Monday, April 06, 2020 05:29 PM

कोरोना…220 लोग आईसोलेशन में

कांगड़ा के निजी अस्पताल में तिब्बती की मौत के बाद पूरा स्टाफ स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में, क्षेत्र में दहशत का माहौल

कांगड़ा-सोमवार को कोरोना संक्रमित मृत्यु और उसकी गलती ने कांगड़ा के साथ-साथ पूरे प्रदेश के लोगों को मुश्किल में डाल दिया है। उक्त व्यक्ति द्वारा सरकार को अपनी जानकारी न देन बाद जिस तरह से उसे कांगड़ा में लाया गया। उसके बाद भले ही कांगड़ा के लोग कोरोना डर से अपने घरों में कैद है, लेकिन सरकारी आदेशों का पालन न करके सोमवार को काल का ग्रास बने तिब्बती मूल के टेंजिन छुड़ेन ने जो जानकरी छिपाई और उसकी मृत्यु यहां हुई । उसके बाद हर कोई सहमा हुआ है।  तिब्बती द्वारा अपनी ट्रेवल हिस्ट्री सभी से छिपा कर रखना ओर अंतिम स्टेज पर कांगड़ा के एक निजी अस्पताल में आना, जिसका नतीजा यह हुआ कि  जिला के एक बड़े अस्पताल के पूरे स्टाफ को आईसोलेशन में रखना पड़ गया है।  कांगड़ा के निजी अस्पताल के डाक्टरों व अन्य स्टाफ  सहित यहां आए मरीज व उनके सहयोगियों को मिलाकर करीब 220 लोगों को आईसोलेशन  पर रखा गया है। इसमें से स्टाफ  और कुछ डाक्टरों को अस्पताल में ही रखा गया है, जबकि मरीजों के साथ आए तीमारदारों व कुछ अन्य डाक्टरों को अस्पताल के साथ ही सूद सराय में आईसोलेशन पर रखा गया है। मकलोडगंज के तिब्बती मूल के व्यक्ति की कोरोना वायरस के चलते मौत के बाद एहतियातन रूप से यह कदम उठाया गया है। आईसोलेशन में रखे गए इन तमाम लोगों को दो वक्त का भोजन उपलब्ध करवाने के लिए कांगड़ा की दो स्वयंसेवी संस्थाओं ने प्रशासन को सहयोग देने के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाए हैं,  जिनमें दिन के समय कांगड़ा के स्थानीय निवासी मयूर कांत शर्मा व सायंकालीन भोजन धेनुम आश्रय सदनम ट्रस्ट द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा।  बता दें कि अमरीका से लौटे तिब्बती मूल के 69 वर्षीय बुजुर्ग को लेकर उसका बेटा अस्पताल पहुंचा था। पर्ची कटवाते समय बुजुर्ग की विदेश ट्रैवलिंग हिस्ट्री के बारे में नहीं बताया। जब अस्पताल के सीएमडी ने मरीज को चैक किया, तो उन्हें मरीज के कोरोना वायरस से संक्रमित होने का अंदेशा हुआ। मरीज को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, उन्होंने तुरंत इसकी सूचना टांडा प्रशासन को दी। इसके बाद से ही बिना किसी प्रशासनिक आदेशों के डाक्टर ने खुद और मरीज के संपर्क में आए स्टाफ  को आईसोलेशन में रखा। साथ ही अस्पताल का गेट बंद करवा दिया। किसी को भी अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। उल्लेखनीय है कि अस्पताल के स्टाफ  सहित मरीजों के साथ आए लोगों करीब 220 लोगों को 28 दिन के आईसोलेशन पर रखा गया है। स्टाफ  के जो सात लोग व्यक्ति के सीधे संपर्क में आए हैं उन्हें पूरी तरह से आइसोलेशन में रखा गया है। उन्हें 28 दिन किसी प्रकार की मूवमेंट नहीं होगी। साथ ही एक दवाई खानी पड़ेगी। वहीं, दिल्ली से जिस टैक्सी में व्यक्ति मकलोडगंज आया था उस टैक्सी चालक की भी पहचान कर ली गई है। उसे और उसके परिवार को आईसोलेशन पर रखा गया है।