Tuesday, September 17, 2019 02:15 PM

कितने बेनकाब पाकिस्तान

एक तरफ  संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक जेनेवा में शुरू हुई है, तो दूसरी ओर बैंकाक में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (फाट्फ) ने पाकिस्तान से सवाल-जवाब का दौर शुरू किया है। फाट्फ  की जांच पाकिस्तान को काली सूची में डाल सकती है, क्योंकि आतंकवाद और उसकी फंडिंग पर पाकिस्तान लगाम नहीं कस सका है। तीसरी तस्वीर ईरान की है, जिसने पाक दूतावास पर चिपके भारत-विरोधी पोस्टर, बैनर, इश्तहार हटा दिए हैं। ईरान ने साफ  कहा है कि किसी तीसरे देश के खिलाफ  ऐसी हरकतें उसे कबूल नहीं हैं। भारत उसका दुश्मन देश भी नहीं है। चौथा पक्ष यह है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें फौज और पुलिस वहां के लोगों पर गोलियां दाग रही हैं। मामला नियंत्रण-रेखा के करीब तत्ता पानी इलाके का है। लोग इमरान हुकूमत के खिलाफ  प्रदर्शन पर उतर आए हैं और आक्रोश में भरकर आजादी की मांग कर रहे हैं। पीओके में लोगों को अब ‘तिरंगा’ चाहिए। पाकिस्तान के बलूचिस्तान और सिंध इलाकों में भी बगावत बुलंदियों पर है। इसी बीच खबर आई है कि जैश-ए-मुहम्मद आतंकी संगठन के सरगना मसूद अजहर को गुपचुप रिहा करके  पीओके में भेजने की साजिश रची गई है। वहां बैठकर वह भारत के खिलाफ  आतंकी हमले की रणनीति तैयार करेगा। दक्षिणी कमान के लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने भी ऐसी ही आशंका जताई है। आतंकवादी समुद्र में तैनात सुरक्षा बलों पर हमला बोल सकते हैं। उसके मद्देनजर जैश के 50 आतंकियों को प्रशिक्षण दिया गया है। बहरहाल पाकिस्तान इन तमाम मोर्चों पर बेनकाब है। कितनी बार और कहां-कहां वह बेनकाब होगा? हास्यास्पद यह है कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद के कश्मीर का मुद्दा पाकिस्तान यूएन मानवाधिकार परिषद में उठाने जा रहा है। सुरक्षा परिषद में वह मुंह की खा चुका है और अब मानवाधिकार की शिकायत करने जा रहा है, जिसे इसके बुनियादी मूल्यों का भी एहसास नहीं है। मानवाधिकार परिषद की बैठक 27 सितंबर तक चलेगी। संयुक्त राष्ट्र आम सभा का सत्र भी इसी माह शुरू हो रहा है। भारत के प्रधानमंत्री मोदी 27 सितंबर को ही आम सभा में भाग लेने के लिए दिल्ली से रवाना होंगे। बहरहाल बहसतलब मुद्दा यह है कि किस देश में मानवाधिकार की स्थिति कैसी है? संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में 47 देश सदस्य हैं। चीन पाकिस्तान की मदद जरूर करेगा, लेकिन बाकी देश भारत के इतिहास को जानते ही हैं। अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी सरीखे देश कह चुके हैं  कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं हैं। फाट्फ  पाकिस्तान के ‘आतंकीस्तान’ स्वरूप पर विमर्श कर रहा है। सुरक्षा परिषद के ज्यादातर सदस्य देश पहले ही कह चुके हैं कि कश्मीर भारत-पाक के बीच का द्विपक्षीय मामला है, लिहाजा शिमला  समझौते के मुताबिक उसका समाधान ढूंढा जाए। यानी कोई भी बड़ा देश, तीसरे की हैसियत से मध्यस्थता करने को तैयार नहीं है। दरअसल मानवाधिकार की कुचलियां तो पाकिस्तान के नाम दर्ज हैं। पाकिस्तान का औसत अवाम ही हुकूमत के खिलाफ है। सत्ता-पक्ष के नेता ही प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ  होते जा रहे हैं। अब पाकिस्तान पर करीब 105 अरब डालर का विदेशी कर्ज हो गया है। आतंकी हमलों की साजिशें उस स्थिति से उबार नहीं सकतीं। कश्मीर में किन मानवाधिकारों के कुचले जाने की शिकायत पाकिस्तान करेगा। अनुच्छेद 370 के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखना भारत सरकार का संवैधानिक दायित्व है, लिहाजा कुछ पाबंदियां भी जरूरी थीं, लेकिन अब 93 फीसदी कश्मीर पाबंदियों से मुक्त है। बीते 35 दिनों में आतंकवाद की एक गोली तक नहीं चली। स्कूल-कालेज खुल चुके हैं और परीक्षाओं की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। कश्मीर से 10,000 से अधिक ट्रकों में सेब और दूसरे फल देश के बाजार में जा रहे हैं। हज यात्रा की शुरुआत भी हो गई है। मोबाइल फोन और लैंडलाइन लगभग बहाल कर दिए गए हैं। अस्पताल खुले हैं, ओपीडी चालू है और आपरेशन किए जा रहे हैं। पाकिस्तान किन मानवाधिकार उल्लंघन की दलीलें देगा? यह संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सदस्य देश ही देख लेंगे और उसी के मुताबिक निर्णय लेंगे।