Saturday, November 27, 2021 10:13 PM

कृषि हेल्पलाइन

कीटों से बचाव को पहले से करें तैयारी

पौधों को हानिकारक कीटों, रोगों तथा दूसरे शत्रुओं से बचाने के लिए पौध संरक्षण दवाओं का प्रयोग एक आवश्यकता बन चुका है। किसान को अपनी फसल के गुण और उत्पाद में वृद्धि के लिए जब तक इनका छिड़काव करना पड़ता है, तथापि किसी कीट या रोग के विषय में पूर्व निर्धारण करना कठिन है। किसान समय पूर्व ही दवाओं के छिड़काव की तमाम तैयारी कर लें। अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए जरूरी है- दवाओं का उचित समय पर प्रयोग। यह कीट या रोग की मात्रा का मौसम पर निर्भर करता है। हवा और वर्षा इसके प्रयोग में विशेष भूमिका निभाते हैं। हवा से जहां पौधों पर दवा का अव्यवस्थित फैलाव होता है, वहीं दवा अपने निर्धारित स्थान से इधर-उधर भी फैलती है। वर्षा के समय और जब तक पौधों पर गीलापन रहता है, दवा का प्रयोग नहीं किया जा सकता। बहुत सी दवाओं का प्रयोग, फसल में पौधा उगाने से लेकर अनिश्चितकाल तक चलता ही रहता है। कीटों, सूत्र कृमियों तथा मिट्टी में पैदा होने वाले रोगों से छुटकारा पाने के लिए बीज बोने से पहले दवा का प्रयोग लाभकारी होता है। सभी कीटों या रोगों के नियंत्रण की योजना काफी समय पहले बना लेनी चाहिए।

आजकल उपलब्ध दवाएं क्षमता व प्रयोग में प्रायः निर्दिष्ट होती हैं। अनुभव के आधार पर आवश्यक दवाओं को पहले ही खरीद कर संग्रहण कर लेना चाहिए। भंडारण के समय उनकी क्षमता घट सकती है। तरल दवाएं प्रयोग केकाबिल नहीं रहतीं। अतः किसी भी दवा की इतनी मात्रा खरीदें, जो कि एक मौसम में समाप्त हो जाए।

यदि कोई दवा अधिक मात्रा की पैकिंग में उपलब्ध हो तो दो या तीन किसान मिलकर खरीद सकते हैं। साथ ही दवाओं का संग्रह इस तरह करें कि वे नमी, हवा, सूर्य की रोशनी तथा ऊंचे तापमान से प्रभावित न हों। इससे भी दवाओं की क्षमता पर विपरीत असर पड़ता है तथा उनकी रासायनिक क्रिया में परिवर्तन आ सकता है। पैराथियॉन, डाइक्लोरवॉस, मैविनफॉस आदि अधिक समय तक प्रभावशाली नहीं रहतीं। छिड़काव से पूर्व दवाओं में पानी मिलाकर लंबे समय तक रखने पर उनका असर कम हो जाता है। अतः छिड़काव के लिए हर बार ताजा घोल बनाएं। कई बार एक से अधिक प्रकार के कीटों या रोगों को नियंत्रित करने के लिए सामूहिक छिड़काव किया जा सकता है। इससे समय और धन की बचत होगी, परंतु रासायनिक रचना में अंतर होने के कारण दवाओं का मिश्रण हमेशा सुरक्षात्मक नहीं होता। इसके लिए दवाओं की संगति के विषय में जानकारी होना आवश्यक है।

रसायनों की असंगति से कई बार ऐसी रासायनिक क्रिया हो सकती है, जिससे नए मिश्रण बन सकते हैं या दवाओं का अलगाव अथवा अधःपतन हो सकता है। इन क्रियाओं से अंततः एक या दोनों रसायनों के प्रभाव में कभी, अधःपतन के कारण या जल बंद पौधों को जख्म या अधिक बहाव हो सकता है। इसके अतिरिक्त छिड़काव में प्रयोग किए जाने वाले यंत्र की अच्छी तरह जांच-पड़ताल कर लेनी चाहिए, जो छोटे भाग अकसर बदलने पड़ते हों, उन्हें खरीद कर रख लेना चाहिए। इससे छिड़काव के समय होने वाली असुविधाओं से छुटकारा मिलता है। यह भी जांचना जरूरी है कि यंत्र दवा की उचित मात्रा छिड़कता है। कम मात्रा जहां बेअसर सिद्ध हो सकती है। उच्च मात्रा पौधे को हानि पहुंचाती है, इसलिए छिड़काव का संतुलन जरूरी है। कई बार किसान दवा छिड़काव करने के लिए पंप से खरपतवार नियंत्रण दवा का भी छिड़काव करते हैं। खरपतवार नियंत्रण के लिए अलग से पंप रखें।

The post कृषि हेल्पलाइन appeared first on Himachal news - Hindi news - latest Himachal news.