Wednesday, September 18, 2019 04:45 PM

काबिलीयत कभी नहीं छिपती, वह रंग लाती है

अर्जित सेन ठाकुर, एसपी हमीरपुर

प्रोफाइल

नाम : अर्जित सेन ठाकुर (पुलिस अधीक्षक हमीरपुर)

जन्म : 1983

आईपीएस : 2013 बैच

गांव : सिहुंता, जिला चंबा

प्राथमिक और उच्च शिक्षा : सेंट एड्वड्ज स्कूल शिमला, एनआईटी हमीरपुर से मकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की। उसके बाद एमएनसीएस में चेन्नई, हैदराबाद, बंगलुरु, मुंबई और दिल्ली में सॉफ्टेवयर इंजीनियर

पिता : भीम सेन 1981 बैच के आईएएस अधिकारी

माता : स्वर्णकांता

पत्नी : सोनाली ठाकुर,वकील दिल्ली

अब तक किन-किन पदों पर कहां-कहां सेवाएं दीं : एसएनएल में भी 12 साल तक सेवाएं दीं।

कभी मेकेनिकल इंजीनियरिंग में भविष्य तलाश रहे अर्जित सेन ठाकुर आज होनहार आईपीएस आफिसर हैं। हैरत जरूर होगी कि आखिकार एक मेकेनिकल इंजीनियर आईपीएस आफिसर कैसे बन गया। अर्जित सेन ठाकुर के आईपीएस बनने तक का सफर रोमांचित करने वाला है। कहते हैं कि काबिलीयत कभी नहीं छिपती। जब भी मौका मिलता है तो इनसान में छिपी प्रतिभा निखकर हीरा बन जाती है। अर्जित सेन की काबिलीयत को हीरा बनाया उनके दोस्तों ने। इंजीनियरिंग करने के उपरांत दिल्ली में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर नौकरी कर रहे अर्जित सेन को पुलिस सर्विसेज में लाने के सूत्रधार उनके दोस्त बने। दोस्त यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे और अर्जित सेन को लगातार आईपीएस बनने के लिए प्रेरित करते थे। उन्हें देखकर इन्होंने ने भी ठान लिया कि यूपीएससी का एग्जाम क्लीयर कर आईपीएस बनकर ही दम लेंगे। फिर क्या था आईपीएस बनने की प्रबल इच्छा मन में पाले नौजवान ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़ आईपीएस बनने के प्रयास तेज कर दिए। पहली बार चयन 2011 में यूपीएससी मेन्ज में तो नहीं हुआ, परंतु हिमाचल प्रशासनिक सेवा में सिलेक्शन हुआ। उसके बाद दोबारा इग्जाम दिया तो भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) में चयन हुआ। नागपुर में ट्रेनिंग करते हुए 2013 में भारतीय पुलिस सेवा में सिलेक्शन हुआ और हिमाचल प्रदेश कैडर मिला। मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी और हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी से ट्रेनिंग की। उसके बाद कांगडा जिला में धर्मशाला और इंदौर में प्रोबेशन की। प्राबेशन के बाद सहायक पुलिस अधीक्षक उन्हें मंडी में तैनाती मिली। इसके बाद शिमला में अतिरिक्त पुलीस अधीक्षक रहे। अर्जित सेन ठाकुर ने राज्यपाल हिमाचल प्रदेश आचार्य देवव्रत के साथ बतौर परिसहाय कार्य किया है। राज्य गुप्तचर विभाग (सीआईडी)में पुलीस अधीक्षक (अपराध) शिमला नियुक्त हुए। उसके बाद इन्हें पुलिस अधीक्षक हमीरपुर के पद पर तैनाती मिली।  अर्जित सेन ठाकुर का जन्म 1983 में जोगिंद्रनगर (मंडी) मंे हुआ, हालांकि उनका पैतृक गांव सिहुंता जिला चंबा है। पिता भीमसेन भारतीय प्रशासनिक सेवा में अधिकारी रहे हैं। हमीरपुर में बतौर पुलिस अधीक्षक तैनात अजिर्त सेन ठाकुर के दर से कोई भी फरियादी मायूस होकर नहीं लौटता। जो भी फरियाद लेकर आता है, उसकी समस्या हल करना ही इनकी प्राथमिकता है।

मुलाकात :जो भी पढ़ाई करें, पूरी लग्न से करें

आपके अनुसार पुलिस अधिकारी होने का मतलब क्या है?

पुलिस अधिकारी होने का मतलब है की आप से आम जनता की बहुत अपेक्षाएं हैं। आपकी जिम्मेदारियां भी ज्यादा हैं क्योंकि आप वर्दी और उसपर लिखे अपने नाम के साथ लोगों के बीच काम करते हैं। पुलिस अधिकारी होने के यह भी मायने हैं कि आप इस समाज में सामजस्य और सद्भाव बनाए रखने का एक बहुत अहम किरदार अदा करते हैं। इसके लिए दृढ़ इच्छा शक्ति की बहुत आवश्यकता है।

आपने स्कूली शिक्षा और कालेज व विश्वविद्यालय की पढ़ाई कहां से पूरी की?

प्राथमिक और उच्च शिक्षा सेंट एड्वड्ज स्कूल शिमला से हुई। एनआईटी हमीरपुर से मकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की। उसके बाद एमएनसीएस में चेन्नई, हैदराबाद, बंगलुरु, मुंबई और दिल्ली में सॉफ्टेवयर इंजीनियर की नौकरी भी की।

छात्र के रूप में हासिल  उपलब्धियों में आप स्वयं को 10 में से कितने अंक देंगे?

नौ अंक

आप प्रशासनिक सेवा में आए इसके लिए कब सोचा?

वर्ष 2010 में जब मैं दिल्ली में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर नौकरी कर रहा था। उस समय मेरी छोटी बहन जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पढ़ रही थी। उस समय कुछ दोस्तों से प्रेरणा पाकर मैंने प्रशासनिक सेवा में जाने के बाद में सोचा था। इसके लिए लगातार प्रयास किए और सफल हुआ।

आपने  सिविल सर्विस परीक्षा में कौन से विषय चुने और क्यों?

भूगोल (जियोग्राफी)और मनोविज्ञान (सायकॉलोजी) इन विषयों में रुचि होने के साथ-साथ यह विषय एग्जाम क्वालिफाई करने के लिए भी काफी लोकप्रिय विषय थे। भूगोल की हाई स्कूल की किताबें आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं, इसलिए अपने बेसिक्स क्लीयर करना आसान रहा। मनोविज्ञान का सिलेबस संक्षिप्त काफी रोचक था। अब एग्जम का पैट्रन बदल गया है और केवल एक ही विषय होता है।

आईपीएस बनने के लिए आपको कितने प्रयास करने पड़े। इसके लिए प्रेरणा कहां से मिली?

मैंने तीन बार यूपीएसई एग्जाम दिया। पहली बार मेन्ज नहीं हुआ पर एचएएस एग्जाम क्वालिफाई किया। दूसरी बार भारतीय राजस्व सेवा में सिलेक्शन हुआ। तीसरी बार आईपीएस में सिलेक्शन हुआ।

 आईपीएस के लिए कितने समय तक तैयारी की और रोजाना कितने घंटे पढ़ाई करते थे?

कोई भी परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए अमुक घंटों की पढ़ाई के बजाय हमारा ध्यान किस तरीके की पढ़ाई की जाए उस पर होनी चाहिए। बिना ध्यान दिए और बिना विषय को समझे किताबों के सामने बैठे रहना खुद को धोखा देने की तरह है। विषय में रूची और इग्जाम क्वालिफाई करने के प्रति अगर लग्न हो तो तैयारी करते हुए समय का पता नहीं चलता। इसलिए एग्जाम को ध्यान में रखते हुए रुचि और लग्न से लगाया गया समय जितना ज्यादा हो उतना अच्छा है

सिविल सर्विस परीक्षा के लिए क्या पढ़ा जाए, इसका चयन कैसे करें?

सिविल सर्विसेज एग्जाम के लिए सामान्य जागरूकता बहुत अहम हो गई है। इसके लिए मैगजीन बहुत आवश्यक है। इंटरनेट पर काफी स्टडी मैटीरियल आजकल उपलब्ध है। इसका उपयोग सभी छात्रों को करना चाहिए। सिविल सर्विसेज एग्जाम का फारमेटट जब इस तरह का हो गया है कि जितना आवश्यक मेन्ज है उतना है इंटरव्यू भी। इसलिए पर्सनेलिटी डिवलपमेंट पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। किसी समस्या को समझना और उसका हल निकालने के बारे में सोचने की अप्रोच न केवल एग्जाम क्वालिफाई करने के लिए जरूरी है बल्कि सर्विस में भी जरूरी है।

कंपीटीटिव एग्जाम के लिए आजकल कोचिंग का चलन बढ़ रहा है। क्या यह उपयोगी है?

कोचिंग आपको मदद जरूर कर सकती है पर एग्जाम क्वालिफाई करने का शार्टकट नहीं माना जा सकता। क्या पढ़ें और क्या नहीं ये आप जरूर समझ सकते हैं। आजकल कोचिंग इंटरनेट के माध्यम से भी मिल रही है जो काफी उपयोगी हो सकती है, क्योंकि आप अपनी पसंद के विषय अपने समय अनुसार पढ़ सकते हैं।

आपका काम सामान्य अफसरों से किस प्रकार अलग है?

हम सब एक बहुत बड़े सिस्टम का हिस्सा हैं जिसे हमारे प्रथम गृहमंत्री सरदार पटेल ने ‘स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया’ कहा था। जितनी मजबूत ये ‘स्टील फ्रेम’ होगी उतनी ही मजबूत ये राष्ट्र रूपी इमारत बनेगी। मेरा यह मानना है कि जितना आप अपने साथ कार्य करने वाली टीम को मजबूत करेंगे उतना ही आप का काम आसान हो जाएगा। मेरी यही कोशिश रहती है। खासकर इसलिए क्योंकि पुलिस में न केवल दफ्तर में फाइल वर्क रहता है बल्कि फील्ड में भी दिन के 24 घंटे और वर्ष के 365 दिनों की किसी न किसी रूप में जिम्मेदारी है ।

आम व्यक्ति के नजरिए से कहें तो एसपी की नौकरी में तनाव है। क्या सचमुच ऐसा है?

तनाव सब के जीवन का एक अहम हिस्सा हो गया है। चाहे वह एक किसान हो व्यापारी हो या कोई अधिकारी हो, पर तनाव के कारण काम करने की क्षमता पर असर नहीं पड़ना चाहिए। पुलिस में रहते हुए आप पर सब की नजरें भी रहती हैं और आपसे अपेक्षाएं भी बहुत होती हैं, ये अपेक्षाएं तनाव का कारण बन सकती हैं। जिम्मेवारियों का बखूबी निर्वहन करते हुए तनाव की स्थिति पैदा होना संभव है। हालांकि तनाव में सही फैसले लेने की काबिलीयत होनी चाहिए।

अधिकारी बनने का सपना संजोए युवाओं को किस सोच के साथ सेवा में आना चाहिए?

अपनी क्षमता के अनुरूप कर्म करने की प्रबल इच्छा बहुत जरूरी है। सभी युवा जो अधिकारी बनने की इच्छा रखते हैं, वे मेहनत करने और अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता का उपयोग कर अपने अधिकार क्षेत्र को पहले से बेहतर बनाने की सोच रखें। क्रीएटिव और सकारात्मक सोच की बहुत आवश्यकता है।

आईपीएस बनने की सोच रहे नौजवानों को आप तैयारी के लिए क्या टिप्स देना चाहेंगे?

आजकल तैयारी करने के कई विकल्प युवाओं के पास उपलब्ध हैं। इंटरनेट सहित बुक्स से भी ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। युवाओं को चाहिए कि पूरी लग्न से तैयारी करें। जाहिर है कि जब पढ़ाई में लग्न लग जाती है तो समय का पता नहीं चलता। इसलिए ये कह पाना कि कितना समय पढ़ना चाहिए उचित नहीं होगा। अपनी क्षमता अनुसार मन लगातार तैयारी करें, ताकि स्टडी किया गया मैटीरियल आपको हमेशा याद रहे।

- हमीरपुर से सुरेंद्र ठाकुर