Saturday, November 27, 2021 10:57 PM

कृषि हेल्पलाइन

कीड़ों से ऐसे बचाएं टमाटर की फसल

हिमाचल में उगाई जाने वाली सब्जियों में टमाटर का प्रमुख स्थान है। पूरे प्रदेश में पोलीहाउस अथवा खुले में टमाटर सफलतापूर्वक उगाया जाता है। पौधारोपण से लेकर तुड़ाई तक टमाटर की फसल को कई प्रकार के कीट नुकसान पहुंचाते हैं, जिनमें कटु कीड़ा, फल छेदक, सफेद मक्खी, फल मक्खी माइट आदि प्रमुख हैं, लेकिन जुलाई मास में इस फसल पर खुले खेत तथा पोलीहाउस में तीन-चार प्रमुख कीड़े और माइट हानि पहुंचाते हैं। इनमें पोलीहाउस और खुले में उगने वाली फसल को सफेद मक्खी, फल मक्खी और माइट अत्यधिक नुकसान पहुंचाते हैं।

सफेद मक्खी के प्रौढ़ बहुत छोटे व सफेद होते हैं व पत्तों के नीचे छिपे रहते हैं। यह मक्खी पत्तों पर अंडे देती है, जिनसे निम्फ (शिशु) निकलकर पत्तों से रस चूसते हैं। ये शहदनुमा पदार्थ भी छोड़ते हैं। जिन पर काफी फफूंद लग जाती है तथा पौधे की प्रकाश संश्लेषण क्रिया पर असर पड़ता है। कीट की रोकथाम के लिए पीले रंग के चिपचिपे (प्रति 20 वर्ग मीटर में, ट्रैप की दर से सामूहिक ट्रैपिंग के लिए) तथा पोलीहाउस में 100 वर्ग मीटर में, ट्रैप की दर से (कीट की निगरानी लिए) बाहर खेतों में लगाए जा सकते हैं, ताकि मक्खी की संख्या का पता लग सके। इसके अलावा सफेद मक्खी को इमिडाक्लोप्रिड 178 प्रतिशत एसएल (पांच मिलीलीटर 110 लीटर पानी) या आक्सीडेमेटॉन मिथाइल 30 ईसी (10 मिली लीटर प्रति 10 लीटर पानी) के छिड़काव से नियंत्रित कर सकते हैं।

माइट के शिशु वयस्क पत्तों से रस चूसते हैं, जिससे पत्तों का हरा रंग फीका पड़ जाता है और हल्के पीले रंग के धब्बे पड़ जाते हैं। यह जीव गर्म व शुष्क वातावरण में अधिक फैलता है। अतः इसकी संख्या को कम करने के लिए स्प्रिंकलर द्वारा पानी का छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा फिनाजाक्विन 10 ईसी (25 मिलीलीटर प्रति 100 लीटर पानी) के द्वारा भी माइट की रोकथाम की जा सकती है। इसके अतिरिक्त 50-60 नीम के बीज को पीसकर पानी में घोल कर फसल पर छिड़कें। खुले में उगने वाली फसल में फल मक्खी का काफी प्रकोप होता है। इस मक्खी के प्रौढ़ टमाटर के गूंदे में अंडे देते हैं, जिनसे सुंडियां निकलकर गूंदे को खाने लगती हैं। इस कीट का नियंत्रण काफी जटिल है फिर भी कुछ उपायों से इनको नियंत्रित किया जा सकता है।

  1. गले सड़े टमाटरों को खुले में न फेंके, क्योंकि इन पर फल मक्खी अंडे देती है और इनकी संख्या बढ़ जाती है।
  2. फसल में निरंतर गुड़ाई करते रहने से मिट्टी में इनकी संख्या को कम किया जा सकता है।
  3. जुलाई-अगस्त में प्रौढ़ फल मक्खी की संख्या को कम करने के लिए फसल पर पांच लीटर पानी में 10 मिलीलीटर मैलाथियॉन और 50 ग्राम गुड़ का घोल बनाकर छिड़काव करें।

सौजन्यः डा. राकेश गुप्ता, छात्र कल्याण अधिकारी, डा. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय,सोलन

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