कृषि-विकास में निवेश करें निजी कंपनियां

नई दिल्ली —नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने निजी क्षेत्र से कृषि अनुसंधान एवं विकास पर अधिक राशि निवेश करने की अपील करते हुए मंगलवार को कहा कि इससे किसानों, उद्योगों और आम लोगों को फायदा होगा। श्री चंद ने फिक्की और खाद्य क्षेत्र की कंपनी कारगिल की ओर से खाद्य वस्तुओं पर आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि देश में कृषि अनुसंधान एवं विकास पर केवल 0.3 प्रतिशत राशि ही खर्च की जाती है, जबकि चीन में यह राशि 0.4 प्रतिशत है। भारत के अलावा दूसरे देशों में निजी कंपनियां कृषि अनुसंधान एवं विकास पर अधिक राशि खर्च करती है। देश में कुपोषण की समस्या के समाधान के लिए जागरुकता अभियान चलाया जाना चाहिए, जिससे लोगों को पता चले कि उन्हें क्या खाना और क्या नहीं खाना है। श्री चंद ने उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि पंजाब और हरियाणा में गेहूं की कुछ किस्मों में 11 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है, जबकि हिमाचल प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों का बहुत कम उपयोग किया जाता है, वहां की गेहूं में सात से आठ प्रतिशत ही प्रोटीन पाया जाता है। नीति आयोग के सदस्य ने लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि अर्थिक रूप से सुदृढ़ होने पर लोग उच्च गुणवत्ता की वस्तुएं खरीद सकते हैं। कृषि उत्पादन के क्षेत्र में देश में हुई प्रगति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हरित क्रांति के बाद प्रति व्यक्ति 84 प्रतिशत उत्पादन बढ़ा है।

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