Friday, October 18, 2019 12:51 PM

कालिका सहस्रनाम

-गतांक से आगे...

कुब्जिका ज्ञानिनी ज्येष्ठा भुशुंडी प्रकटा तिथिः। द्रविणी गोपिनी माया काम-बीजेश्वरी क्रिया।। 81।। शांभवी केकरा मेना मूषलास्त्रा तिलोत्तमा। अमेय-विक्रमा व्रूहृरा सम्पत्शाला त्रिलोचना।। 82।। सुस्थी हव्य-वहा प्रीतिरुष्मा धूम्रार्चिरङ्गदा। तपिनी तापिनी विश्वा भोगदा धारिणी धरा।। 83।। त्रिखंडा बोधिनी वश्या सकला शब्द-रूपिणी। बीज-रूपा महा-मुद्रा योगिनी योनि-रूपिणी।। 84।। अनङ्ग-मदनानङ्ग-लेखनङ्ग-कुशेश्वरी। अनङ्ग-मालिनि-कामेशी देवि सर्वार्थ-साधिका।। 85।। सर्व-मंत्रमयी मोहिन्यरुणानङ्ग-मोहिनी। अनङ्ग-कुसुमानङ्ग-मेखलानङ्ग-रूपिणी।। 86।। वङ्कोश्वरी च जयिनी सर्व-द्वंद्व-क्षयर्ज्री। षडङ्ग-युवती योग-युक्ता ज्वालांशु-मालिनी।। 87।। दुराशया दुराधारा दुर्जया दुर्ग-रूपिणी। दुरंता दुष्कृति-हरा दुर्ध्येया दुरतिक्रमा।। 88।। हंसेश्वरी त्रिकोणस्था शाकम्भर्यनुकम्पिनी। त्रिकोण-निलया नित्या परमामृत-रञ्जिता।। 89।। महा-विद्येश्वरी श्वेता भेरुण्डा कुल-सुंदरी। त्वरिता भक्त-संसक्ता भक्ति-वश्या सनातनी।। 90।।