Monday, October 21, 2019 07:48 AM

कारगिल के हीरो को शत-शत नमन

घुमारवीं—20 साल पहले 11 जुलाई 1999 को कारगिल की पहाडि़यों पर छिड़े अघोषित युद्ध में शहादत का जाम पीने वाले जिला बिलासपुर के घुमारवीं उपमंडल के मोरसिंघी-मसधान के जवान हवलदार राजकुमार वशिष्ठ के शहीदी दिवस पर  गुरुवार को श्रद्धांजलि दी। घुमारवीं के नसवाल में आयोजित सादे कार्यक्रम में शहीद राजकुमार के परिजनों तथा लोगों ने एकत्रित होकर कारगिल के नायक के फोटो पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। लोगों ने नम आंखों से शहीद को भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की। देशभक्ति तरानों, भारत माता की जय तथा शहीद राजकुमार अमर रहे नारों से इलाका गूंजयमान रहा। जानकारी के मुताबिक 1999 में कारगिल में छिड़े अघोषित युद्ध में घुमारवीं उपमंडल के मोरसिंघी-मसधान के हलवार राजकुमार वशिष्ठ ने वीरता से लड़ते हुए शहादत का जाम पिया था। युद्ध में 11 जुलाई 1999 को सुबह शहीद हवलदार राजकुमार वशिष्ठ ने कारगिल के बटालिक सेक्टर के घनासक क्षेत्र मंे दुश्मनों की भारी गोलाबारी व तोपखानों के बौछारों की बीच जान की परवाह न करते हुए अपने साथियों तक हथियार व गोले पहुंचाएं थे। हथियारों की कमी न होने के कारण ही हिंद सेना यहां से दुश्मनों को खदेड़ने में सफल हुई थी। राजकुमार जानते थे कि साथियों तक यदि गोले व हथियार नहीं पहुंचे, तो यहां पर जीत हासिल करना कितना मुश्किल होगा। उन्होंने हथियार व गोलों की सप्लाई भारी गोलाबारी के बीच भी थमने नहीं दी। इस दौरान उनको अपवर्त्य स्पलिन्टर (गोला) सीने और पेट पर लगा। इससे वह बुरी तरह से घायल होकर वीरगति को प्राप्त हो गए थे। राजकुमार के अदभ्य साहस के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत ब्रेवेस्ट ऑफ द ब्रेव पुरस्कार से सम्मानित किया है। हवलदार राजकुमार वशिष्ठ की बहादुरी की बदौलत हिंद सेना ने यहां पर परचम लहराया था। राजकुमार ने इस पोस्ट पर वीरता की नई इबारत लिखकर दुश्मनों को भी दांतों तले अंगुलियां दबाने को मजबूर कर दिया था। शहीद राजकुमार की वीरता की लिखी नई इबारत 20 साल बाद भी लोगों की जबां पर तरोताजा है। शहीद राजकुमार वशिष्ठ के बेटे राहुल वशिष्ठ ने बताया कि 11 जुलाई को शहीदी दिवस पर हर साल कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। गुरुवार को नसवाल में शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि देने के लिए सादा कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें शहीद को भावभीनी श्रद्धांजलि देकर नमन किया।