Sunday, November 17, 2019 03:24 PM

कुछ अलग करने की चाहत ने बना दिया आईपीएस

प्रोफाइल

जन्म तिथि : 01 अक्तूबर, 1969

शिक्षाः  राजकीय पाठशाला धनेटा से उच्च विद्यालय की शिक्षा, कालेज डीएवी कांगड़ा , राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर से स्नातक व हिप्र. विवि से एमएससी।

आईपीएस बैच :  2008

पत्नी का नाम :  वर्षा शर्मा (आईपीएस)

जन्म स्थान :  नादौन ( धनेटा), हमीरपुर

अब तक किन-किन पदों पर रहे

पांच वर्ष तक बतौर फोरेस्ट रेंजर ,1995 में एचएएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। डीएसपी प्रोबेशन मंडी, डीएसपी बिलासपुर ,1999 से वर्ष 2009 तक केंद्र सरकार में तैनाती, वर्ष 2009 से 2011 तक हिमाचल में पुनः सेवारत रहने के बाद 2011 से 2018 तक पुनः केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति। वर्ष 2018 में कमांडेंट छठी आईआरबी बटालियन धौलाकुआं में तैनाती के बाद बतौर पुलिस अधीक्षक सिरमौर सेवारत हैं।

हिमाचल प्रदेश में पुलिस पाठशाला की एक नई शुरुआत करने वाले पुलिस अधीक्षक सिरमौर अजय कृष्ण शर्मा आज  न केवल सिरमौर जिला की पहचान हैं बल्कि पूरे हिमाचल को देशभर में नई पहचान दिलाने वाले पुलिस अधिकारी बन गए हैं। जिला सिरमौर में गरीब तबके के विद्यार्थियों को निःशुल्क पुलिस पाठशाला के माध्यम से कोचिंग देने की बात हो या  सिरमौर जिला के हजारों विद्यार्थियों को स्कूल, कालेज,आईटीआई व अन्य शैक्षणिक संस्थानों में  नुक्कड़ नाटक के माध्यम से नशे के दुष्प्रभाव के बारे में जागरूक करने की मुहिम तो प्रदेश में आईपीएस अधिकारी अजय कृष्ण शर्मा का नाम सबसे पहले सामने आता है। यही नहीं इंटेलिजेंस ब्यूरो में लंबा तजुर्बा होने के कारण अजय कृष्ण शर्मा को किसी भी प्रकार के अपराध व गुप्त सूचना पर जांच को परिणाम तक पहुंचाने में भी महारत हासिल है। बेहद ही सादगी पूर्ण जीवन जीने वाले तथा सरकारी कार्य के लिए आम आदमी की तरह कतार में खड़े होकर अपना काम करवाने वाले पुलिस अधीक्षक अजय कृष्ण शर्मा हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला के नादौन के छोटे से गांव धनेटा के रहने वाले हैं जो डेढ़ वर्षों से भी अधिक समय से जिला सिरमौर में सेवारत हैं। सिरमौर के एसपी अजय कृष्ण शर्मा को खुफिया नेटवर्क का 17 साल का तजुर्बा है। इसी के बूते अपराध घटित होने से पहले ही इसे टालने की कोशिश करते हैं। 1990 में वह फोरेस्ट रेंजर बन गए थे। मगर इरादा खाकी पहनकर कुछ हटकर करने का था। 1995-96 में पहले ही प्रयास में हिमाचल प्रदेश पुलिस सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। 2001 में वह इंटेलिजेंस ब्यूरो में डेपुटेशन पर चले गए। सात साल बाद 2008 में आईपीएस अधिकारी के तौर पर इंडक्शन हो गया। इंटेलिजेंस ब्यूरो में 17 साल सेवाएं देने के बाद जून, 2018 में वापस प्रदेश आए तो नियुक्ति छठी आईआरबी बटालियन में बतौर कमांडेंट हुई। यहां भी ज्वाइनिंग के चंद महीनों के बीच पुलिस की निःशुल्क पाठशाला शुरू कर चर्चा में आ गए। 26 जनवरी, 2019 को 70वें गणतंत्र दिवस की पावन बेला पर दोपहर बाद बतौर पुलिस अधीक्षक कार्यभार संभाल लिया था। पुलिस के कर्मचारी व अधिकारी आईपीएस अजय कृष्ण की सादगी को देखकर पहली ही झलक में उनके कायल हो गए। उल्लेखनीय है कि सामाजिक सरोकारों में अग्रणी भूमिका निभाने पर अजय कृष्ण शर्मा को 6 दिसंबर, 2018 को केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

क्यों शुरू की पुलिस की निःशुल्क पाठशाला

दरअसल वह खुद दसवीं की पढ़ाई तक गांव से 10 किलोमीटर दूर नहीं गए थे। 11वीं में जब दाखिला लेना था तो पहली बार कांगड़ा पहुंचे थे। यही बात उन्हें हमेशा कचोटती रही कि जाने कितने ऐसे बच्चे आज भी होंगे, जो अपने गांव से बाहर नहीं निकले होंगे, लिहाजा डेपुटेशन से वापस आते ही पुलिस की निःशुल्क पाठशाला कोचिंग को धौलाकुआं में शुरू कर दिया। दसवीं कक्षा के छात्रों को प्राथमिकता दी गई। महज चंद महीने कमांडेंट के पद पर तैनात रहने के दौरान केंद्रीय एजेंसी आईईआरडी, से साढे़ 7 लाख रुपए की  राशि स्कूल के लिए मंजूर करवाने में सफल रहे, ताकि स्मार्ट कक्षाएं बन सकें। यही नहीं, 50 हजार रुपए का फंड इन छात्रों के शैक्षणिक टूर के लिए भी मंजूर हुआ। विशेष बातचीत के दौरान आईपीएस अजय कृष्ण ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों में उन्हें अपना बचपन नजर आता है, जिसने दसवीं तक शहर नहीं देखा था। उन्होंने कहा कि हरेक छात्र में विलक्षण प्रतिभा होती है, बशर्ते इसे तराशा जाए। उन्होंने बताया कि पुलिस पाठशाला में छात्रों की विंटर ब्रेक को भी बखूबी सार्थक किया गया। एसपी ने कहा कि वह चाहते हैं कि पाठशाला चलती रहे। इसमें जो भी सहयोग होगा, वह प्रदान करेंगे। हाल ही में आईपीएस अधिकारी ने पुलिस लाइन में मेधावी छात्रों के लिए निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था भी की है।

पत्नी भी हैं दमदार पुलिस अधिकारी

एसपी अजय कृष्ण शर्मा की पत्नी वर्षा शर्मा भी एक दमदार पुलिस अधिकारी हैं, जो वर्तमान में दिल्ली में बतौर आईपीएस तैनात हैं। वह दिल्ली पुलिस में 1996 बैच की अधिकारी हैं।

मुलाकात :पुलिस सेवा जनसेवा का सबसे बेहतरीन माध्यम है ...

अजय कृष्ण शर्मा : एसपी सिरमौर

आपके अनुसार आईपीएस अधिकारी होने का मतलब क्या है?

एक आईपीएस अधिकारी का मतलब केवल जनसेवा का एक सशक्त माध्यम है। आईपीएस बनकर जनता की सेवा करने का जो अवसर मिलता है वह अपने आप ही आईपीएस के नाम को चरितार्थ करता है।

आपने स्कूली शिक्षा और कालेज व विश्वविद्यालय की पढ़ाई कहां से पूरी की?

मैंने स्कूली स्तर की पढ़ाई धनेटा (नादौन) से की है। उसके बाद डीएवी कालेज कांगड़ा व हमीरपुर महाविद्यालय से स्नातक की शिक्षा उत्तीर्ण की है। स्नातक  की पढ़ाई के बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में एमएससी की पढ़ाई पूरी की है।

छात्र के रूप में हासिल  उपलब्धियों में आप स्वयं को 10 में से कितने अंक देंगे?

छात्र जीवन की यदि बात की जाए तो मैं अपने आपको 10 में से आठ अंक दूंगा।

आप प्रशासनिक सेवा में आए, इसके लिए कब सोचा?

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई पूरी करने के उपरांत वर्ष 1990 में वन विभाग में बतौर रेंज आफिसर सेवाएं ज्वाइन की थी। इस दौरान मैं चायल स्थित वन विभाग के स्कूल में पढ़ाता था। इसी दौरान ख्याल आया कि मैं अभी और पढ़ाई कर प्रशासनिक सेवा की तैयारी करूं। वर्ष 1995 में पहले ही प्रयास में एचएएस की परीक्षा उत्तीर्ण की, जिसके बाद हिमाचल पुलिस सेवा में नौकरी मिली।

आपने  एचएएस परीक्षा में कौन से विषय चुने और क्यों?

हिमाचल प्रशासनिक सेवा में बॉटनी व जूलॉजी मेरे विषयों रहे। इसका मुख्य कारण यह था कि मुझे इन विषय में अधिक रुचि थी। विषय का चयन ऐसा होना चाहिए जिसमें सबसे अधिक रुचि हो।

आईपीएस बनने के लिए आपको कितने प्रयास करने पड़े। इसके लिए प्रेरणा कहां से मिली?

जब मैं वन विभाग में सेवारत था तो उसी दौरान मुझे लगा कि मैं और बेहतर परीक्षा में जा सकता हूं। इसके लिए मन से तैयारियां कीं तथा पहले ही प्रयास में वर्ष 1995 में प्रशासनिक सेवा उत्तीर्ण की।

एचएएस के लिए कितने समय तक तैयारी की और रोजाना कितने घंटे पढ़ाई करते थे?

यह जरूरी नहीं है कि किसी भी परीक्षा की पढ़ाई के लिए घंटे निर्धारित किए जाएं। तैयारियां पैटर्न के हिसाब से की जानी चाहिएं। दृढ़ इच्छा शक्ति, संकल्प व मेहनत का जज्बा होना चाहिए, ताकि परीक्षा की तैयारियां हो सकें।

प्रशासनिक सेवा परीक्षा के लिए क्या पढ़ा जाए, इसका चयन कैसे करें?

किसी भी परीक्षा की तैयारी के लिए ऐसे विषय का चयन किया जाना चाहिए जिसमें अधिक रुचि हो। इसके अलावा प्रतिदिन समाचार पत्र, परीक्षा पर फोकस, विषय की प्लानिंग, आईटी की जानकारी व सोशल मीडिया पर प्रशासनिक सेवा के मोटिवेशन के वीडियो देखकर आईएएस व आईपीएस जैसी परीक्षा की तैयारियां करनी चाहिएं। साथ ही हमेशा पॉजिटिव रहें तथा प्लानिंग के साथ प्रतिदिन नियमित पढ़ाई करना आवश्यक है। इसके अलावा केंद्र व राज्य सरकारों की नई-नई योजनाओं के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए। साथ ही इंटरनेट व ऑनलाइन पोर्टल भी ऐसी परीक्षा के लिए मददगार साबित होते हैं।

कंपीटीटिव एग्जाम के लिए आजकल  कोचिंग का चलन बढ़ रहा है। क्या यह उपयोगी है?

प्रशासनिक सेवा व अन्य परीक्षाओं के लिए कोचिंग कुछ हद तक फायदेमंद हो सकती है, परंतु अपनी रुचि व विषय की जानकारी होना आवश्यक है। परीक्षा में वर्तमान में क्या ट्रेंड चल रहा है इस बारे में कोचिंग में जानकारी मिल जाती है।

आपका काम सामान्य अफसरों से किस प्रकार अलग है?

बतौर पुलिस अधिकारी प्रतिदिन नए कार्य व नए चैलेंज रहते हैं। पुलिस में सेवारत होने के कारण आम लोगों से निरंतर संपर्क रहता है। जन सेवा समझकर कार्य करता हूं।

आम व्यक्ति के नजरिए से कहें, तो एसपी की नौकरी में तनाव। क्या सचमुच ऐसा है?

यदि पुलिस सेवा को जन सेवा का माध्यम माना जाए तो कार्य के दौरान तनाव नहीं बल्कि संतुष्टि मिलती है।

अधिकारी बनने का सपना संजोए युवाओं को किस सोच के साथ सेवा में आना चाहिए?

जो युवा अधिकारी बनने के लिए तैयारियां करने की सोच रहे हैं उन्हें कमाई व सुविधाओं के उद्देश्य से नहीं अपितु समाज सेवा के उद्देश्य व सेवा भाव से अधिकारी की परीक्षा में आना चाहिए। जनसेवा के लिए यह बेहतरीन माध्यम है। सुविधाएं तो पद के साथ स्वयं मिलती हैं। पुलिस सेवा जन सेवा का सबसे बेहतरीन माध्यम है।

प्रशासनिक सेवाओं में जाने की सोच रहे नौजवानों को आप तैयारी के लिए क्या टिप्स देना चाहेंगे?

जो युवा आईपीएस व एचपीएस की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं वे अपने विषय पर फोकस करें। परीक्षा के लिए प्लानिंग करें तथा करंट अफेयर आईटी के साथ-साथ समाचार पत्रों को नियमित रूप से पढ़ें। इसके अलावा केंद्र सरकार की योजनाएं, सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की जानकारी के अलावा इंटरनेट व ऑनलाइन पोर्टल परीक्षा में मददगार साबित हो सकते हैं। युवा पूरी लगन के साथ परीक्षा की तैयारियां करें तो सफलता अवश्य मिलेगी।

- सूरत पुंडीर, नाहन