Tuesday, June 02, 2020 11:26 AM

किसानों की बिकी साढ़े तीन करोड़ की गेहूं

पांवटा अनाज मंडी में पहले आधे से ज्यादा फसल जाती थी पड़ोसी राज्य हरियाणा

नाहन-कोरोना महामारी ने जहां जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, वहीं पांवटा साहिब के किसानों के लिए कहीं न कहीं कोरोना के चलते हुआ लॉकडाउन राहत दे गया। राहत इसलिए क्योंकि पांवटा दून के किसानों की करोडों रुपए की गेहूं की फसल घर द्वार ही बिक रही है। इस बार हरियाणा की मंडियों मे जाने की जरुरत भी नहीं पड़ी और एफसीआई ने स्थानीय अनाज मंडी मे ही किसानों की पूरी फसल खरीद ली। जानकारी के मुताबिक पांवटा साहिब मे एफसीआई हर साल गेहूं खरीद केंद्र स्थापित करता है और किसानों से गेहूं खरीदता है। हालांकि पांवटा साहिब के काफी किसान वर्षों से पड़ोसी राज्य हरियाणा की खिजराबाद मंडी के आढ़तियों के साथ व्यापार करते आ रहे हैं, जिस कारण पांवटा में एफसीआई के पास अधिकतम आठ से नौ हजार क्विंटल तक गेंहू पंहुच पाती थी, लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते पांवटा साहिब के सभी किसानों ने पांवटा साहिब स्थित अनाज मंडी में ही अपनी फसल बेची, जिसका नतीजा यह हुआ कि अभी तक एफसीआई के पास रिकार्ड 19 हजार क्विंटल से अधिक गेहूं पहुंच चुकी है, जिसकी कीमत 1925 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से तीन करोड़ 65 लाख, 86 हजार 403 रुपए हैं। मंडी समीति के चेयरमैन रामेश्वर ने पिछले आंकड़े जुटा और उम्मीद जताई कि इस बार 20 से 25 हजार क्विंटल गेंहू मंडी मे पंहुच सकती है। आंकड़ो के हिसाब से व्यवस्था की गई और एफसीआई के साथ मिलकर कोरोना महामारी के बीच भी अच्छी व्यवस्था करते हुए किसानों की मेहनत को जाया नहीं होने दिया। वह खुद लगातार व्यवस्था पर नजर बनाते रहे और एफसीआई के मैनेजर राजेंद्र सिंह नेगी ने भी अपना बेस कैंप पांवटा साहिब में ही बना लिया। देर रात तक गेहूं की खरीद होती रही। मजदूरों ने भी पूरा सहयोग किया। एफसीआई के मेनेजर राजेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि किसानों सहित मंडी समीति के सहयोग और उनके स्टॉफ  की मेहनत से गेहूं खरीद का इस बार बड़ा रिकार्ड बना है। अभी तक उनके पास 19 हजार 800 क्विंटल गेहूं पहुंच चुकी है, जिसकी पैमेंट सीधा किसानों के खातों में डाली गई है। अभी तीन हजार क्विंटल गेहूं और आने की संभावना है। किसानों ने बड़ा सहयोग किया और बुलाने पर ही मंडी आते रहे,  जिससे सोशल डिस्टेंसिंग भी बना रहा। उम्मीद है कि अब अगले वर्ष भी किसान अब यहीं पर अपनी फसल बेचेंगे।