केलंग बजीर का प्रसिद्ध मंदिर

भगवान शिव शंकर के ज्येष्ठ पुत्र केलंग बजीर देवभूमि हिमाचल प्रदेश में गद्दी समुदाय सहित कांगड़ा-चंबा और लाहौल-स्पीति के लोगों के ईष्ट देवता हैं। हिमाचल में जिला चंबा के भरमौर कुगती में केलंग बजीर और मुराली का प्रसिद्ध ऐतिहासिक मंदिर है। इसके बाद अब जिला कांगड़ा के धर्मशाला से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित खनियारा के थातरी गांव में केलंग बजीर व मुराली का प्रसिद्ध मंदिर है, जो समस्त समुदाय सहित बाहरी राज्यों के धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। केलंग बजीर को दक्षिण भारत में कार्तिक स्वामी, मुरुगन, दंडपानी, कुमारहण और श्रीसुब्रह्मण्यम  के नाम से पूजा जाता है। ऐसे में देश भर सहित विदेशों में भी कार्तिक स्वामी के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, साथ ही खनियारा थातरी में अब मंदिर देवभूमि की शोभा बढ़ा रहा है। युद्ध के देवता माने जाने वाले केलंग बजीर का जन्म ताड़कासुर राक्षस का वध करने के लिए हुआ था। देवभूमि हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में चंबा व लाहौल-स्पीति की हिमालय पर्वत माला में शिव शंकर की विश्व प्रसिद्ध झील मणिमहेश के साथ ही कार्तिक स्वामी का भी वास है। भरमौर के कुगती में मुख्य मंदिर में केलंग बजीर विराजमान है, जहां पर  बड़ी संख्या में भक्तजण पहुंचकर विशेषकर बरसात के काले माह में लाण भी लगाते हैं। इतना ही नहीं कुगती गांव में आज तक मुर्गा न खाया जाता है और न ही पाला जाता है, मुर्गा देवता के झंडे में विराजमान है, जबकि मोर उनका वाहन है। प्रदेश में अन्य स्थानों पर कुल्लू, मनाली और लाहौल-स्पीति में भी मंदिर बने हुए हैं। वहीं दक्षिण भारत में भी केलंग ने अधिक समय बिताया है, जहां वह अपने पिता शिव और माता पार्वती से नाराज होकर चले गए थे। जिससे उन्हें वहां पर कार्तिक स्वामी के नाम से पूजा जाता है। वहीं पर केलंग बजीर ने शुरपदमण राक्षस को भी हराया था। हर वर्ष देवता का जन्मदिवस सात-आठ दिनों के पूजा-पाठ के साथ मई और जून माह में मनाया जाता है। कार्तिक स्वामी के प्रसिद्ध मंदिर श्रीलंका, मोरिशियस, सिंगापुर, मलेशिया, कर्नाटक व आंध्रप्रदेश में भी हैं। 

थातरी में सात साल पहले स्थापित हुआ मंदिर

देवभूमि के सबसे बड़े जिला कांगड़ा के मुख्यालय धर्मशाला से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर खनियारा के थातरी गांव में प्रसिद्ध केलंग बजीर व मुराली माता का मंदिर सात वर्ष पहले विधि-विधान के साथ स्थापित किया गया था। मंदिर के पूजारी अजीत कुमार थथरैल ने बताया कि कुगती से केलंग स्वामी के गूर और वजयंतरी अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रो के साथ पहुंचे थे। इसके बाद मतड़ा नाग मंदिर के लिए प्रसिद्ध थातरी में केलंग स्वामी का मंदिर बसाने से पहले दोनों देवता के गूर ने खेलपात्र भी किया, जिसमें विवाद भी देखने को मिला। हालांकि फिर दोनों देवता की सहमति पर थातरी में केलंग बजीर का मंदिर बसाया गया। उन्होंने बताया कि मंदिर को काष्ठकुणी शैली में खूबसूरती से निर्माण किया गया है। श्री थथरैल ने बताया कि मंदिर में हर वर्ष कार्तिक स्वामी के जन्मदिवस पर जागरण व भंडारे का आयोजन किया जाता है। इतना ही नहीं अब चंबा भरमौर कुगती न पहुंचने वाले गद्दी समुदाय के भक्तजण थातरी में भी काले माह में पहुंचकर लाण लगा सकते हैं। जिला सहित प्रदेश भर से श्रद्धालु धर्मशाला थातरी गांव में आराम से सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं, जहां पर श्रद्धालुओं को रहने व खाने की भी उचित व्यवस्था गांववासियों द्वारा की जाती है।

थातरी में ये मंदिर भी मुख्य आकर्षण 

थातरी में केलगं बजीर मंदिर के अलावा प्रसिद्ध ऐतिहासिक मतड़ा नाग मंदिर, गलू माता मंदिर, भतकोलू माता मंदिर, ज्वाला माता मंदिर और टिल्ले वाली माता मंदिर प्रमुख है।