Tuesday, November 30, 2021 08:00 AM

कृषि हेल्पलाइन

पहाड़ी क्षेत्रों में दक्षिणी ढलान पर बनाएं पोलीहाउस

पोलीहाउस में सूक्ष्म जलवायु नियंत्रित किए जा सकने के कारण पौधों को किसी भी स्थान पर वर्ष भर किसी भी समय उगाया जा सकता है तथा सूक्ष्म जलवायु नियंत्रण से उत्तम क्वालिटी की पैदावार होती है।

स्थान का चुनाव : पोलीहाउस स्थापित करने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है। अतः प्रस्तावित स्थान बिजली की लाइनों के पास हो तो बिजली की सप्लाई लेने में लागत कम आती है। प्रस्तावित स्थान पर पानी का निकास भी उचित होना चाहिए ताकि वर्षा का पानी इधर-उधर से पोलीहाउस की तरफ न आए। साथ ही पोलीहाउस का स्थान यातायात सुविधा से भी जुड़ा हो ताकि मंडी में पैदावार भेजने में सुविधा हो। इसके करीब साफ पानी भी उपलब्ध होना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्र में इसे दक्षिणी ढलान पर बनाना चाहिए ताकि अधिक धूप का फायदा उठाया जा सके।

पोलीहाउस निर्माण : पोलीहाउस का ढांचा काफी मजबूत होना चाहिए जो कि 100 किलोमीटर प्रति घंटा वायु की गति को भी सहन कर ले। प्रस्तावित स्थल पर अधिक लंबाई वाली और जहां तक हो सके पूर्व पश्चिम दिशा में निश्चित आयत को चिन्हित किया जाता है। उदाहरण के तौर पर चार मीटर गुना 24 मीटर पोलीहाउस इसी परिणाम की आयत चिन्हित करनी होगी। अंतिम चिन्ह लगाने से पहले यह देखना अवश्यक है कि आयत के दोनों विकर्ण बराबर हों। आयत के चारों कोणों पर बिंदु चिन्हित करें। आयत की लंबी भुजा पर चलते हुए एक कोने से शुरू करके एक या एक दशमलव दो मीटर के अंतर पर निशान लगाते हुए दूसरे कोने पर पहुंचें। इसी प्रकार दूसरी लंबी भुजा पर भी निशान लगाएं। पोली पकड़ प्रणाली में रस्से से जुड़े हुए 24 मीटर लंबाई के पोलीपकड़ भागों को बनाइए। पोलीपकड़ प्रणाली को 20 गेज की चद्दर से बनाते हैं। 14 सेंटीमीटर छोटी इस्पात की चदर को नाली की आकृति (3.5 सेंटीमीटर गुना सात सेंटीमीटर) में मोड़ दिया जाता है और चार सेंटीमीटर का मध्य से 90 डिग्री कोण पर मोड़ दिया जाता है। नरम इस्पात की छह मिलीमीटर गैस की छड़ से 56 मिलीमीटर लंबे टुकड़े काट कर इनके सिरों को रेती से गोल कर दिया जाता है। पोलीपकड़ प्रणाली में इन छड़ों को 50 सेंटीमीटर दूरी पर लगाते हैं। यदि पोलीहाउस को सामान्य ढंग से हवादार रखना हो तो आधार पाइपों की लंबाई 1-5 मीटर रखें तथा भू स्थल से 60 सेंटीमीटर के अंतर पर पांच सेंटीमीटर गुणा 25 सेंटीमीटर की पट्टियों को आधार पाइपों से छह मिलीमीटर व्यास के बोल्टों से जोड़ें। लकड़ी के ढांचे के लिए 50 गुना 50 मिलीमीटर के लकड़ी के पट्टों का प्रयोग करें तथा इस्पात के ढांचे के लिए 25 मिलीमीटर गुना 25 मिलीमीटर की इस्पात की नलिका का प्रयोग करें। पुरानी पत्तियां सिरे से पीली होना शुरू हो जाती हैं। पत्तियों के सिरे अंदर की ओर मुड़ने लगते हैं। मृत पत्तियां मध्यशिरा के नीचे से टूटने लगती हैं। सभी एक वर्षीय फसलों में पोटाशियम उर्वरकों की पूरी मात्रा आधारीय रूप से या रोपण के समय डाल देनी चाहिए, क्योंकि पौधों की बढ़ोतरी की प्रारंभिक अवस्था में पोटाशियम की अधिक आवश्यकता होती है। बहुवर्षीय फसलों हेतु जैसे फलदार पेड़ों में इसे पौधों की आवश्यकता के अनुरूप डालना चाहिए, ताकि पौधों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़े व फल गुणकारी हो।

डा. जितेंद्र चौहान व डा. उदय शर्मा

सौजन्यः डा. राकेश गुप्ता, छात्र कल्याण अधिकारी, डा. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय,सोलन

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