Monday, April 06, 2020 04:59 PM

किसी अजूबे से कम नहीं हैं महाभारत के पात्र

अम्बिका और अम्बालिका विचित्रवीर्य की पत्नियां बनीं, लेकिन विचित्रवीर्य की अकाल मृत्यु के कारण वह दोनों निःसंतान रह गईं। भीष्म ने पहले ही ब्रह्मचर्य व्रत की शपथ ले रखी थी और अब दोनों पुत्रों चित्रांगद तथा विचित्रवीर्य की अकाल मृत्यु के कारण कुरुवंश का वंश खतरे में था। ऐसे में सत्यवती ने अपने सबसे बड़े पुत्र वेद व्यास को याद किया और नियोग की विधि से अम्बिका और अम्बालिका का गर्भाधान करवाया। सत्यवती ने अम्बालिका को निर्देश दिया कि वह अम्बिका की तरह अपनी आंखें बंद न करे। जब वेद व्यास अम्बालिका के सम्मुख प्रस्तुत हुए तो अम्बालिका लज्जा के कारण पीली पड़ गई और इसी कारण जब उसकी कोख से पाण्डु का जन्म हुआ तो वह जन्म से ही पीलिया रोग से ग्रस्त था...

-गतांक से आगे...

अम्बिका और अम्बालिका विचित्रवीर्य की पत्नियां बनीं, लेकिन विचित्रवीर्य की अकाल मृत्यु के कारण वह दोनों निःसंतान रह गईं।  भीष्म ने पहले ही ब्रह्मचर्य व्रत की शपथ ले रखी थी और अब दोनों पुत्रों चित्रांगद तथा विचित्रवीर्य की अकाल मृत्यु के कारण कुरुवंश का वंश खतरे में था। ऐसे में सत्यवती ने अपने सबसे बड़े पुत्र वेद व्यास को याद किया और नियोग की विधि से अम्बिका और अम्बालिका का गर्भाधान करवाया। सत्यवती ने अम्बालिका को निर्देश दिया कि वह अम्बिका की तरह अपनी आंखें बंद न करे।  जब वेद व्यास अम्बालिका के सम्मुख प्रस्तुत हुए तो अम्बालिका लज्जा के कारण पीली पड़ गई और इसी कारण जब उसकी कोख से पाण्डु का जन्म हुआ तो वह जन्म से ही पीलिया रोग से ग्रस्त था।

विचित्रवीर्य

सत्यवती और शांतनु के चित्रांगद और विचित्रवीर्य नामक दो पुत्र हुए।  शांतनु का स्वर्गवास चित्रांगद और विचित्रवीर्य के बाल्यकाल में ही हो गया था, इसलिए उनका पालन-पोषण भीष्म ने किया।  भीष्म ने चित्रांगद के बड़े होने पर उन्हें राजगद्दी पर बिठा दिया, लेकिन कुछ ही काल में गंधर्वों से युद्ध करते हुए चित्रांगद मारा गया।  इस पर भीष्म ने उनके अनुज विचित्रवीर्य को राज्य सौंप दिया। अब भीष्म को विचित्रवीर्य के विवाह की चिंता हुई। उन्होंने अम्बिका और अम्बालिका का विवाह विचित्रवीर्य के साथ करवा दिया।  विचित्रवीर्य अपनी दोनों रानियों के साथ भोग-विलास में रत हो गए, किंतु दोनों ही रानियों से उनकी कोई संतान नहीं हुई और वे क्षय रोग से पीडि़त होकर मृत्यु को प्राप्त हो गए।

रुक्मिणी

रुक्मिणी भगवान कृष्ण की पत्नी थी। रुक्मिणी को लक्ष्मी का अवतार भी माना जाता है।

उन्होंने श्रीकृष्ण से प्रेम विवाह किया था। रुक्मिणी (या रुक्मणी) भगवान कृष्ण की प्रमुख पत्नी और रानी हैं।

द्वारका के राजकुमार कृष्ण ने उनके अनुरोध पर एक अवांछित विवाह को रोकने के लिए उनका अपहरण कर लिया और उनके साथ भाग गए और उन्हें दुष्ट शिशुपाल (भागवत पुराण में वर्णित) से बचाया।

रुक्मिणी कृष्ण की पहली और सबसे प्रमुख रानी है।

रुक्मिणी को भाग्य की देवी लक्ष्मी का अवतार भी माना जाता है।

पारंपरिक खातों के अनुसार, राजकुमारी रुक्मिणी का जन्म वैशाख 11 (वैशाख एकादशी) को हुआ था।

यद्यपि एक सांसारिक राजा के रूप में जन्मी, देवी लक्ष्मी के अवतार के रूप में उनकी स्थिति पूरे पौराणिक साहित्य में वर्णित है।