Sunday, November 17, 2019 03:23 PM

कालिका सहस्रनाम

-गतांक से आगे...

सिंदूर-पूर-रुचिरा श्रीमत्त्रिपुर-सुंदरी।

सर्वांग-सुंदरी रक्ता रक्त-वस्त्रोत्तरीयिणी।। 101।।

जवा-यावक-सिंदूर-रक्त-चंदन-धारिणी।

त्रिकूटस्था पञ्च-कूटा सर्व-वूट-शरीरिणी।। 102।।

चामरी बाल-कुटिल-निर्मल-श्याम-केशिनी।

वङ्का-मौक्तिक-रत्नाढ्या-किरीट-मुकुटोज्ज्वला।। 103।।

रत्न-कुण्डल-संसक्त-स्फुरद्-गण्ड-मनोरमा।

कुञ्जरेश्वर-कुंभोत्थ-मुक्ता-रञ्जित-नासिका।। 104।।

मुक्ता-विद्रुम-माणिक्य-हाराढ्य-स्तन-मण्डला।

सूर्य.कांतेंदु-कांताढ्य-कांता-कण्ठ-भूषणा।। 105।।

वीजपूर-स्फुरद्-वीज-दंत-पंक्तिरनुत्तमा।

काम-कोदण्डकाभुग्न-भ्रू-कटाक्ष-प्रवर्षिणी।। 106।।

मातंग-कुम्भ-वक्षोजा लसत्कोक-नदेक्षणा।

मनोज्ञ-शुष्कुली-कर्णा हंसी-गति-विडम्बिनी।। 107।।

पद्म-रागांगदा-ज्योतिर्दोश्चतुष्क-प्रकाशिनी।

नाना-मणि-परिस्फूर्जच्दृद्ध-कांचन-वंकणा।। 108।।

नागेंद्र-दंत-निर्माण-वलयांचित-पाणिनी।

अंगुरीयक-चित्रांगी विचित्र-क्षुद्र-घण्टिका।। 109।।

पट्टाम्बर-परीधाना कल-मञ्जीर-शिंजिनी।

कर्पूरागरु-कस्तूरी-कुंकुम-द्रव-लेपिता।। 110।।