Saturday, November 27, 2021 11:38 PM

कृषि हेल्पलाइन

 पोटाशियम की कमी से मुड़ते हैं पत्ते

पौधों के लिए पोटाशियम एक आवश्यक पोषक तत्त्व है। यह नाइट्रोजन और फासफोरस के बाद मुख्य तीन पोषक तत्त्वों में से एक है। पौधों में पोटाशियम के विभिन्न कार्य हैं :-

*  यह प्रोटीन संश्लेषण के लिए आवश्यक है।

*  यह कार्बोहाइड्रेटस के टूटने के लिए आवश्यक है ‘जिससे पोधों की बढ़ोतरी के लिए ऊर्जा मिलती है।’

*  यह तत्त्वों का आपसी संतुलन बनाने में सहायक होता है।

*  भारी तत्त्वों जैसे लोहा के सचरण में यह महत्त्वपूर्ण है।

*  पोटाशियम पौधों को बीमारियों के प्रकोप से बचाता है।

*  यह फलों के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

*  इसके प्रयोग से ठंड और पाले के कारण उत्पन्न कठोरपन में भी सुधार होता है।

*  यह 60 से अधिक एन्जाइमों की क्रियाशीलता में सहायक होता है।

*  पोटाशियम से पौधों की प्राकृतिक प्रतिशोधक क्षमता मजबूत होती है।

फसलों में पोटाशियम की कमी से कई प्रकार के लक्षण उत्पन्न होते हैं। फलदार वृक्षों में पीली-हरी प्रतियां किनारों से ऊपर की ओर मुड़ जाती हैं। पत्तियां किनारों से जल जाती हैं। पत्ते हरे नीले रंग के किनारों पर फीके रंग के बाद में किनारों पर भूरे रंग के साथ झुलसे हुए धब्बे प्रमुख लक्षण हैं। शुरू में फूल अधिक आते हैं, मगर पैदावार में काफी कमी आ जाती है। फल छोटे रह जाते हैं तथा पकने से पहले ही गिर जाते हैं। फल भंडारण संरक्षण और स्वाद में कम गुणवत्ता के रह जाते हैं। आलू में ऊपर की पत्तियां प्रायः छोटी रह जाती हैं तथा दानेदार तथा सामान्य से ज्यादा गाढ़े रंग की हो जाती हैं। पत्तियों की नोकों के उत्तक मर जाते हैं। पुरानी पत्तियों पर शिराओं के मध्य हरेपन की कमी हो जाती है। धान में पौधे की बढ़ोतरी कम होती है, पत्तियां सामान्य से ज्यादा गाढ़े रंग की हो जाती हैं। जड़ें बदरंग होकर सड़ जाती हैं। सोयाबीन में पत्तियां बाहरी किनारों से जलने लगी हैं। किनारे टूटने लगते हैं। अंततः पत्ती मृत हो जाती है। बीज सिकुड़े हुए तथा विभिन्न आकारों में विकसित होते हैं।

गेहूं के पौधे छोटे तथा मुरझाए हुए दिखाई देते हैं। पुरानी पत्तियों के उत्तक मर जाते हैं तथा किनारे और सिरे पर हरापन कम हो जाता है। अल्फा-अल्फा में पत्तियों के बाहरी किनारों पर छोटे सफेद तथा पीले धब्बे बन जाते हैं। पत्ती पीले रंग की हो जाती है तथा इसके उत्तक मर जाते हैं। केले की पत्तियां छोटी रह जाती हैं।

सौजन्यः डा. राकेश गुप्ता, छात्र कल्याण अधिकारी, डा. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय,सोलन

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