Sunday, November 17, 2019 03:26 PM

किसी से हिंदू सर्टिफिकेट लेने की मुझे जरूरत नहीं

पालमपुर- कसौली लिटफेस्ट को लेकर पूर्व सांसद शांता कुमार द्वारा दिए गए बयान से उपजे विवाद के बाद अब शांता कुमार ने स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है। बकौल शांता कुमार कसौली में साहित्यकार खुशवंत सिंह के कार्यक्रम के संबंध में दिए गए उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। वहीं, पुतला फूंकने की घटना पर उन्होंने कहा कि धारणा के अनुसार, जिसका पुतला फूंका जाता है, उसकी आयु बढ़ जाती है। उन्होंने यह भी कहा है कि उन्हें देश की सेवा करने का और समय मिला जाए, तो उनके लिए सौभाग्य ही होगा। शांता कुमार ने कहा कि यदि वह उन्हें एक हिंदू नहीं समझते, तो उन्हें ज्यादा कुछ भी नहीं कहना है। बस इतना ही कहना है कि जीवन के इस अंतिम मोड़ पर उन्हें किसी से भी हिंदू होने का प्रमाणपत्र लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने उस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा था कि हिमाचल प्रदेश में इतना महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम प्रतिवर्ष होना अच्छी बात है। प्रदेश के लिए यह सौभाग्य की बात है कि भारत ही नहीं, विश्व से भी कुछ बड़े साहित्यकार और बुद्धिजीवी उस कार्यक्रम में भाग लेते हैं। उन्होंने राहुल सिंह से यह विशेष आग्रह करने की बात कही थी कि इस प्रकार के विद्वान साहित्यकार और बुद्धिजीवियों के कार्यक्रम में केवल संवाद विचारों का आदान-प्रदान और विचार-विमर्श ही होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि उस संवाद में कुछ भी ऐसा न हो, जिस पर कोई विवाद खड़ा हो सके। उनके कहने का सीधा सा अर्थ था कि कार्यक्रम में राजनीतिक मुद्दे और धारा-370 की चर्चा नहीं होनी चाहिए। बुद्धिजीवियों के कार्यक्रम में उन्होंने अपनी टिप्पणी राजनीतिक भाषा में नहीं की थी। इसी कारण सोलन के कुछ मित्रों को भ्रम हो गया, अच्छा होता, वे उन्हें फोन करके पूछ लेते।