Tuesday, June 02, 2020 11:58 AM

कोरोना मौत पर अंत्येष्टि से न डरें

देवेंद्र शर्मा

एमएस, नेरचौक अस्पताल

यदि कोरोना संक्रमण से किसी व्यक्ति की उपचार के दौरान मृत्यु हो जाती है तो स्वास्थ्य कर्मी आइसोलेशन वार्ड से मृतक की बॉडी को पीपीई किट, मास्क, ग्लब्ज, गम बूट, फेस कवर शिल्ड, गाग्लस का इस्तेमाल करते हुए सर्वप्रथम पार्थिव शरीर को डिसइनफेक्ट करने का कार्य करते हैं। पश्चात उसके सोडियम हाइपोक्लोराइट सलूशन से बॉडी व आसपास के क्षेत्र को पूरी तरह से सेनेटाइज करने के उपरांत पार्थिव शरीर को शव गृह में पहुंचा दिया जाता है, जहां पर पार्थिव शरीर को मल्टी लेयर वाटर प्रूफ  बैग में बंद कर रख दिया जाता है, जिससे कि बॉडी से किसी भी प्रकार के संक्रमण फैलने की संभावना पूर्णतः खत्म हो जाती है...

वैश्विक कोविड-19 वायरस से मौत होने पर व्यक्ति के दाह संस्कार को लेकर जो लोगों के मन में भय व्याप्त है, उसे दूर करने के लिए भारत सरकार के निर्देशानुसार नेशनल हैल्थ मिशन द्वारा एक गाइडलाइंस तैयार कर देश एवं प्रदेश के सभी अस्पतालों को भेजी गई है। गाइडलाइंस के मुताबिक नियमों की अनुपालना करने पर कोरोना संक्रमण से मृत हुए व्यक्ति के परिजन अपने-अपने रीति-रिवाज के अनुसार दाह संस्कार अपने गांव में पंचायत प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कर सकते हैं। कोविड-19 वायरस एक ऐसा फ्लू है जिसमें कि व्यक्ति विशेष को बुखार, खांसी, जुकाम, सांस फूलने जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। यदि यह लक्षण किसी व्यक्ति में दिखाई या अनुभव होने लगते हैं तथा उसकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो तो वह इस घातक संक्रमण का शिकार हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति के ड्रॉपलेट्स व उसके शारीरिक संपर्क व वस्तु विशेष के संपर्क में आने पर अन्य व्यक्ति में यह वायरस प्रवेश कर सकता है। कोरोना संक्रमण से बचने हेतु व्यक्ति को फिजिकल डिस्टेंस, हर आधे घंटे बाद साबुन से हाथ धोना, मास्क पहनना तथा सेनेटाइजर का प्रयोग करना अति आवश्यक है। यदि लोग इन सभी सावधानियों को अपने जीवन व्यवहार में ढाल लेते हैं तो कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।

इसलिए बार-बार निर्देश दिए जा रहे हैं कि हमें बीमारी से लड़ना है, अपितु बीमार से नहीं। यदि कोरोना संक्रमण से किसी व्यक्ति की उपचार के दौरान मृत्यु हो जाती है तो स्वास्थ्य कर्मी आइसोलेशन वार्ड से मृतक की बॉडी को पीपीई किट, मास्क, ग्लब्ज, गम बूट, फेस कवर शील्ड, गाग्लस का इस्तेमाल करते हुए सर्वप्रथम पार्थिव शरीर को डिसइनफेक्ट करने का कार्य करते हैं। इसके पश्चात सोडियम हाइपोक्लोराइट सलूशन से बॉडी व आसपास के क्षेत्र को पूरी तरह से सेनेटाइज करने के उपरांत पार्थिव शरीर को शव गृह में पहुंचा दिया जाता है, जहां पर पार्थिव शरीर को मल्टी लेयर वाटर प्रूफ  बैग में बंद कर रख दिया जाता है, जिससे कि बॉडी से किसी भी प्रकार के संक्रमण फैलने की संभावना पूर्णतः खत्म हो जाती है। इसलिए जिस किसी की भी कोरोना संक्रमण से मृत्यु हो जाती है, उस परिवार को घृणा की दृष्टि से न देखा जाए, अपितु दुख की घड़ी में उनका सहारा बन उनकी हरसंभव मदद करने का प्रयास करें। कोरोना मृतक पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम प्रक्रिया को अकसर अवॉइड किया जाता है, क्योंकि पोस्टमार्टम करने के दौरान चिकित्सकों की टीम के संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है। मृतक के परिवार वालों की मौजूदगी में ही प्रशासन अंतिम संस्कार करने का प्रयास करता है। यदि परिवार के सदस्य दाह संस्कार की रस्म को निभाने को लेकर अपनी असहमति जताते हैं, तभी दाह संस्कार की रस्म को विभागीय कर्मचारी अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी,  स्वयंसेवियों के सहयोग से मृतक का दाह संस्कार उनके धर्मानुसार करते हैं। शव गृह से श्मशानघाट तक के क्षेत्र को जहां से पार्थिव शरीर को एंबुलेंस के माध्यम से पहुंचाया जाता है, पूरे क्षेत्र को सेनेटाइज करने की कोई आवश्यकता नहीं होती। मात्र शव गृह तथा श्मशानघाट के आसपास के क्षेत्र को ही सेनेटाइज करना आवश्यक होता है। अंतिम संस्कार के समय यदि मृतक के परिवार वालों को उनकी इच्छा हो तो चेहरा दिखाया जाता है, बशर्ते परिवार वाले पार्थिव शरीर बॉडी को छुए या उससे लिपटें नहीं। कोविड-19 से मृत होने वाले व्यक्ति का दाह संस्कार परिवार वाले अपने गांव के श्मशानघाट में कर सकते हैं। नेशनल हैल्थ मिशन की गाइडलाइंस के मुताबिक शव को पूरी तरह से डिसइनफेक्ट कर दिया जाता है तथा नियमों और सावधानियों का पालन करते हुए मृतक का दाह संस्कार किया जाता है। लोगों को किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती। अभी तक वायरस से बचाव के लिए कोई वैक्सीन नहीं ईजाद हो पाई है। इस महामारी से बचाव के लिए बनाए गए नियमों का यदि लोग गंभीरता से पालन करते हैं तो कोरोना उनके शरीर को इनफेक्ट नहीं कर सकता। कोरोना वायरस से उत्पन्न खतरे को लेकर जागरूकता की कमी के कारण लोग पैनिक हो रहे हैं, लेकिन लोगों को इस बीमारी से किसी भी प्रकार के घबराने की आवश्यकता नहीं है। सिर्फ सूझबूझ का परिचय देते हुए बचाव में बरती जाने वाली सावधानियों की अनुपालना करने से व्यक्ति अपने आप को बचा सकता है, इसलिए बीमारी से लडें़, अपितु बीमार से नहीं। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इस महामारी की अभी कोई दवा अथवा वैक्सीन नहीं बन पाई है। अतः परहेज ही इस महामारी का बड़ा इलाज है। लोग जब बाहर निकलते हैं तो उन्हें मास्क जरूर पहनना चाहिए। जहां पर लोगों की भीड़ हो, वहां जाने से बचना चाहिए। दूसरे लोगों से दो गज की दूरी बना कर रखनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति जुकाम, खांसी अथवा बुखार से पीडि़त है, तो उस व्यक्ति से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। लोगों को अपने हाथ बार-बार साबुन अथवा सेनेटाइजर से साफ करने चाहिए। जिस घर में किसी व्यक्ति की कोरोना से मौत हुई हो, उस घर के लोगों के प्रति घृणा का भाव नहीं होना चाहिए, बल्कि उनकी मदद की जानी चाहिए। ऐसा किसी के भी साथ हो सकता है, अतः जानकारी के अभाव में ऐसा घृणा भाव अपनाना किसी भी तरह तर्कसंगत नहीं है। लोगों को सरकार व प्रशासन की ओर से जारी किए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन करना चाहिए और यह समझना होगा कि ऐसे निर्देश लोगों के महामारी से बचाव के लिए ही जारी किए गए हैं। आशा की जानी चाहिए कि आम लोग इस महामारी के प्रति जागरूक होंगे और जल्द ही इस महामारी से हमें छुटकारा मिल जाएगा।