Tuesday, November 30, 2021 07:51 AM

कृषि हेल्पलाइन

‘फल मक्खी’ से बचाएं बरसाती सब्जियां

फल मक्खी : बरसाती सब्जियों का मुख्य नाशी कीट फल मक्खी जिसको पीकॉक मक्खी के नाम से भी जाना जाता है, बरसात में उगाई जाने वाली सब्जियों का एक मुख्य नाशी कीट है, यह खीरा, कद्दृ, घीया, टमाटर, करेला इत्यादि पर बहुत अधिक नुकसान पहुंचाता है। इस मक्खी की कई किस्में पाई जाती हैं जो न केवल बरसात में उगाई जाने वाली सब्जियों को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि आम, अमरूद इत्यादि को भी नुकसान करती हैं, लेकिन जो किस्म सब्जियों को नुकसान पहुंचाती हैं, वह प्रायः आम व अमरूद में नहीं पाई जाती हैं। इसी तरह आम व अमरूद को नुकसान पहुंचाने वाली फल मक्खी प्रायः सब्जियों को नुकसान नहीं करती। सब्जियों में दो-तीन प्रकार की फल मक्खी पाई जाती है और इन सबका नुकसान एक जैसा ही होता है।

पहचान : ये मक्खियां दो पंखों वाली तथा हल्के पीले रंग की होती हैं। यह मक्खियां लगातार नहीं उड़तीं, बल्कि रुक-रुक कर उड़ती हैं। इनकी कमर काफी पतली होती है। इन मक्खियों का आकार घर में पाई जानी वाली मक्खियों से थोड़ा सा लंबा व पतला होता है। इन मक्खियों की सुंडियां क्रीम रंग की होती हैं तथा प्यूपा हल्के भूरे रंग के होते हैं। अंडे हल्के सफेद रंग के होते हैं। मादा के पृष्ठ भाग में सुई की तरह का एक-एक भाग बना होता है, जबकि नर में यह नहीं होता।

नुकसान : इस कीट की केवल सुंडियां ही नुकसान पहुंचाती हैं। जो कि फल के अंदर रहकर गुदे को खाती रहती हैं। मादा फल के अंदर अपने सुईनुमा ओवी पोजिटर से अंडे देती हैं। टमाटर में यह उस जगह पर अधिकतर अपने अंडे देती हैं, जहां पर से टमाटर पौधे के साथ जुड़ा होता है। इसके अतिरिक्त घीया, करेला, खीरा में शुरू की अवस्था में अंडे देती है जब ये सब्जियां बहुत छोटी होती हैं। सुंडियां अंदर ही अंदर गदे को खाती रहती हैं, जिससे ये सब्जियां खाने  योग्य नहीं होती है। घीया में तो शुरू की अवस्था में अंडे देने से, ये सड़ने लगती हैं। टमाटर के ग्रसित फल को डंडी के नीचे दबाने पर रस निकलने लगता है, जिससे इसके नुकसान का पता लगता है।

जीवन चक्र : इस मक्खी का जीवन चक्र बहुत साधारण रूप से चलता है। मादा फल के अंदर अंडे देती है। इन अंडों से 1-2 दिनों के बाद सुंडियां निकल आती हैं। ये सुंडियां फल के गुदे को खाने लगती हैं तथा लगातार खाने से अपनी अवस्था में बढ़ने लगती हैं। ये सुंडियां अपनी तीन अवस्थाएं फल के अंदर ही गुजारती हैं। तीसरी अवस्था की सुंडी फल में छेद करके, फल से बाहर आ जाती हैं। बाहर आने पर ये सुंडियां चलते समय सप्रिंग की तरह कूदती हैं तथा बाद में प्यूपा में परिवर्तित हो जाती हैं। अंडे से निकलने प्यूपा बनने तक सुंडियों को 4-7 दिन लग जाते हैं। प्यूपा बनने के लिए सुंडियां जमीन में मिट्टी के अंदर चली जाती हैं तथा वहां प्यूपा में परिवर्तित हो जाती हैं। जो कि मिट्टी से बाहर आकर उड़ने लगते हैं। सर्दियों में इस मक्खियों की क्रिया कम हो जाती है। प्रौढ़ अपने आपको ठंड से बचाने के लिए झुंड में रहते हैं तथा गर्मियों व बरसात में काफी सक्रिय हो जाते हैं।

नियंत्रण : फल मक्खी से ग्रसित फलों को मिट्टी में अच्छे ढंग से दबा दें। क्योंकि फल मक्खी बरसात में उगाई जाने वाली सब्जियों को अधिक नुकसान पहुंचाती हैं। अतः सब्जियों की रोपाई का समय ऐसा रखें कि बरसात से पहले-पहले सब्जियों में फल लग जाएं। अगर कम जगह में सब्जियां लगी हों तो उन सब्जियों के फलों को अखबार के कागज से ढककर भी बचाया जा सकता है। जून-जुलाई में जब कीट के प्रौढ़ फसल पर या उसके आसपास दिखाई दें तो इन्हें आकर्षित करने हेतु व इनको मारने के लिए निम्नलिखित घोल का छिड़काव करें।

गुंड : 50 ग्राम, मैलाथीन : 10 मिली, पानी : पांच लीटर यह छिड़काव 10-12 दिनों के बाद दोहराया जा सकता है। इससे इस नाशी कीट की संख्या को काफी कम किया जा सकता है तथा नुकसान से बचा जा सकता है।

डा. केसी शर्मा, डा. आरएस राणा,डा. अनिल सूद

सौजन्यः डा. राकेश गुप्ता, छात्र कल्याण अधिकारी, डा. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय,सोलन

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