Thursday, April 18, 2019 06:39 PM

काबिल अफसर मजबूत सरकार-2

जयराम सरकार के एक साल की कामयाबी में प्रदेश के अफसरों के ईमानदारप्रयास शामिल हैं। मनीषा नंदा हों या राम सुभग, फिर डीसी राणा या विनय सिंह, डा. अरुण, या अनिल खाची, हिमाचल सरकार को इन काबिल अफसरों पर नाज है। दखल के इस अंक में प्रदेश के होनहार अधिकारियों की अनकही कहानी पेश कर रहे हैं, स्टेट ब्यूरो चीफ

मस्तराम डलैल और विशेष संवाददाता शकील कुरैशी....

जयराम सरकार के एक साल के प्रयासों में उनकी अफसरशाही के ईमानदार प्रयास रहे हैं। मुख्यमंत्री की अफसरशाही  सरकार के प्रयासों को सार्थक बनाने में महत्त्वपूर्ण रही है। एक ऐसी टीम जयराम ठाकुर के साथ है, जिसने एक साल में सरकार की छवि को बेहतरीन बनाया है।  अधिकारी पूरी ईमानदारी के साथ काम कर रहे हैं और ऐसे अफसरों की सरकार में कोई कमी नहीं है। पर्यटन को बढ़ाने के लिए सरकार की सोच को धरातल पर उतारने के लिए राम सुभग सिंह सरीखे अधिकारी जुटे हुए हैं। राम सुभग सिंह का लंबा अनुभव है, जिनकी सेवाएं इस प्रमुख विभाग के लिए ली जा रही हैं और उन्होंने रिजल्ट भी दिया है। ऐसे ही कुछ और अधिकारी हैं, जिनका सरकार को चलाने में महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है, उनमें मनीषा नंदा, अनिल खाची, निशा सिंह, संजय गुप्ता, डा.अरुण शर्मा, डीसी राणा, अमरजीत सिंह जैसे अधिकारी हैं। ये अधिकारी हर मोर्चे पर सरकार को सहारा दिए हुए हैं। इन सभी की अपने-अपने क्षेत्रों में उपलब्धियां रही हैं, जिनकी वजह से ये सरकार के पसंदीदा हैं। दिलचस्प बात यह है कि अपने काम में माहिर इन अफसरों को महत्त्वपूर्ण औहदे दिए हैं और सत्ता में आने के बाद से इनके पास यह विभाग हैं, जिनमें लगातार काम हो रहा है।

मनीषा नंदा पहले मुख्यमंत्री कार्यालय में रहीं और अहम जिम्मेदारी संभाली, जिसके बाद उन्हें लोक निर्माण व राजस्व का मुख्य विभाग दिया गया, जो कि खुद मुख्यमंत्री देख रहे हैं। मुख्यमंत्री का कार्यालय संभालने में एचएएस अधिकारी  विनय सिंह का अहम रोल है। सीएम कार्यालय को न  केवल वह बखूबी चला रहे हैं बल्कि प्रशासनिक क्षमताओं को दिखाते हुए आम जनता के काम करने में भी उनका कोई सानी नहीं है। विनय सिंह का इस पद का कोई अनुभव नहीं था, जिस पर अफसरशाही भी उन्हें कमजोर आंक रही थी मगर जिस तरह से उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय संभाला है, उससे आज हर कोई उनकी तारीफ कर रहा है।  सीएम के भरोसेमंद अफसरों में वह शुमार हैं जिनका साथ डीसी राणा भी देते हैं। विशेष सचिव के रूप में उनका काम दिखता है, जिनके पास आपदा प्रबंधन व पर्यावरण की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे अधिकारियों की टीम ही जयराम सरकार के ईमानदार प्रयासों को सार्थक बना रही है।

पर्यटन को पंख लगाने में जुटे राम सुभग सिंह

जयराम सरकार ने सत्ता में आने के बाद हिमाचल के पर्यटन को पंख लगाने का एक सपना देखा। पहली बार हुआ कि सरकार ने पर्यटन क्षेत्र के लिए विशेष रूप से बजट रखा। राज्य के अनछुए क्षेत्रों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की सोच लेकर बढ़ रही जयराम सरकार के इस सपने को साकार करने में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राम सुभग सिंह अहम भूमिका निभा रहे हैं।  अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यटन के पद पर तैनात राम सुभग सिंह ने आनंदपुर से श्री नयनादेवी रोप-वे को धरातल पर उतारने का अहम काम किया है। दोनों सरकारों के बीच इसे लेकर समझौता हुआ,जो कि नहीं हो रहा था। इसके साथ प्रदेश में हेलि टैक्सी की उड़ान राम सुभग सिंह की देन है, जिन्होंने दिन-रात मेहनत कर निजी कंपनियों को इसके लिए तैयार किया। कुछ और नहीं हुआ तो सरकारी हेलिकाप्टर से जनता को हेलिटैक्सी की सेवाएं उपलब्ध करवाईं। टूरिस्ट को जॉय राइड का लुत्फ भी पर्यटन महकमा लोगों को दे रहा है। मंडी, धर्मशाला, कुल्लू में हेलिपैड स्थापित करने पर काम चल रहा है, ताकि इन क्षेत्रों को हवाई मार्ग से जोड़ा जाए, यह सोच राम सुभग सिंह की रही है। पर्यटन क्षेत्र में इस तरह के कई काम देखने को मिले, जिनका नतीजा आने वाले समय में दिखेगा। अगले साल भी सरकार इस क्षेत्र पर फोकस करेगी। सरकार ने नई मंजिल, नई राहें एक योजना शुरू की है ,जिसके तहत पर्यटन विभाग कई अहम काम कर रहा है। प्रदेश में नए पर्यटक स्थलों को चुनकर उन्हें विकसित करने का मेगा प्रोजेक्ट यहां शुरू होने वाला है।

राम सुभग सिंह शुरुआत से ही कई ऐसे पदों पर रह चुके हैं, जहां उन्होंने बेहतरीन काम किया है। जयराम सरकार ने उनको शहरी विकास विभाग भी दिया है, जिसमें शहरी क्षेत्रों में गारबेज व सीवरेज ट्रीटमेंट को लेकर काफी काम हो रहा है। शहरों को अत्याधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाए, इस पर फोकस किया जा रहा है। प्रमुख शहरों में पार्किंग की व्यवस्था बेहतरीन हो इस पर कई प्रोजेक्ट छेड़े गए हैं। इसके अलावा वन विभाग में भी वनाधिकारियों के प्रोमोशन के लटके मामलों को आगे बढ़ाया जा रहा है, वहीं कई दूसरे मसलों पर भी यह वरिष्ठ अधिकारी योगदान दे रहे हैं।

मनीषा नंदा ने सड़क नेटवर्क के साथ ऑनलाइन किया राजस्व विभाग

प्रदेश में सड़क नेटवर्क को बढ़ाना और उसे ग्रामीण स्तर तक सुदृढ़ करने में मनीषा नंदा का कोई मुकाबला नहीं रहा है। जयराम सरकार ने शुरुआत से ही उनमें विश्वास जताया और यही कारण है कि राजस्व विभाग और लोक निर्माण  जैसे अहम महकमे उन्हें सौंपे गए हैं। दोनों विभागों में मनीषा ने रिजल्ट भी दिए हैं। राजस्व महकमे के तहत लोगों को तहसीलों में बेहतर व्यवस्था मिले और सुलभता से उनके प्रमाण बने, इसे सुनिश्चित बनाया गया है जिसके लिए ऑनलाइन सिस्टम पर जोर दिया गया। ऑनलाइन प्रणाली को राजस्व महकमे में विकसित किया गया है, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिली है। इसके साथ जनमंच कार्यक्रम में मौके पर प्रमाण पत्र राजस्व महकमा बनाकर देता है और इससे सबसे अधिक लाभ गांव की जनता को मिला है। मनीषा नंदा की औहदेदारी में यहां आपदा प्रबंधन को लेकर भी बेहतरीन काम हुए हैं। केंद्र सरकार से आपदा राहत के मसले उठाने में उन्होंने गंभीरता बरती है। इसके अलावा राज्य में लोक निर्माण विभाग को सड़कों के कई प्रोजेक्ट मंजूर हुए। पीएमजीएसवाई की बात हो या फिर स्टेट रोड प्रोजेक्ट दोनों मदों में प्रदेश को कई शैल्फ केंद्र सरकार से मंजूर हुए। इनमें हिमाचल को करोड़ों रुपए की धनराशि मिली है। अंतरराज्जीय सड़कों के प्रस्तावों में भी केंद्र सरकार से कुछ  शैल्प मंजूर हो चुके हैं, जिन पर यहां काम चल रहा है। आने वाले दिनों में यह योजनाएं पूरी होंगी, जिससे ग्रामीण सड़क नेटवर्क मजबूत होगा। आपदा प्रबंधन मेें  बर्फबारी में फंसे लोगों को आपदा से बाहर निकालने में मदद को खुद विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अहम भूमिका निभाई। ऐसी कई उपलब्धियां उनके विभाग के नाम है, जिससे जयराम सरकार को एक साल में संबल मिला। लोक निर्माण व राजस्व महकमा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर खुद देख रहे हैं और दोनों विभाग मनीषा नंदा संभाले हुए हैं।

डा. अरुण  ने किया स्कालरशिप घोटाले का पर्दाफाश

प्रदेश सरकार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डा.अरुण शर्मा का काम करने का अंदाज बेहद अलग रहा है। शिक्षा विभाग जैसा बड़ा और महत्त्वपूर्ण महकमा संभालने के लिए इसी तरह के अधिकारी की जरूरत जताई जाती है, जिस पर अरुण शर्मा ने बखूबी अपना रोल अदा किया। विभाग के सचिव रहे डा.अरुण शर्मा 31 दिसंबर को ही सेवानिवृत्त हुए हैं। वह धूमल सरकार में मुख्यमंत्री के साथ रहकर बेहतरीन काम कर चुके हैं और अब उन्होंने जयराम सरकार को अपनी बेहतरीन सेवाएं दी हैं। शिक्षा विभाग में स्कॉलरशिप घोटाले को सामने लाने वाले डा.अरुण शर्मा ही हैं, जिस पर अब सीबीआई जांच को लेकर मामला चल रहा है। करोड़ों रुपए के इस घोटाले के सामने आने के बाद सभी के होश फाख्ता हैं। बताते हैं कि अरुण शर्मा को उनके किसी आईएएस मित्र के बेटे ने स्कॉलरशिप नहीं मिल पाने की शिकायत की थीं,जहां से इसकी परतें खुलीं। शिक्षा विभाग में अध्यापकों के साथ जूझकर इसे सही तरह से चलाना आसान नहीं मगर दिलचस्प बात यह है कि सेवानिवृत्त पर अध्यापक संघ ही सरकार से उन्हें अच्छा औहदा दिए जाने की मांग कर रहे थे, जो कि कम ही होता है। विभाग में अध्यापकों के तबादले, पोस्टिंग, स्कूलों को अपग्रेड करना ऐसे कई महत्त्वपूर्ण कार्य उन्होंने बखूबी किए।मेरे स्कूल से निकले मोती एक ऐसी योजना उन्होंने चलाई, जिसमें स्कूल के होनहारों को सामने लाया जा रहा है। यहां पर आदर्श विद्यालय स्थापित करने की योजना शुरू हो चुकी है वहीं विभाग के बिगड़ैल लोगों को सुधारने में भी उन्होंने  महत्त्वपूर्ण काम किया है। छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोपी लोगों को सामने लाने और उनको सजा दिलाने में डा.अरुण शर्मा का अहम रोल रहा है।

हिमाचल की आर्थिकी को  पटरी पर ला रहे अनिल खाची

पहले लोक निर्माण विभाग और फिर वित्त विभाग की महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी देख रहे अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल खाची सरकार के पसंदीदा अफसरों में हैं। प्रदेश की आर्थिकी को पटरी पर लाने की बड़ी चुनौती उनको सौंपी गई है। इस पर उन्होंने रिजल्ट देने भी शुरू कर दिए हैं। हालांकि अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से पटरी पर लाना इतना जल्दी आसान नहीं है मगर फिर भी अनिल खाची जैसे अनुभवी अधिकारी इस पर काम कर रहे हैं। फिजूलखर्ची पर रोक लगाने को भी उनका अभियान चल रहा है और जरूरत के हिसाब से खर्चें हों इस पर ध्यान केंद्रीत किया गया है। उनके रहते जयराम सरकार का दूसरा वार्षिक बजट आना है और सभी की निगाहें इस बार के बजट पर है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वित्त विभाग कई साल से डा.श्रीकांत बाल्दी देख रहे थे, जिन्होंने करीब 11 बजट दिए। अब अनिल खाची के पास महकमा है लिहाजा बजट में बदलाव देखने को मिलेगा, यह संभव है।  अनिल खाची व्यवहार से थोड़े रुखे जरूर लगते हैं परंतु उनमें काम करने का माद्दा काफी ज्यादा है। ऐसे अधिकारी सरकार को अपना पूरा स्पोर्ट देने में लगे हैं।

प्लास्टिक बैन  डीसी राणा  की ही देन

पर्यावरण विभाग के निदेशक होने के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष सचिव डीसी राणा उन अधिकारियों में से हैं , जो ज्यादा बोलते नहीं बल्कि करके दिखाते हैं। काम करने वाले अफसरों में एक बड़ा नाम डीसी राणा का है, जो कि सरकार की पसंद हैं। आपदा प्रबंधन के लिए जो काम किए जा रहे हैं, उनमें डीसी राणा की सोच और उनका अनुभव बेहद काम आया है। वह इस क्षेत्र को लंबे समय से देख रहे हैं, जिनके अनुभव का पूरा फायदा यह सरकार भी उठा रही है। राणा को पर्यावरण विभाग भी दिया, जिसने कुछ नई योजनाएं यहां पर चलाईं। प्रमुख शहरों में हॉर्न नॉट ओके का कंसेप्ट भी राणा ने दिया है, जो कि वातावरण को ध्वनि प्रदूषण से बचाने के लिए है।   प्रदेश में प्लास्टिक के कप-प्लेट बंद करवाकर अब पत्तल का कंसेप्ट लाने वाले भी राणा है, जिनकी प्लास्टिक को बंद करने की सोच की हिमायती खुद सरकार है।

विनय सिंह ने तालमेल पर दिया जोर

हिमाचल सरकार के ईमानदार प्रयासों की प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंची गूंज के पीछे सीएम ऑफिस की कड़ी मेहनत भी शामिल है। मुख्यमंत्री का कार्यालय देख रहे उनके निजी वरिष्ठ प्रधान सचिव विनय सिंह के प्रयासों ने भी सरकार की इमेज को उभारा है। हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक अधिकारी विनय सिंह धर्मशाला, मंडी, कुल्लू तथा लाहुल-स्पीति जैसे जनजातीय क्षेत्रों में बेहतरीन सेवाएं दे चुके हैं।  इसी कार्यशैली के चलते विनय सिंह मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की पहली पसंद बने हैं। जयराम सरकार में सबसे पहला आदेश भी विनय सिंह का सीएम ऑफिस की तैनाती के लिए जारी हुआ था। इस तैनाती के बाद विनय सिंह ने प्रदेश सरकार की छवि को बनाने के लिए दिन-रात पसीना बहाया है, लिहाजा प्रधानमंत्री के मुंह से जयराम ठाकुर के लिए जमकर तारीफ सुनने को मिली है। विनय सिंह देर शाम तक सरकारी कामकाज को निपटाने के साथ ओक ओवर से लेकर सीएम ऑफिस तक बेहतर तालमेल बिठाने में सफल हुए हैं। इसी कारण एक साल में सीएम ऑफिस की कार्यशैली में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है।

निशा सिंह ने दिखाया सामाजिक सुरक्षा को रास्ता

सरकार बनने के साथ ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन को लेकर अहम फैसला हुआ। 80 साल की उम्र में दी जाने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन में आयु सीमा घटाकर 70 साल कर दी गई, जिसका सभी लोगों ने खुले मन से स्वागत किया। इस विभाग का जिम्मा देख रही हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव निशा सिंह जिनके पास शुरुआत से ही यह विभाग है। इससे सरकार की साख जुड़ती है क्योंकि समाज में गरीब तबका सबसे बड़ा है और इसे राहत देने के लिए चलाई जाने वाली योजनाएं महत्त्वपूर्ण रहती हैं मगर इनको सही तरह से अमलीजामा पहनाने उससे अधिक जरूरी है। सरकार की ऐसी योजनाआें को धरातल पर लागू करवाने में निशा सिंह का प्रमुख किरदार रहा है। यह विभाग लगातार पेंशनरों की संख्या को बढ़ा रहा है। वहीं केंद्र सरकार की योजनाओं को यहां पर लागू करवाने में जुटा है।  इनके पास श्रम एवं रोजगार विभाग भी है, जिसके जरिए कामगारों के लिए नई योजनाएं शुरू करना और निजी क्षेत्र में इन्हें लागू करवाना बेहद कठिन रहता है।  निशा सिंह ने बखूबी यह काम किया जिसके चलते वह सरकार के दोनों महत्त्वपूर्ण महकमे लगातार संभाल रही हैं।

अमरजीत सिंह के काम का हर कोई कायल

अफसरशाही को चलाने के लिए सरकार का कार्मिक विभाग बेहद महत्त्वपूर्ण है, जिसे चलाने के लिए अनुभवी व कुशल अफसरशाह की जरूरत रहती है। ऐसे ही अधिकारी हैं आईएएस अमरजीत सिंह,जो कि विभाग के विशेष सचिव हैं। लंबे समय से कार्मिक विभाग का काम देख रहे अमरजीत सिंह की काम करने की ज़ील के सभी दीवाने हैं। सभी उनकी प्रशंसा करते हैं। यहां तक कि कोई भी अधिकारी ऐसा नहीं है, जो अमरजीत सिंह की प्रशंसा न  करता हो। अपने काम के प्रति पूरी तरह से न्योछावर इस अधिकारी को रात को भी काम करते हुए देखा गया है। कौन सा आईएएस कहां पर तैनात हैं, कौन सा एचएएस कहां है और किसे कहां पर लगाया जाना है, इन सभी की जानकारी उनके पास रहती है। इसके अलावा कार्मिक मंत्रालय से संबंधित जानकारियां और अधिकारियों के विवादित मामलों को सुलझाने में उनकी महारत है। ऐसे अधिकारी, महत्त्वपूर्ण विभागों को चमका रहे हैं, जिससे सरकार को बेहद सहारा मिला है।

गोवंश संरक्षण को तरजीह देते संजय गुप्ता

प्रदेश सरकार ने सत्ता में आने के बाद गोवंश संरक्षण को अपनी प्राथमिकताओं में से एक बताया।  सरकार के इस वचन को अमलीजामा पहनाने में अहम किरदार निभाने वाले विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय गुप्ता हैं,जिन्होंने न केवल यहां गो सेवा के लिए मंदिर ट्रस्टों से पैसा एकत्र करने पर फैसले करवाए बल्कि शराब पर भी विशेष सैस इस काम के लिए लगाया गया। इससे करोड़ों रुपए की धनराशि जुटाई जा रही है, जिससे यहां गो सदनों का निर्माण होगा। प्रदेश में कई स्थानों पर गो सदनों के निर्माण के लिए जगह देखी गई। मुख्यमंत्री कुछ स्थानों पर घोषणाएं कर चुके हैं। पहाड़़ी गाय को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन विभाग काम में जुटा हुआ है। केंद्र से कुछ विशेष प्रोजेक्ट इस विभाग ने लाए हैं, जिसमें दुग्ध उत्पादकों के लिए भी योजनाएं हैं। इतना ही नहीं राज्य में गोवंश संरक्षण आयोग का गठन करवाना, उनकी एक बड़ी उपलब्धियों में शुमार है। संजय गुप्ता ने सरकार की इस घोषणा को अमलीजामा पहना दिया है। कैबिनेट से फैसले के तुरंत बाद इसे विधानसभा से पारित करवा दिया गया और अब सिर्फ  राज्यपाल की संस्तुति का इंतजार हो रहा है। गोवंश संरक्षण आयोग से यहां गोवंश संवर्द्धन व बेसहारा पशुओं को संरक्षित करने में राहत मिलेगी। कई दूसरे अहम काम भी यही आयोग करेगा।