम नहीं करेंगे। इन लोगों ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भाजपा की बी टीम के इशारे व सहारे पर काम कर रहे हैं और सच्चे व पुराने कार्यकर्ताओं को प्रताडि़त कर हाशिये पर धकेल कर उनका उत्साह कम किया जा रहा है। एक पत्रकार वार्ता में पूर्व जिला अध्यक्ष व प्रदेश सचिव दीपक शर्मा, पूर्व सचिव संजीव गुलेरिया, प्रदेश सचिव जीवन ठाकुर, राज्य किसान कांग्रेस उपाध्यक्ष जगदीश रेडी, प्रदेश महासचिव महिला कांग्रेस चंपा ठाकुर, जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुमन चौधरी, बल्ह ब्लॉक महिला कांग्रेस अध्यक्ष बीना शर्मा, सचिव बल्ह महिला कांग्रेस सोनिया और नाचन से कांग्रेस प्रत्याशी लाल सिंह कौशल ने कहा कि हम सब पदाधिकारी अपने पद छोड़ रहे हैं। कौल सिंह व सुक्खू समर्थकों ने कहा कि जब से कुलदीप सिंह राठौर पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष बने हैं, तब से कार्यकर्ताओं का मनोबल लगातार गिर रहा है। समर्पित कार्यकर्ताओं को तवज्जो देने के बजाय स्वार्थी लोगों को अहमियत दी गई। पार्टी छोड़कर भाजपा में गए आश्रय शर्मा को कांग्रेस में आने पर लोकसभा का टिकट दिया गया। इसके बाद संगठन में अहम जिम्मेदारी दी गई। हमीरपुर कुल्लू में भी ऐसा ही किया गया। डेढ़ साल में राठौर संगठन का जनरल हाउस तक आयोजित नहीं कर पाए। राठौर भाजपा से आए लोगों को बडे़ पर और वर्षों पुराने पार्टी कार्यकर्ताओं को छोटे पद दे रहे हैं।

सीएम ऑफिस से चाय पीकर लौट आए राठौर

प्रदेशाध्यक्ष ने 12 करोड़ को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर मानहानि का दावा करने की बात कही थी, लेकिन वह सीएम कार्यालय में चाय पीकर व सुरक्षा कर्मी स्वीकृत करवाकर लौट आए। लोगों ने कहा कि आठ बार विधायक, पांच बार मंत्री व दो बार प्रदेशाध्यक्ष रह चुके कौल सिंह ठाकुर के खिलाफ  प्रस्ताव पारित करने के लिए शिमला से दबाव डाला गया और प्रस्ताव प्रस्ताव पारित करने वाले भाजपा व हिविकां से आए हुए हैं। अभी तक जिला की कार्यकारिणी तक नहीं बनी है और जन्मदिन की पार्टी को बैठक कर रूप देकर मंडी को राजनीतिक रूप से कमजोर करने का प्रयास भाजपा की बी टीम के इशारे पर किया जा रहा है।

कौल के खिलाफ प्रस्ताव पर भड़के

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस दर्द से हाईकमान को अवगत करवाया जाएगा और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो लोग अब कौल सिंह ठाकुर को निकालने प्रस्ताव पारित कर चुके हैं, वहीं लोग कुछ दिन पहले कुलदीप सिंह ठाकुर के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर चुके हैं।

कहां से शुरू हुआ यह घमासान…

कांग्रेस के अंदर चल रहा यह घमासान पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर की फिर सक्रियता व प्रदेश कांग्रेस संगठन पर सवाल उठाने के बाद खड़ा हुआ है। कांग्रेस की सत्ता में वापसी के लिए कौल सिंह ने संगठन में बदलाव की बात कही थी। इसके बाद उनके घर पर कुछ बडे़ नेताओं का लंच हुआ, जिसमें पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सुक्खू और पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा के साथ अन्य नेता भी पहुंचे थे। वहीं, इसके बाद कौल व सुक्खू समर्थकों ने अध्यक्ष बदलने के लिए हाईकमान को पत्र भेज दिया, जिसके बाद राठौर समर्थकों के जवाबी हमले का इंतजार हो रहा था, लेकिन इसी बीच अपने पढ़ पौते के जन्मदिन के बहाने पंडित सुखराम की सियासत ने मामले को और तूल दे दिया। रविवार को आश्रय शर्मा के बेटे की धाम पर कांग्रेसियों को बुलाया गया और उसके बाद बिना कार्यकारिणी के कौल सिंह को निकालने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया, जिसके जवाब में सात पदाधिकारियों के इस्तीफे आ गए और सीधे सीधे आम पदाधिकारियों ने भी प्रदेशाध्यक्ष पर सवाल उठा दिए। आने वाले दिनों में इसे लेकर कांग्रेस की राजनीति में बडे़ घमासान के आसार दिख रहे हैं।

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