Saturday, September 21, 2019 04:48 PM

कुप्रबंध ही दुर्घटनाओं का कारण

- डा. विनोद गुलियानी, बैजनाथ

गत दिनों दिव्य हिमाचल के सम्पादकीय लेख ‘दुर्घटनाओं का सरलीकरण’ द्वारा हर पहलू पर पर्याप्त  प्रकाश डालते हुए कारण, निदान व इलाज को तंत्र के आगे विस्तार से रखना प्रशंसनीय के साथ चिंतनीय भी है। गत वर्ष नूरपुर स्कूल बस हादसे के बाद हाल ही में घटित शिमला स्कूल बस हादसे पर ‘हादसा या गौर इरादतन हत्या’ लेख द्वारा श्री जीवानंद शर्मा ने भी व्यापक मार्मिक तथ्य व उन पर गौर करने की पुरजोर वकालत की है। हर मां-बाप की आत्मा को झकझोरने वाली निरंतर दुर्घटनाओं के बाद अब कहने-सुनने को कुछ बचा है तो वह है अविलंब उच्च स्तरीय कड़ी कार्यवाई। चालक, गाड़ी व सड़क की तिकड़ी हर हालत में सुधार मांगती है। इन तीनों को पटड़ी पर लाने के लिए संबंधित अधिकारियों पर शिकंजा कसना समय की पुकार है। स्कूटर, मोटर साइकिल की तीव्र गति व हैलमेट रहितों के चालान काटना चरम सीमा पर होने पर भी कुछ हाथ न लगना बड़ा चिंता का विषय है। दूसरे स्थान पर गाडि़यों के रंग रोगन से अधिक मशीनरी को गूढ़ चैकिंग की आवश्यकता है। अंत में तृतीय चरण में सड़कों के रखरखाव में कोई भी समझौता दुर्घटना को दावत देता है।