Sunday, May 09, 2021 08:07 PM

गर्मियों की आहट... पिघलने लगे हिमक्षेत्र

कीटनाशकों की सबसिडी समाप्त करने के बाद अब 700 रुपए तक उर्वरकों की कीमत बढ़ाने का किया विरोध

स्टाफ रिपोर्टर — भुंतर खादों की कीमत में हुई इजाफे ने जिला कुल्लू के किसानों-बागबानों को टेंशन में डाल दिया है। कोरोना संक्रमण के संकट के बीच पहले से ही आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे घाटी कि किसानों-बागबानों को अब खाद के लिए ज्यादा जेब ढीली करनी होगी। लिहाजा, किसानों-बागबानों ने बढ़ी हुई कीमतों पर नाराजगी जाहिर की है और सरकार से इस दिशा में मदद की आस जताई है। बता दें कि जिला में कृषि-बागबानी सीजन आरंभ हो चुका है और आने वाले दिनो में बड़े स्तर पर खाद की जरूरत किसानों-बागबानों को है, लेकिन इसी बीच कई खादों की कीमतें बढ़ गई हंै।

इससे पहले प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के नाम पर दवाइयों पर मिलने वाली सबसिडी को समाप्त कर दिया है और ये दवाइयां भी महंगी दरों पर अब मिल रही हैं। इफ्को ने जरूरी खादों की कीमत में छह से सात सौ रुपए तक की वृद्धि की है। जानकारी के अनुसार डीएपी खाद की कीमत 1200 से बढ़कर 1900 रुपए बैग, 10:26:26 खाद 1175 से 1775, 12:32:16 खाद 1185 से 1800 रूपए तथा 20:20:00:13 खाद 925 से बढ़कर 1350 रुपए प्रति बैग हो गई है। जिला कुल्लू के किसान बागबान संगठनों के प्रतिनिधियों के अनुसार सरकार किसानों-बागबानों के हितों से खिलवाड़ कर रही है और किसानों-बागबानों के हितों की सरकार कोई परवाह नहीं कर रही है। इनके अनुसार उर्वरको में एकाएक 700 रुपए की वृद्धि किसानों-बागबानों की आर्थिकी पर एक बड़ा प्रहार है। किसानों-बागबानों को पहले ही उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिलता, ऊपर से उन्हें उर्वरको, कीटनाशकों, फफंूदनाशक व अन्य आवश्यक उपकरणों गत्ते के बक्से आदि महंगी दरों पर मिलने से किसान-बागबान कृषि के प्रति हतोत्साहित होंगे, जो चिंता का विषय है।

गर्मियों की पसंदीदा सैरगाह है पर्यटन नगरी, इस बार कोविड मापदंडों को पूरा करने पर ही होगी एंट्री

स्टाफ रिपोर्टर — भुंतर

कोरोना की बंदिशों के बीच अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी कुल्लू-मनाली की ओर सैलानी उमड़ने लगे हैं। सरकार के नए निर्देशों के तहत होटल कारोबारी भी मेहमानों की आवभगत करने में जुट गए हैं। लिहाजा, आने वाले दो से तीन माह तक अगर कोरोना का खतरा ज्यादा नहीं बढ़ा तो सैलानियों की रौनक देखने को मिलगी। बता दें कि अप्रैल से जुलाई की गरमी से परेशान सैलानी राहत को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी कुल्लू-मनाली को भागे-भागे आते हैं। इन चार महीनों में जिला में आने वाले पर्यटकों की संख्या सर्दियों की तुलना में दोगुनी हो जाती है। सैलानी मनाली-रोहतांग-सोलंगनाला, मणिकर्ण-बरशैणी तथा बंजार-जलोड़ी के पर्यटन ठिकानों में इस दौरान रहते हैं और अगस्त-सितंबर में गर्मी कम होने के बाद वापस लौटना आरंभ करते हैं। जानकारों के अनुसार कुल्लू-मनाली देश-दुनिया के सैलानियों के लिए सबसे पसंदीदा सैरगाह बन गया है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल माह में सैलानियों की संख्या में इजाफा होना आरंभ होता है और मई-जून साल का पीक सीजन रहता है।

साल के किसी भी माह में एक से दो लाख तक जिला में आने वाले सैनियों का आंकड़ा इन महीनों में चार लाख के पार हो जाता है।  पिछले दो सालों में केवल मई व जून केवल मात्र महीने रहे हैं, जब यहां आने वाले सैलानियों का आंकड़ा चार लाख के पार हुआ है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक साल 2015 से 2019 तक अप्रैल माह में जिला में 1752742 सैलानी, मई में 2131096, जून में 2299923 तथा जुलाई में 1791598 सैलानी आए हैं, जो अन्य माह में आए सैलानियों से 50 फीसदी तक ज्यादा हैं। हालांकि पिछले साल कोई भी सैलानी इस दौरान लॉकडाउन के कारण नहीं आ पाया था। गर्मियों में यहां पहुंच रहे पर्यटकों के कारण पर्यटन कारोबारी खूब चांदी कूटते हैं। जानकारी के अनुसार 2015 के बाद से शिमला भी कुल्लू के मुकाबले सैलानियों को आकर्षिक करने के मामले में पिछड़ता जा रहा है। 2018 में कुल्लू में शिमला के मुकाबले करीब तीन लाख ज्यादा सैलानी आए थे। पर्यटकों की लंबी लाइन के बाद जिला के कारोबारी इस बार भी ज्यादा सैलानियों के यहां पहुंचने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उपायुक्त डा. ऋचा वर्मा का कहना है कि सैलानियों के अनुसार सरकार ने कोविड मापदंड तय किए हैं और इनका पालन करते हुए सैलानी जिला में आ सकते हैं।

ब्यास-पार्वती-सैंज बेसिन की पहाडि़यों से छंटने लगी सफेदी, नदियों के जलस्तर में हो रहा इजाफा

स्टाफ रिपोर्टर — भुंतर

इस साल अच्छी बर्फ को तरसे जिला कुल्लू के पार्वती-ब्यास और सैंज बेसिन के बर्फ क्षेत्र गर्मी की आहट से हौले-हौले पिघलने आरंभ हो गए हैं। मौसम में आई गर्माहट अपना रंग दिखाने लगी है, जिसका असर जिला के हिम क्षेत्रों पर दिख रहा है। लिहाजा सदानीरा ब्यास और पार्वती सहित सैंज नदियों के जलस्तर में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने वाली है। बता दें कि सर्दियों में पहाड़ों पर हुए हिमपात ने यहां की नदियों के जलस्तर को भी निम्र स्तर पर पहुंचा दिया था। सबसे ज्यादा 36 ग्लेशियरों से घिरे पार्वती बेसिन के करीब 450 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, छह ग्लेशियरों से घिरे ब्यास के 15 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र और नौ ग्लेशियरों से घिरे सैंज बेसिन के 37 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में इस बार बर्फ अपेक्षाकृत कुछ कम पड़ी है और यह बर्फ अब पिघलने लगी है। बर्फ पिघलने के बाद इन चोटियों में लोगों का आवागमन भी होने लगा है। जानकारी के अनुससार पार्वती घाटी की मलाणा व खीरंगगा में बर्फ की चादर हट रही है और यहां पर सैलानी व अन्य लोग भी पहुंच रहे हैं। ग्लेशियोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार जिला में करीब 330 से अधिक हिम क्षेत्र हैं, जिनमें पार्वती बेसिन में सबसे ज्यादा 147 हिमक्षेत्र हैं, जिनका दायरा करीब 118 वर्ग किलोमीटर है तो ब्यास बेसिन में 47 और सैंज बेसिन में 59 हिमक्षेत्र हैं, जिनका दायरा 72 व 51 वर्ग किलोमीटर है।