Saturday, July 20, 2019 11:15 PM

क्षमता से कितना बाहर सोलन

कुछ दशक पहले सोलन के एक किलोमीटर में 174 लोग रहते थे,यह आंकड़ा अब भले ही  300 तक पहुंच गया हो, लेकिन सड़कें और पार्किंग अब भी वहीं हैं। कसौली और चायल को छोड़ दें, तो कोई नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन नहीं बना है। नतीजतन, अब पर्यटक भी सोलन से मुंह मोड़ने लगे हैं। अगर यही हाल रहा, तो वे दिन दूर नहीं, जब क्षमता से अधिक बोझ ढो रहे शहर को बेहाल होते देर न लगेगी। शहर की हालत को दखल के जरिए बता रहे हैं...          — सुरेंद्र ममटा

विदेश में मशरूम सीटी व लाल सोने के नाम से विख्यात सोलन विकासशील शहरों की दौड़ में सबसे आगे हैं। इसमें कोई दोराय नहीं है कि जिस तरह शहर बढ़ता जा रहा है उस लिहाज से आगामी कुछ वर्षों में प्रदेश का सबसे बड़ा शहर बन सकता है। वर्ष 1971 की जनसंख्या के आधार पर सोलन का घनत्व 174 प्रति व्यक्ति वर्ग किलोमीटर था, जो कि वर्ष 2011 में बढ़कर 300 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर हो गया। मौजूदा समय में इसमें और इजाफा होने की प्रबल संभावना है। शहर के बुद्विजीवियों की मानें तो सोलन शहर वर्ष 2000 के बाद बड़ी तेजी से बढ़ा है। सच्चाई यह है कि शहर विकास की ओर तो अग्रसर हुआ, लेकिन सरकार एवं प्रशासन की दूरगामी सोच न होने के कारण अधोसंरचना में बेहद खामियां रह गई। इन खामियों का आज लोगों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।  मौजूदा समय में शहर 4 से 5 किमी की परिधि में कंकरीट के जंगल में तबदील हो गया है,  जहां जिसे स्थान मिला, वहीं उसी ने अपना बहुमंजिला भवन खड़ा कर दिया।  शहर में 80 फीसदी भवन ऐसे हैं, जिन्हें नियमों को ताक पर रखकर बनाया गया है। इन बहुमंजिले भवनों में न तो पार्किंग की कोई सुविधा रखी गई है और न ही ग्रीन एरिया के लिए स्थान बनाया गया है।

यही,  नहीं अधिकतर भवनों में सेटबैक तक  नहीं छोड़े गए हैं।  यह बात किसी से भी छिपी नहीं है कि सरकार के खजाने का कुबेर सोलन जिला है,  लेकिन जिस हिसाब से जिला सरकार की झोली भर रहा है, उस हिसाब से जिला मुख्यालय सहित अन्य क्षेत्रों के विकासकार्य पर खर्च नहीं हो पाया है। यह भी कहना गलत नहीं होगा कि  शहर की अधोसंचना में सरकार का नगण्य योगदान है। यदि शहर तेजी से आगे बढ़ा है तो इसमें लोगों का अपना निजी योगदान है।  आज सोलन जिला मुख्यालय ऐसी स्थिति से गुजर रहा है कि यहां न तो पार्किंग की सुविधा है और न ही चौड़ी सड़कें। जिला का एक मात्र क्षेत्रीय अस्पताल सोलन असुविधाओं के लिए लगातार सुर्खियों में रहा है। अस्पताल पर कई बार रैफरल अस्पताल का ठपा भी लग चुका है। एक वर्ष के भीतर सबसे ज्यादा सुर्खियां नगर परिषद ने बटोरी है। अवैध निर्माण कार्य को लेकर हाई कोर्ट को फटकार, पेयजल समस्या, 10 माह में 9 कार्यकारी अधिकारी के तबादलों प्रमुख हैं। 

जिला मुख्यालय की विडंबना यह भी है कि यहां आईपीएच विभाग नगर परिषद को पेयजल मुहैया करवाता है, जबकि पेयजल वितरण का जिम्मा नगर परिषद के पास है। इस सूरत में शहरवासियों को अलग-अलग रेट पर पानी मिलता है। हालांकि यह मुद्दा हर बार हर मंच पर सरकार के समक्ष रखा जाता है, लेकिन इसका समाधान कोई नहीं निकाल पाया। अंधाधुंध निर्माण कार्य का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर सीवरेज की समस्या से लगातार जूझ रहा है। शहर के कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां सैंकड़ों भवन बने हैं, लेकिन सीवरेज की निकासी के लिए मात्र चार इंच की पाइप लगाई गई हैं। ऐसे में सीवरेज समय-समय पर सड़कों पर बहती हुई नजर आती है। कुल मिलाकर सोलन शहर बढ़ती आबादी के हिसाब से विकास की डगर नहीं पकड़ पाया है।

जाम से दो-चार होते हैं सैलानी

रोड कनेक्टिविटी की बात करें तो सोलन प्रदेश का प्रवेश द्वार है, जो भी पर्यटक शिमला एवं उसके आसपास के स्थानों में भ्रमण के लिए आते हैं, उन्हें सर्वप्रथम सोलन से होकर ही गुजरना पड़ता है, लेकिन इन दिनों फोरलेन के निर्माणकार्य के कारण सैलानियों को काफी असुविधा हो रही है। बरसात के दिनों में भू-स्खलन एवं जाम के कारण सैलानियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसके अतिरिक्त रेल से भी सोलन आसानी से पहुंचा जा सकता है। पूरे दिन रेल की आवाजाही रहती है। लिहाजा सोलन शहर से सैलानी लगातार छिटक रहे हैं, जो आने वाले समय के लिए बेहतर संकेत नहीं हैं।

सोलन की शान-पहचान

* लाल सोने की धरती

* देश की पहली मशरूम सिटी

* दुनिया में सबसे ऊंचाई पर स्थित चायल क्रिकेट मैदान

 सबसे ऊंचा जटोली में

* शिव मंदिर

* औद्योगिक क्रांति का अगवा

* सबसे पुरानी सैन्य छावनी

* सोलन ब्रूरी सबसे पुरानी

  • औद्योगिक इकाई

* 1905 में स्थापित पाश्चर संस्थान

* 1913 में बना टीबी सेनिटोरियम

* 1847 में बना सनावर स्कूल

  • 1805 में गोरखा-अंग्रेज युद्ध का साक्षी मलौण किला

* हिंदी भाषा को लागू करने वाली पहली रियासत बघाट

* जीवाश्म की धरती

* देश का दूसरा कारागार संग्रहालय

प्रमुख लंबित मांगे.....

 *  टमाटर बेस्ड प्रोसेसिंग यूनिट 

  •  ट्रांसपोर्ट नगर
  •  नगर निगम का दर्जा
  •  टमाटर का समर्थन मूल्य बढ़ाना 
  •  सोलन में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल एवं ट्रॉमा सेंटर
  •  जिला में ऑडिटोरियम

अवैध निर्माण ने पसारे पांव

सोलन जिला मुख्यालय की बात की जाए तो यहां अंधाधुंध अवैध निर्माण हुआ है। यही कारण है कि बीते एक वर्ष से  सोलन शहर में हुए अवैध निर्माण कार्य पर हाई कोर्ट सख्त हुआ है। जिला प्रशासन सहित नगर परिषद को हाई कोर्ट द्वारा कई बार फटकार लगाई गई। इसके बाद नगर परिषद ने हरकत में आते हुए शहर के माल रोड पर अवैध निर्माण तुड़वाया। इसके बाद नगर परिषद ने हाई कोर्ट के ही आदेशानुसार एक स्टेटस रिपोर्ट तैयार की। इसके बाद नप ने 142 ऐसे बहुमंजिला भवन निर्माण की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की, जिन्होंने किसी न किसी सूरत में अवैध निर्माण को अंजाम दिया है। इनके बाद नगर परिषद ने कई भवन मालिकों के बिजली व पानी के कनेक्शन काटने बारे नोटिस भी प्रेषित किए। वहीं, दूसरी ओर होटलों की बात करे तो होटलों में सर्वाधिक अवैध निर्माण कसौली में हुआ। यहां एनजीटी के दखल के बाद होटलों में हुए अवैध निर्माण को गिराया गया, लेकिन जिला मुख्यालय में बने होटलों पर अब तक ऐसी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

अश्वनी खड्ड के किनारे अतिक्रमण

सैलानियों की आमद को देखते हुए साधुपुल के समीप अश्वनी खड्ड के किनारे व नदियों में जमकर अवैध निर्माण किया गया। हालांकि प्रशासन की ओर से कई बार नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन अवैधकारोबारियों के आगे एक न चली और अश्वनी खड्ड एवं आसपास के क्षेत्रों में अवैध निर्माण कर कारोबार बदस्तूर जारी रहा।

पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं

पार्किंग की बात करे तो यह सोलन जिला मुख्यालय की सबसे जटिल समस्या है। समस्या के समाधान के लिए हालांकि नगर परिषद की ओर से शहर के कई स्थानों पर पार्किंग बनाई गई हैं, लेकिन जनसंख्या एवं वाहनों की संख्या के चलते यह नाकाफी है। सोलन शहर में पार्किंग की उचित व्यवस्था न होने के कारण यह भी ड्राबैक रहा है कि सैलानी यहां रुकते ही नहीं। यदि किसी ने जाने अनजाने वाहन पार्क कर लिया तो पुलिस उसका चालान कर लेती है। मल्टीस्टोरी पार्किंग बनाने का मुद्दा लगातार सियासी मंचों पर गूंजा, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान न तो प्रशासन निकाल पाया और न ही सरकार की ओर से कोई पहल की जा रही है। यही कारण है कि सैकड़ों गाडि़यां दिन-रात शहर की सड़कों पर ही पार्क की जाती है।  

टूरिज्म मैप से जोड़ा जाए शहर

एमआर अग्रवाल

सोलन के माया राम अग्रवाल का कहना है कि सोलन को धर्मशाला व शिमला की तरह टूरिज्म मैप में जोड़ा जाना चाहिए। जब तक इसे मैप में नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक पर्यटक स्थलों को निखारा नहीं जाएगा। साथ ही शहर में पार्किंग व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर रखा जाना चाहिए तभी पर्यटकों में इजाफा हो सकता है।  

अब नगर निगम का दर्जा चाहिए

मनोज गुप्ता

जिला में कई पर्यटक स्थल हैं, जिनका लोगों को पता ही नहीं है। इन पर्यटक स्थलों को ओर अधिक  विकसित किया जाना चाहिए। साथ ही पापुलेशन को देखते हुए भी सोलन शहर तीव्रता से आगे बढ़ रहा है, जिसको देखते हुए इसे नगर निगम बनाया जाना चाहिए, ताकि शहर के विकास को गति मिल सके और सोलन तरक्की की राह पर आगे बढ़े।

सैलानियों को हर सुविधा मिले तो बनेगी बात

शंकर वशिष्ठ

सोलन के शंकर वशिष्ठ का कहना है कि गौण  पर्यटक स्थलों को मुख्यधारा के लाकर आकर्षित करना, उन स्थानों को और सुविधाजनक बनाना चाहिए।  पर्यटकों में सभी वर्गों के लोग होते हैं उनकी आयु के अनुसार अर्थात बच्चों, युवा, बुजुर्ग आदि को देखते उन स्थानों को सुगम्य बनाकर उन स्थानों को रुचिकार बनाना चाहिए। प्रासंगिता को देखते हुए हर स्थान पर उठने-बैठने, झूले आदि की व्यवस्था कर पर्यटक स्थलों को संरचनात्मक बनाकर पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। स्वच्छता, पेयजल, पेयजल ठहरने की व्यवस्था या अन्य सुविधाओं का प्रावधान करना चाहिए ताकि पर्यटकों को किसी अन्य प्रकार की परेशानी  न हो। 

सड़क-बिजली-पानी की व्यवस्था की जाए सुदृढ़ 

महेंद्र नाथ सोफत

सोलन में पर्यटकों को बढ़ावा देने के लिए तीन बिंदुओ पर ध्यान देना चाहिए, जिसमें सबसे पहले विश्व स्तरीय सड़कों की व्यवस्था होनी चाहिए। दूसरे स्थान पर विश्व स्तरीय पेयजल व्यवस्था   व तीसरे स्थान पर विश्व स्तरीय बिजली की व्यवस्था होने से पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है।  सोलन के चायल सबसे प्रसिद्ध स्थल है और चायल नगरी पहले से ही पर्यटकों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। चायल नगरी एक ऐसी वैली है, जहां पर फूलों की खेती बहुत आराम से की जा सकती है। सरकार को इस बारे कई बार कहा जा चुका है कि लगभग 350 बीघा जमीन पैलेस होटल के समीप पड़ी है जहां वहां की तापमान पर फूलों का बगीचा तैयार किया जा सकता है और सभी के लिए एक एक्टिविटी तैयार की जा सकती है। साथ ही हार्टिक्लचर की जमीन भी है, जहां काफी वर्षों पहले श्रीनगर के लगाए जाने वाले फूल हुआ करते थे , वे भी लगाए जा सकते हैं। चायल के क्रिकेट ग्राउंड को विकसित कर क्रिकेट व अन्य खेलों के कोचिंग सेंटर खोले जाने चाहिए। इसी के साथ मोहन हेरिटेज पार्क, काली का टिब्बा, धारो की धार को जाने वाले मार्गों को बेहतर बनाना चाहिए।

सड़क की राह ताक रहा करोल का टिब्बा 

कसौली को छोड़ कर सोलन के समीप बड़ोग, धारों की धार, काली का टिब्बा, नेशनल हेरिटेज पार्क हरठ, करोल का टिब्बा एवं काली टिब्बा जैसे कई स्थान हैं। सोलन से बड़ोग की दूरी लगभग 6 किमी, धारों की धार की दूरी 22, करोल का टिब्बा 12 किमी, नेशनल हेरिटेज पार्क 10 किमी और काली का टिब्बा लगभग 35 किमी दूर है।  इनमें से धारों की धार व करोल का टिब्बा दो ऐसे स्थान हैं, जहां तक सड़क ही नहीं है। इस कारण यहां पहुंचना काफी मुश्किल है। हालांकि अन्य स्थानों तक सड़क से पहुंचा जा सकता है, लेकिन ठहरने एवं होटल की उचित व्यवस्था न होने के कारण पर्यटक नहीं पहुंच पाते।

सैलानियों को रिझा नहीं पाया प्रशासन

302    होटल

159  रेस्टोरेंट

92  गेस्ट हाउस

89  ट्रेवल एजेंसियां

पर्यटन के हिसाब से सोलन जिला की बात की जाए तो यहां  पर्यटकों की उतनी संख्या नहीं है, जितनी पर्यटन की संभावनाएं हैं। कसौली एवं चायल को छोड़ दे तो जिला में कई ऐसे स्थान हैं, जिन्हें पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा सकता है। इन स्थानों में करोल का टिब्बा, धारों की धार, बाड़ी की धार, चायल का काली टिब्बा आदि ऐसे दर्शनीय स्थान हैं, जिन पर सरकार टिकटिकी तो लगाए बैठी हैं, लेकिन अभी तक कोई ऐसी योजना नहीं लाई गई, जिससे इन स्थानों के लिए पर्यटकों को खींचा जा सके। यदि सोलन जिला मुख्यालय की बात करें तो यहां की स्थिति ऐसी है कि पर्यटक के पांव ही नहीं ठहरते। निजी वाहनों से आने वाला पर्यटक या तो कसौली का रुख करते हैं या फिर सीधे चायल एवं शिमला का। सीजन के दौरान प्रमुख पर्यटन स्थानों के होटलों में अक्यूपेंसी अधिक होने के कारण ही पर्यटक सोलन की ओर रुख करते हैं।  विडंबना यह है कि पीक सीजन में वाहनों की अधिक संख्या होने के कारण पर्यटकों को जाम जैसी समस्या से दो चार होना पड़ता है। गौर करने वाली बात यह है कि अगर प्रशासन इस ओर ध्यान दे तो सैलानियों को आकर्षित किया जा सकता है।

पर्यटन स्थलों को किया जा रहा विकसित

जिला पर्यटन विकास विभाग विवेक चौहान का कहना है कि पर्यटन की दृष्टि से सोलन जिला के कई पर्यटन स्थलों को विकसित किया जा रहा है। सर्वप्रथम सरकार की नई योजना नई मंजिले नई राहें के तहत करोल के टिब्बे को विकसित किए जाने की योजना है। इसके बाद सूचीबद्व तरीके से भी स्थानों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा।