Friday, October 18, 2019 11:56 AM

कुल्लू दशहरे में इस बार ज्यादा आए 40 देवता

उत्सव के लिए इस साल 331 को भेजा था बुलावा, कुछ बिना निमंत्रण पहुंचे

कुल्लू - विश्व के सबसे बड़े देव समागम यानी दशहरा उत्सव में इस बार देवी-देवताओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई। बढ़ती देवी-देवताओं की संख्या से ढालपुर में रौनक लौट आई।  दशहरा उत्सव में प्रशासन के बिना निमंत्रण भी देवी-देवता इस बार भी आए हैं। डेढ़ दशक की बात करें तो इस बार सबसे ज्यादा देवी-देवता दशहरा उत्सव में पहुंचे हैं। पिछले वर्ष जिला प्रशासन ने 305 और इससे पहले काफी वर्षों से 292 देवी-देवताओं को ही जिला प्रशासन की ओर से निमंत्रण भेजा जाता रहा है, लेकिन इस बार जिला भर के 331 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा गया था। पिछले साल की भांति इस बार जहां नए 26 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा गया था। वहीं, देवी-देवताओं की संख्या पिछले वर्ष की बजाय 40 बढ़ी है। उत्सव में 278 देवी-देवता पहुंचे हैं, जबकि पिछले वर्ष तक यह संख्या 238 थी। हालांकि इस बार बिना निमंत्रण के तीन देवता भी अनूठे देव समागम में पहुंचे हैं।  बता दें कि 1661 के बाद वर्ष 2013 में पहली बार रिकार्ड देवी देवताओं ने दशहरा उत्सव में शिरकत की थी। वैसे तो दशहरा उत्सव की शुरुआत वर्ष 1661 में जिला भर के 365 देवी-देवताओं के शिरकत करने से हुई थी, लेकिन उसके बाद देवी-देवताओं को दशहरा में आने की छूट दी गई। वर्ष 2004 में मात्र 101 देवी-देवता दशहरा उत्सव में आते थे, 2005 में संख्या 93 ज्यादा पहुंच गई थी।  इसके बाद देवी-देवताओं की संख्या बढ़ने लगी।

कब-कितने देवता आए

2004      -           101

2005      -           194

2006      -           200

2007      -           211

2008      -           210

2009      -           213

2010      -           210

2011      -           220

2012      -           222

2013      -           234

2014      -           226

2015      -           230

2016      -           227

2017      -           249

2018      -           238

2019      -           278

जिला में 1661 से सज रहा देव-महाकुंभ

1661 से लेकर आज तक जिला कुल्लू के देवी-देवता दशहरा उत्सव में शिरकत करते आ रहे हैं।  लिहाजा, देवी-देवताओं की संख्या बढ़ने से भले ही जिला प्रशासन और दशहरा कमेटी को स्थान मुहैया करवाने में दिक्कतें आती हों, लेकिन कुल्लू का देव समाज उत्सव को और बढ़ावा देना चाहता है। हालांकि ढालपुर के सिकुड़ जाने से आने वाले समय में देवी-देवताओं की संख्या बढ़ने स्थान मुहैया करवाने में समस्या हो सकती है।