Thursday, November 14, 2019 02:10 PM

कार्टूनिस्ट नरेश पंडित का देहांत

मंडी - अस्सी के दशक के मशहूर कथाकार, रंगकर्मी एवं कार्टूनिस्ट नरेश पंडित का बुधवार रात निधन हो गया। वह 67 वर्ष के थे। नरेश पंडित पिछले करीब छह वर्षों से बीमारी के चलते घर से बाहर नहीं निकल पा रहे थे। इसके बावजूद वह लेखन और चित्रकारी में बराबर सक्रिय रहे। छुनकी, मांसभात, नानी की लालटेन, घालू़, पांच मन लकड़ी जैसी चर्चित कहानियों के लेखक नरेश पंडित की मांसभात और हिमाचल की प्रगतिशील कहानियां पुस्तकें प्रकाशित हुई है।  नरेश पंडित ने चंडीगढ़ से फाइन आर्ट्स में डिप्लोमा कर रखा था, लेकिन उनका मन कला की दूसरी विधाओं में रमा रहता था। वह रंगकर्म से भी जुड़े रहे। उनके निधन पर विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक संगठनों हिमाचल प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ, हिम साहित्य परिषद, सुकेत साहित्य एवं सांस्कृतिक परिषद के अलावा साहित्यकारों प्रो. सुंदर लोहिया, दीनू कश्यप, डा. विजय विशाल, मुरारी शर्मा, केके नूतन, डा. गंगाराम राजी, हंसराज भारती, कृष्णचंद्र महादेविया, पवन चौहान, डा. आरके गुप्ता, जिला भाषा अधिकारी रेवती सैणी, जिला लोक संपर्क अधिकारी सचिन संगर तथा पत्रकारों में किशोरी लाल सूद, हेमकांत कात्यायन, बीरबल शर्मा, बीएन मल्होत्रा, अंकुश सूद, पुरूषोतम शर्मा, अमनदीप अग्निहोत्री, हंसराज सैणी, डीसी वर्मा और रूपलाल कौंडल आदि ने शोक व्यक्त किया है, उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को ब्यास नदी के तट पर हनुमानघाट में किया गया। वे अपने पीछे पत्नी और दो बेटियां छोड़ गए हैं।