Monday, June 01, 2020 02:01 AM

खेत में टैंट लगा खुद को किया क्वारंटाइन

देहरादून से आए दो युवकों ने घर न जाकर पेश की मिसाल, मशुऊग्रां के एक परिवार ने खुद चुना संस्थागत क्वारंटाइन

कटौला-अपने परिवार व समुदाय को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए राज्य के बाहर से आने वाले लोग क्वारंटाइन के महत्त्व को समझने लगे हैं। यही कारण है कि वह स्वयं को क्वारंटाइन करने से गुरेज नहीं कर रहे तथा राज्य सरकार से इस फैसले का स्वागत भी कर रहे हैं। होम क्वारंटाइन का क्या महत्त्व है और यह क्यों जरूरी है, इसकी मिसाल जिला मंडी के इलाका उतरशाल की टिहरी पंचायत के मशऊग्रांव गांव वासी नरेश कुमार और जीवन कुमार ने खेत में टेंट में रहकर की है। नरेश कुमार और जीवन कुमार अपने दोस्तों के साथ 16 मई को देहरादून से वापस आए हैं। प्रशासन की ओर से नरेश कुमार और जीवन कुमार को होम क्वारंटाइन रहने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन घर में माता और अन्य परिजन भी रहते हैं, ऐसे कहीं कोई चूक न हो, इसका खतरा ही इन दोनों युवाओं ने नहीं उठाया। इसलिए इन दोनों यह फैसला लिया कि वह घर के साथ खेत में टेंट लगाकर उसमें अपनी क्वारंटाइन की अवधि पूरी करेंगे। नरेश कुमार ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए एहतियातन क्वारंटाइन होने वाले अन्य व्यक्तियों के लिए भी ये संदेश दिया है कि यदि कोरोना से स्वयं भी बचना है और अपने परिवार को भी बचाना है तो होम क्वारंटाइन के सभी नियमों का पालन भी उतना ही आवश्यक रहेगा और उसमें किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। टिहरी पंचायत के सचिव जय देव ठाकुर ने कहा कि पंचायत में मशुऊग्रां गांव के एक परिवार के होम क्वारंटाइन के बहुत अच्छे उदाहरण सामने आए हैं। यह ऐसा परिवार हैं जो अन्यों के लिए मिसाल बना हैं। उन्होंने स्वेच्छा से संस्थागत क्वारंटाइन का विकल्प चुना है। अभी तक सात लोग बाहरी राज्यों और 19 लोग हिमाचल के ही अन्य जिलों से आए हुए हैं, जिनका भरपूर सहयोग प्राप्त हो रहा है। क्वारंटाइन केंद्रों में लोगों की सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा है तथा लोग क्वारंटाइन में रहने के लिए सहयोग कर रहें है।