Sunday, June 16, 2019 06:35 PM

काबिल अफसर मजबूत सरकार

जन आभार रैली में प्रधानमंत्री से तारीफ पाने वाली जयराम सरकार की कामयाबी के पीछे उन अफसरों का भी कम हाथ नहीं, जो चुटकी बजाते ही 5जी की स्पीड से हर काम ओके कर देते हैं। बात बीके अग्रवाल की हो या फिर श्रीकांत बाल्दी की, रामसुभग हों या आरडी धीमान...सरकारी मशीनरी के ये वे नाम हैं,जो जयराम सरकार को हर मोर्चे पर आगे रख रहे हैं।  हिमाचल को बुलंदी पर ले जा रहे काबिल अफसरों से दखल के जरिए रू-ब-रू करवा रहे हैं...

स्टेट ब्यूरो चीफ मस्तराम डलैल और विशेष संवाददाता शकील कुरैशी...  

जयराम सरकार के ईमानदार प्रयासों को आगे बढ़ाने में पर्दे के पीछे सरकारी मशीनरी का इंजन दौड़ रहा है। खासकर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. श्रीकांत बाल्दी जयराम सरकार की रीढ़ की हड्डी बन कर काम कर रहे हैं। फाइनांस विभाग के लंबे अनुभव के दम पर श्रीकांत बाल्दी कई योजनाओं को सार्थक मूलरूप दे चुके हैं। तीन माह पहले मुख्य सचिव पद पर ताजपोशी के तुरंत बाद एक्शन में आए बीके अग्रवाल भी सरकार की छवि को तराशने में जुटे हैं। इससे पहले नौ माह तक सीएस पद पर सेवारत विनीत चौधरी ने भी सरकारी योजनाओं का कारवां आगे बढ़ाने में अपना खासा योगदान दिया है। अब बीके अग्रवाल तथा डा. श्रीकांत बाल्दी की जोड़ी डबल इंजन के साथ सरकारी योजनाओं की रेल को विकास की पटरी पर दौड़ा रही है। एक साल के कार्यकाल में जयराम सरकार को एशियन डिवेलपमेंट बैंक से 1892 करोड़ का भारी-भरकम प्रोजेक्ट मिला है। इस परियोजना को तैयार करने में तत्कालीन पर्यटन अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा की खासी कसरत रही है। इसके बाद परियोजना को मंजूर करवाने के लिए पर्यटन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राम सुभग सिंह का अहम किरदार रहा है। इसके अलावा राम सुभग सिंह ने हेलिटैक्सी और रोप-वे परियोजनाओं सहित पर्यटन के क्षेत्र में हिमाचल के लटके कई प्रोजेक्टों को धरातल पर उतारने का प्रयास किया है। प्रदेश सरकार के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी धीमान ने एक साल के भीतर कई विभागों का प्रभार देखा है। रोचक है कि उन्होंने हर विभाग में नई पॉलिसी लाकर अपने महकमों को तरोताजा करने का प्रयास किया है। इस फेहरिस्त में आरडी धीमान ने पावर पॉलिसी, उद्योग पॉलिसी तथा व्हाइट सीमेंट प्लांट की स्वीकृति में अपनी खासी भूमिका निभाई है। आरडी धीमान अब बागबानी विभाग व स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को आमजन से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। पटरी से उतरी हिमाचल प्रदेश की आबकारी योजनाओं को आरोपों के कीचड़ से बाहर निकाल कर प्रधान सचिव जेसी शर्मा ने सरकारी खजाने को ठूंस-ठूंस कर भरने का बीड़ा उठाया है। एचपी बेवरेज कारपोरेश को भ्रष्टाचार के आरोपों की बेडि़यों से मुक्त करवाकर उन्होंने आबकारी नीति को जनहित में बदला है। इतना ही नहीं जीएसटी ग्रोथ में भी वह लक्ष्य की तरफ विभाग को ले जाने में खूब पसीना बहा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश को बागबानी प्रोजेक्ट का नायाब तोहफा देने वाले जेसी शर्मा ने आईटी के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं। चीनी तथा दालों सहित सस्ते राशन की दरों को कम करने के अलावा प्रधान सचिव ओंकार शर्मा ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की गरिमा को भी बढ़ाया है। उन्होंने कृषि विभाग में भी नई योजनाएं धरातल पर उतारी हैं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे मनोज कुमार भी जयराम सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट इन्वेस्टर मीट को सफल बनाने में जुट गए हैं।

केंद्र से लाए 5000 करोड़ के प्रोजेक्ट

देवश कुमार

आईपीएच विभाग के सचिव देवेश कुमार  के नाम प्रदेश में आईपीएच के बड़़े प्रोजेक्ट हैं। केंद्र सरकार से हिमाचल के लिए करीब पांच हजार  करोड़ से ज्यादा के आईपीएच के प्रोजेक्ट लाने में उनकी विशेष मदद रही है। यहां 4700 करोड़ के वर्षा जल संग्रहण प्रोजेक्ट को उनके नेतृत्व में तैयार किया गया जिसे केंद्र सरकार ने एडीबी के माध्यम से करवाने को मंजूरी दी है। इसके साथ 780 करोड़ रुपए के री-मॉडलिंग प्रोजेक्ट को भी केंद्र सरकार  तैयार है। इन पर कंसलटेंट एजेंसियों ने काम शुरू कर दिया है। यह प्रोजेक्ट सालों पुरानी 1420 स्कीमों  को नए सिरे से तैयार करने के लिए है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक पेयजल सुनिश्चित बनाया जाएगा। वर्षा जल संग्रहण का प्रोजेक्ट एक बड़़ी सोच है। बरसात में यहां पानी बहकर मैदानी क्षेत्रों में चला जाता है, जिसे यहां पर रोककर रखना और उसका इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में करना अहम होगा। हिमाचल के इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देने में केंद्र सरकार को भी समय नहीं लगा क्योंकि इससे यहां के किसानों व बागबानों की जरूरत काफी हद तक पूरी हो जाएगी। इसके साथ शिमला के लिए सतलुज से वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में एक अन्य प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है, जिससे शिमला में गर्मियों में पानी की कमी नहीं रहेगी। देवेश कुमार के लिए साल में ये बड़ी उपलब्धियां रही हैं। इसके अलावा विभाग में आउट सोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारी रखने और ठेकेदारों से इन योजनाओं को छुड़वाने का भी अभियान चल रहा है,जिससे आने वाले दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था दुरुस्त हो सकेगी।

रेणुका-किशाऊ बांध पहुंचे निर्णायक मोड़ तक

इनके पास पावर कारपेरेशन का जिम्मा भी है जिसमें रेणुका व किशाऊ डैम को केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में लाने का सेहरा इनके सिर सजता है। इन दोनों राष्ट्रीय प्रोजेक्टों का मामला अब केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी तक पहुंच चुका है। वहीं पावर कारपोरेशन में सैंज परियोजना को शुरू किया गया और श्रीनयना देवी में सरकारी क्षेत्र का पहला सोलर पावर प्लांट भी बनकर तैयार हो चुका है।

नई पावर पालिसी लाए

तरुण कपूर

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रवाना होने से पहले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तरुण कपूर ने अपने विभागों को विकास के पंख लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस सरकार में करीब नौ महीने तक प्रदेश को अपनी सेवाएं दे चुके वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तरुण कपूर अब केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली चले गए हैं।  कपूर हिमाचल से चले तो गए,लेकिन इस सरकार में उनके पास जो भी विभाग रहे वह,सभी सक्रिय थे। उन्होंने प्रदेश में पावर पॉलिसी में संशोधन कर ऊर्जा क्षेत्र में उत्पादकों को लाने का प्रयास किया। उनके रहते यहां एक बड़ा ऊर्जा सम्मेलन हुआ, जिसमें केंद्रीय ऊर्जा मंत्री व कई राज्यों के मंत्री यहां पर आए। क्योंकि वह दिल्ली में भी पहले ऊर्जा क्षेत्र में रह चुके हैं, लिहाजा इस क्षेत्र में हिमाचल को उनका काफी फायदा मिला है। यहां  ऊर्जा निवेशकों को 12 साल तक फ्री पावर का कंसेप्ट उन्होंने दिया, जिस पर बेशक विपक्ष हल्ला मचा रहा है, मगर ऊर्जा क्षेत्र के निवेशकों ने सरकार के इस फैसले को सराहा। इसके साथ जंगी थोपन पोवारी परियोजना, जिसे कोई लेने को तैयार नहीं था, वह सतलुज निगम को देने का विचार भी उनका ही था, जिसके लिए उन्होंने प्रयास किए। प्रदेश में कुछ नए प्रोजेक्टों को चिन्हित करवाने के साथ सोलर पावर के क्षेत्र में उनका योगदान रहा है। आज ग्रिड कनेक्टिड सोलर रूफ टॉप की योजना को यहां पर  प्रभावी तरीके से अमलीजामा पहनाया जा रहा है, जिन्होंने यहां पर दो सोलर गांव बनाए जाने का कंसेप्ट भी दिया है। उनके पास वन विभाग भी रहा, जिसमें बंदरों को पकड़ने, आश्रय देने, वन  गार्डों को हथियार देने जैसे फैसले लिए गए।

स्वास्थ्य बीमा योजना से लाजवाब प्रयास

आरडी धीमान

प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार ने कई योजनाएं शुरू की, इसमें सबसे प्रमुख बीमा योजना है। स्वास्थ्य विभाग केंद्र सरकार  बीमा योजना तो शुरू किए हुए हैं बल्कि यहां प्रदेश सरकार ने अपनी बीमा योजना भी लागू की है, जिसमें सभी लोगों को कवर करने की योजना है। विभाग का जिम्मा वरिष्ठ आईएएस आरडी धीमान देख रहे हैं। विभाग ने गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों के लिए सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष गठित किया है। सरकारी अस्पतालों के अलावा पीजीआई, मेडिकल कालेज चंडीगड़ व एम्स दिल्ली में भी उपचार के लिए लोगों को आर्थिक सहायता मिलेगी। पांच लाख रुपए तक के स्वास्थ्य बीमा का लाभ सरकार दे रही है। सरकार ने हिमकेयर व आयुष्मान योजनाएं चलाई हैं। नवजात शिशुओं के लिए अटल आशीर्वाद योजना से 1500 रुपए की नव आगंतुक किट दी जा रही है। स्वास्थ्य संस्थाओं में आधारभूत ढांचे को विकसित किया जा रहा है और सैकड़ों नई भर्तियों का द्वार स्वास्थ्य विभाग में खुला है। डाक्टरों के नए पद भरे जा रहे हैं। प्रदेश में दो मेडिकल कालेज भी इस सरकार ने शुरू किए हैं। आरडी धीमान ने बागबानी क्षेत्र में भी कई काम किए हैं, जिनमें बागबानी विकास परियोजना को सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है। केंद्र सरकार से सब ट्रॉपिकल फलों के लिए एक विशेष परियोजना लाने में उनका अहम रोल रहा है। यह परियोजना उन बागबानों के लिए जो कि नींबू प्रजाति के फलों का उत्पादन करते हैं। अधिकांश क्षेत्रों में इसका लाभ मिलेगा, जिसके लिए केंद्र सरकार ने 400 करोड़ से ज्यादा की योजना को मंजूर किया है। श्री धीमान इससे पहले उद्योग विभाग देखते रहे हैं, जिन्होंने माइनिंग के लिए पॉलिसी लाई, जिसे यहां पर बेहतरीन माना गया है।

भर दिया सरकारी खजाना

जेसी शर्मा

सरकार को राजस्व जुटाकर देने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी आबकारी एवं कराधान विभाग के पास है। इस विभाग का अहम जिम्मा प्रधान सचिव जेसी शर्मा देख रहे हैं, जिनके नाम कई उपलब्धियां पहले से दर्ज हैं। वह जिस भी महकमे में रहते हैं वहां पर कोई न कोई बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है।  वर्तमान में उनके पास आबकारी एवं कराधान विभाग है, जिसने प्रदेश में जीएसटी को लागू करने में अहम भूमिका निभाई, वहीं राज्य में आबकारी पॉलिसी बदलकर जहां पुरानी गड़बडि़यों को खत्म किया, वहीं निवेशकों को भी राहत दिलाई। सरकार ने यहां आबकारी पॉलिसी को बदला और एक्साइज से 1500 करोड़ रुपए की कमाई का लक्ष्य रखा। लॉटरी के दम पर यहां शराब ठेके दिए गए, जैसी व्यवस्था पहले भी चलती थी,लेकिन पूर्व सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया था। पूर्व सरकार ने बीवरेज कारपोरेशन खोला, जिस पर धांधलियों के आरोप है, जिसे खत्म किया गया। शराब से गो सदनों व रोगी वाहनों को एक-एक रूपए का फंड उन्होंने ही शुरू करवाया,जिससे आने वाले दिनों में यहां काफी संख्या में गो सदनों के निर्माण की राह दिखी है। जेसी शर्मा इससे पहले बागबानी विभाग में थे जिन्होंने यहां बागबानी विकास परियोजना को लाने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि बाद में उनसे यह विभाग ले लिया गया, लेकिन सरकार ने उन्हें सरकारी खजाने को भरने की जिम्मेदारी सौंपी, जिस पर बखूबी काम हो रहा है। जीएसटी में प्रदेश में ग्रोथ के लिए उन्होंने अच्छा काम किया है।

परिवहन विभाग ने पकड़ी रफ्तार

जेसी शर्मा के पास दूसरा अहम विभाग परिवहन है जो कि सीधे रूप से जनसेवा से जुड़ा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसें शुरू करने की योजना के अलावा नए बस अड्डों का निर्माण उनकी उपलब्धियों में शुमार है। बीओटी आधार पर बस अड्डों का निर्माण हो रहा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक टैक्सियां शुरू की गई हैं। साथ ही उन्होंने सरकार को रैपिड मास ट्रांसपोर्ट सिस्टम का प्रोपोजल भी दिया है, जिस पर आने वाले समय में काम होगा। यह अहम योजना है, जिससे यहां पर रोप-वे निर्माण का रास्ता खुला है वहीं शहरी क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट का सिस्टम भी बदलेगा। वाटर टूरिज्म को बढ़ाने के लिए वाटर ट्रांसपोर्ट पर भी वह काम कर रहे हैं। मत्स्य विभाग में भी उनके आने से विस्तार देखने को मिला है।

बढि़या और सस्ता राशन पहुंच रहा समय पर

ओंकार शर्मा

आम जनता को राशन के डिपो में सस्ता राशन और दालों की सप्लाई निरंतर होती रही। यह ऐसा विभाग कि यदि डिपो में सस्ता राशन न मिले तो तुरंत निशाने पर आ जाता है। पिछली सरकार में यह विभाग सुर्खियों में रहा क्योंकि बार-बार लोगों को दिक्कतें उठानी पड़ती थीं। अहम बात है कि इस सरकार के एक साल में अभी तक इस विभाग पर कोई सवाल नहीं उठे क्योंकि इसकी कार्यप्रणाली सुचारू रूप से चलती रही। खासकर लोगों को समय पर राशन मिलता रहा तो वहीं  राशन की क्वालिटी पर अधिक ध्यान दिया गया। इसी कारण घटिया दालों की सप्लाई तक को विभाग ने वापस लौटा दिया। विभागीय मंत्री के साथ-साथ विभाग के प्रधान सचिव आईएएस अधिकारी ओंकार शर्मा ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। यही एक वजह भी रही कि विधानसभा के इस साल में हुए किसी भी सत्र में राशन का मुद्दा नहीं उठा और न ही किसी विधायक ने इस संबंध में कोई सवाल विधानसभा के सदन में उठाया।  ओंकार शर्मा ने इससे पहले ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग में भी बेहतर काम किया है, जिसमें केंद्र सरकार की मनरेगा योजना प्रभावी तरीके से लागू की गई। खाद्य आपूर्ति विभाग में ही मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना लागू की गई है, जिसमें महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन के साथ गैस सिलेडर व अन्य सामान भी दिया जा रहा है। 32 हजार महिलाओं को इसका लाभ दे दिया गया है और एक लाख 25 हजार और आवेदन विभाग के पास हैं। ओंकार शर्मा का कहना है कि इस योजना में हिमाचल देश भर में अव्वल रहेगा क्योंकि मार्च महीने तक हिमाचल में सभी लोगों के घरों में गैस कनेक्शन होंगे।ा कृषि विभाग में भी ओंकार शर्मा की अपनी उपलब्धियां हैं। यहां किसानों को सबसिडी पर सोलर बाड़ के अलावा किसानों का फसल बीमा, जैविक खेती, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना कुछ ऐसी स्कीमें हैं, जिनको सरकार अपनी उपलब्धियों में शुमार करती है। बजट में जिन योजनाओं को आधार बनाया गया था, उन पर अक्षरशः बेहतरीन तरीके से काम किया जा सका है।

औद्योगिक  निवेश के लिए बड़ी योजना

मनोज कुमार

जयराम सरकार ने प्रदेश में बड़े औद्योगिक निवेश के लिए अहम अभियान शुरू किया है। यह अभियान आईएएस अधिकारी मनोज कुमार के विभाग को संभालने के बाद शुरू किया गया। अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग के पद पर तैनात मनोज कुमार को दिल्ली से लौटने के बाद सरकार ने उद्योग विभाग का जिम्मा सौंपा, जो पहले भी बतौर निदेशक इस पद पर काम कर चुके हैं। उद्योग विभाग ने प्रदेश में आगामी जून महीने में इन्वेस्टर मीट का बड़ा आयोजन करने की सोची है, जिसमें 85 हजार करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को प्रदेश हासिल करता है,तो हिमाचल के दिन बदल जाएंगे। इन्वेस्टर मीट इस सरकार की एक बड़ी उपलब्धि होगी, जिसके लिए सरकारी अदारा पूरा जोर लगा रहा है। तीन देशों को पार्टनर कंट्री बनाने के लिए बातचीत हुई है, वहीं आंध्र प्रदेश व तेलंगाना जैसे अग्रणी प्रदेशों में यहां के अधिकारी मॉडल पर चर्चा कर चुके हैं। इन्वेस्टर मीट के लिए सरकार ने यहां उद्योगपतियों को कई तरह की रियायतें देने के संबंध में चर्चा की है और एक बड़ा प्लान तैयार किया गया है, जिसमें सिंगल विंडो का सरलीकरण किया जाएगा और अलग से इन्वेस्टमेंट यूनिट तैयार किया जाएगा। आने वाले दिनों में सरकार की इस योजना का लाभ देखने को मिलेगा औैर इसका सेहरा कहीं न कहीं विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को दिया जा सकता है। इस टीम में उनके साथ विशेष सचिव आईएएस अधिकारी आबिद हुसैन सादिक भी शामिल हैं और ये अधिकारी मिलकर बड़ी योजना बनाने में लगे हैं। इसे सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों में जोड़ने की तैयारी में है, जिसके नतीजे अगले साल में आने शुरू हो जाएंगे। राज्य में अवैध खनन पर लगाम कसने के लिए भी जयराम सरकार ने कदम उठाए हैं। खनन पट्टों को वैद्य तरीके से आबंटित करने पर काम चल रहा है और कई जिलों में इनकी नीलामी विभाग ने खुद करवाई है। इसका मकसद सिर्फ अवैध खनन को रोका जाना है, जिसके लिए विभाग पूरा जोर लगाए हुए है। उद्योग विभाग में ही स्वरोजगार के लिए युवाओं को मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना शुरू की गई है, जिसमें 25 से 30 फीसदी की सबसिडी दी जा रही है।