Wednesday, July 17, 2019 08:54 PM

खंडहर बन रहे बच्छरेटू किले की बदलेगी लुक

बिलासपुररियासतकाल में कहलूर (बिलासपुर) की ऐतिहासिक धरोहरें आज अपने अस्तित्व की बाट जोह रही हैं। इन ऐतिहासिक धरोहरों को संजाने की जरूरत है, जिससे पौराणिक इतिहास को पर्यटन से जोड़कर आकर्षण का केंद्र बनाया जा सकता है। ऐसा ही एक बच्छरेटू किला है, जिसके दिन अब बहुरने की उम्मीद बंधी है। दयनीय हालत में पहंुच चुके इस प्राचीन किले का जायजा लेने के लिए भाषा एवं संस्कृति विभाग की एक टीम ने बच्छरेटू का दौरा किया। इसकी हालत देख टीम भी हैरान रह गई। जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने बच्छरेटू किले की मरम्मत और रखरखाव के लिए विभाग के उच्चाधिकारियों से पत्राचार करने का निर्णय लिया है। बताते चलें कि दो दिन पहले जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल की अगवाई में एक टीम ने बच्छरेटू किले का दौरा किया। टीम में बुद्धिजीवी वर्ग इंद्र चंदेल, प्रकाशचंद शर्मा, सुरेंद्र मिन्हास, जसवंत चंदेल, रविंद्र कमल, तिलकराज शर्मा व वीना शामिल थे। ऐतिहासिक किले की यह हालत देख टीम दंग रह गई। किले का बारीकी से मुआयना करने के साथ ही इस टीम ने स्थानीय लोगों से भी बात की। ग्रामीणों ने टीम को अवगत करवाया कि रियासतकाल के दौरान क्षेत्र की पहचान बन चुका यह किला अब खंडहर बन चुका है। उन्होंने इसकी हालत सुधारने के लिए धरातल पर ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है। वहीं, जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने उन्हें आश्वस्त किया कि इस धरोहर को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। इसकी मरम्मत व रखरखाव के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जाएगा।

कुछ ऐसी है किले की हालत

जानकारी के मुताबिक राजाओं के समय के कई किले बिलासपुर जिला की शान रहे हैं, लेकिन वक्त के थपेड़ों ने उनकी सूरत बिगाड़ कर रख दी है। बाबा बालक नाथ की तपोभूमि शाहतलाई के पास बच्छरेटू किला भी उनमें शामिल है। यह किला अब बेहद जीर्ण-शीर्ण हालत में है। पूर्वी दिशा की दीवार का एक हिस्सा कुछ अरसा पहले मूसलाधार बारिश के दौरान ढह गया था। दीवार में लगाए गए तराशे हुए पत्थर किले के साथ लगते किसानों के खेतों में बिखरे पड़े हैं। किले के भीतर मंदिर, तालाब, तहखाना और चौबारे आदि भी थे, लेकिन उनका अस्तित्व भी खत्म होने के कगार पर है।