Thursday, July 09, 2020 07:49 PM

कुर्सी पर उठा छह किलोमीटर दूर सड़क तक पहुंचाई महिला

गुशैणी  – तीर्थन घाटी की ग्राम पंचायत शिल्ली में गरुली गांव की लीला देवी पत्नी डूर सिंह को बुधवार रात से पेट दर्द की शिकायत थी, जो पूरी रात दर्द से कराहती रही और सुबह इसे  लकड़ी और कुर्सी की पालकी पर उठा कर गरुली गांव से करीब छह किलोमीटर दूर मुख्य सड़क मार्ग तुंग तक लाया गया। उसके बाद इसे  निजी वाहन में इलाज के लिए बंजार अस्पताल ले जाया गया। गौरतलब है कि आजादी के 72 वर्षों बाद भी आज तक गरुली गांव में सड़क सुविधा नहीं पहुंच पाई है, जिस कारण स्कूली छात्रों, बीमार और बुजुर्ग व्यक्तियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं, ग्राम पंचायत शिल्ली के उपप्रधान मोहर सिंह ठाकुर का कहना है कि दस साल के अंतराल में गांव में तीन बार आगजनी की घटना हो चुकी है। सड़क सुविधा न होने से ग्रामीणों का बहुत नुकसान हो चुका है। उन्होंने कहा कि पंचायत क्षेत्र के गांव गरुली परवाड़ी थाटा के लिए सड़क जो वर्ष 2016 में विधायक प्राथमिकता में डाली गई थी।  उसके लिए तीन बार सर्वेक्षण किया गया तत्पश्चात ग्रामीणों में सहमति बनी। इस सड़क के निर्माण के लिए 52 लोगों ने अपने 96 खसरा नंबर लोक निर्माण विभाग के नाम रजिस्ट्री कर दी है। सड़क की ज्वाइंट इंस्पेक्शन, डिजिटल मैप तथा अन्य दस्तावेज बनकर तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2018 में वर्तमान विधायक सुरेंद्र शौरी ने भी एक अन्य सड़क  प्लान के तहत रोपी से जाहरा के लिए विधायक प्राथमिकता में डाली है, जिसका सर्वेक्षण भूमि दान इत्यादि प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस सड़क के निर्माण से शहीद लगन चंद का स्कूल तथा पंचायत क्षेत्र के अन्य सरकारी संस्थान और अन्य गांव लाभान्वित होने थे। स्थानीय निवासियों कैप्टन लाल चंद, पूर्व पंचायत समिति सदस्य, पूर्व प्रधान मान दास, गौतम नेगी, रणजीत सिंह, गोविंद सिंह, गोकुल चंद, डोलाराम, वार्ड पंच भादर सिंह लोत, राम, दिलीप सिंह, शेष राम, मुरली चंद, मेहर चंद, बृजलाल, किशोर चंद, जीतराम, दशमी राम, वेदराम, ज्ञान चंद, सोनू, शोभाराम, प्यारे राम आदि का कहना है कि स्वास्थ्य उपकेंद्र की पंचायत के लोग लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं। वर्ष 2017 में इसकी प्रदेश सरकार ने अधिसूचना भी कर दी थी, लेकिन उसके फंक्शनल आर्डर जारी नहीं किए और पदों की व्यवस्था नहीं की थी। उसके पश्चात वर्तमान विधायक से सरकार से लगातार फंक्शनल ऑर्डर करने तथा पदों की व्यवस्था करने के लिए पत्राचार कर रहे हैं।

पांच किलोमीटर पीछे करना पड़ा था शहीद का दाह संस्कार

बीते सप्ताह राजस्थान के बीकानेर में शहीद हुए पंचायत के गरुली गांव के लगन चंद का भी सड़क सुविधा न होने के कारण गांव से पांच किलोमीटर पीछे अंतिम संस्कार करना पड़ा था, जिससे ग्रामीणों को बहुत दुख हुआ था और यह खासा चर्चा का विषय भी बना था। साल 2019 में भी जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना में तैनात डाबे राम पुत्र प्यारे राम गांव गरुली के मकान में आग लगी थी। सड़क सुविधा न होने के कारण गांव में फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं आ सकी और देखते ही देखते पूरा मकान जलकर राख हो गया, जिसमें लगभग 15 लाख का नुकसान हुआ था।

स्वास्थ्य उपकेंद्र की भी दरकार

वहीं, वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर शहीद को श्रद्धांजलि देन के दौरान और एक बार उससे पहले नवंबर, 2019 में पुल के शिलान्यास के दौरान गांव आए थे। उन्होंने भी स्वास्थ्य उपकेंद्र को चालू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन वह भी अभी तक पूरा नहीं हो पाया है सड़क की सुविधा न होने से आज तक लोगों को अपने प्राथमिक उपचार के लिए गर्भवती महिलाओं तथा अस्वस्थ लोगों को टीकाकरण व दवा के लिए भी आठ किलोमीटर दूर पैदल बठाहड़ जाना पड़ता है।

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