Wednesday, July 08, 2020 01:13 PM

कृषि हेल्पलाइन

प्लास्टिक ट्रे में बिना मिट्टी ऐसे उगाएं सब्जियां

सब्जियों की नर्सरी लगाना एक उपयोगी व्यवसाय के रूप में किसानों के लिए लाभकारी है। ट्रे में नर्सरी उत्पादन द्वारा ऐसी सब्जियां, जिनकी परंपरागत विधि से पौध तैयार करना संभव नहीं, जैसे बेल वाली सब्जियां, उनकी पौध भी तैयार की जा सकती है। यह तकनीक सामान्य तथा संकर किस्म के बीज उत्पादन में बहुत उपयोगी हो सकती है।

इस तकनीक की विशेषता यह है कि किसान कम क्षेत्र में अधिक पौध तैयार कर सकता है। वर्ष में पांच-छह बार पौध तैयार की जा सकती है। बेमौसमी सब्जी तैयार करना संभव है। इस तरह की पौध भू जनित रोगों से मुक्त रहती है तथा किसानों को दवाई पर पैसा नहीं खर्च करना पड़ता। इस तरह के पौधों को ट्रे में एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान होता है।

प्लास्टिक ट्रे तकनीक से पौध को तैयार करने के लिए प्लास्टिक की खानेदार ट्रे का प्रयोग करते हैं। टमाटर, बैंगन व समस्त बेल वाली सब्जियों के लिए 18-20 घन सेंटी मीटर आकार के खानों वाली ट्रे का प्रयोग होता है, जबकि शिमला मिर्च, मिर्च, फूलगोभी, पत्तागोभी, ब्रोकली, सेलरी व पार्सले आदि सब्जियों के लिए आठ-दस घन सेंमी आकार के खानों वाली टे्र उपयुक्त होती है।

इस विधि से तैयार पौध को मिट्टी के बिना उगाया जाता है। मिट्टी की जगह काकोपीट, वर्मीक्यूलाइट व परलाइट 3:1:1 के अनुपात में मिलाया जाता है। इसको पानी से गीला करने के बाद ट्रे में भरा जाता है। इस भरी हुई ट्रे के खानों में अंगुली से गड्डा करके बीज बोया जाता है और  बीज को वर्मीक्यूलाइट की पतली परत से ढक दिया जाता है। इस वर्मीक्यूलाइट में नमी को संजोए रखने की अधिक क्षमता होती है। अंकुरण के लिए सब्जियों के बीजों को 20-250सी तापमान उचित होता है। यदि बाहर का तापमान अंकुरण के लिए उपयुक्त है, तो ट्रेज को बाहर रखा जा सकता है। यदि तापमान 10-150 कम है तो अस्थायी अंकुरण कक्ष में ट्रेज को रखा जा सकता है।

अंकुरण के एक सप्ताह बाद सिंचाई जल के साथ आवश्यक मात्रा में नाइट्रोजन, फासफोरस एवं पोटाशियम डाला जाता है। बाजार में 20:20:20 या 19:19ः19 या 15:15:15 के विभिन्न अनुपातों में ये पोषक तत्त्व मिल जाते हैं। ये पोषक तत्त्व ड्रिप सिंचाई से 70-80 पीपीएम की मात्रा से डाले जा सकते हैं। अथवा सामान्य सिंचाई से भी यह घोल ट्रे में डाला जाता है। पौध तैयार होने पर इसे आराम से ट्रे से निकाला जा सकता है। गर्मी के मौसम में रोपाई से पहले कीट नाशक का छिड़काव लाभदायक है। रोपाई का काम सुबह या धूप ढलने के पश्चात ही करें। ऐसी पौध 25-30 दिनों में तैयार हो जाती है तथा इस विधि से किसान अच्छी आमदनी पा सकता है।                     -माणिक तोमर

सौजन्यः डा. राकेश गुप्ता, छात्र कल्याण अधिकारी, डा. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन