Monday, November 18, 2019 05:13 AM

गांधी-मुक्त कांग्रेस

अंततः राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से औपचारिक इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कांग्रेसियों और देश के लिए चार पन्नों का एक पत्र भी लिखा है। उन्होंने अपने ट्विटर का प्रोफाइल भी बदल कर ‘कांग्रेस अध्यक्ष’ के बजाय ‘कांग्रेस सदस्य’ कर लिया है। साफ  है कि उन्होंने कांग्रेस कार्यसमिति से लेकर सांसदों, मुख्यमंत्रियों,पदाधिकारियों और औसत कांग्रेसजनों तक के आग्रहों को खारिज कर दिया है। अब कार्यसमिति अंतरिम अध्यक्ष तय करे या स्थायी अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करे, लेकिन एक बारगी कांग्रेस ‘गांधी-मुक्त’ जरूर होगी। बेशक एक दरवाजा खुला रहेगा, जिसके जरिए गांधी परिवार कांग्रेसी सत्ता तक पुनः प्रवेश कर सकेगा। कांग्रेस अध्यक्ष का सवाल छोड़ते हैं, लेकिन चार पन्नों में राहुल गांधी ने जो आरोप लगाए हैं, वे अलोकतांत्रिक और दुर्भाग्यपूर्ण हैं। राहुल का मानना है कि कांग्रेस भाजपा से चुनाव नहीं हारी, बल्कि चुनाव ही स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं कराए गए। संवैधानिक संस्थाओं पर प्रधानमंत्री मोदी और आरएसएस ने कब्जा कर लिया है। कांग्रेस को सरकारी मशीनरी के खिलाफ  चुनाव लड़ना पड़ा। अब यह भी खतरा है कि भविष्य में चुनाव औपचारिकता भर ही हों! चुनाव जीतने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को छिपाया नहीं जा सकता। पैसे और प्रचार के बल से सच को दबाया नहीं जा सकता। देश के लोकतांत्रिक मूल्य, संविधान और व्यवस्थाएं खतरे में हैं, असुरक्षित हैं। कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर जो सवाल राहुल गांधी ने उठाए हैं और जनादेश को अपमानित किया है, किसी भी पार्टी के अध्यक्ष ने व्यवस्था को कोसते हुए ऐसा नहीं किया। खुद राहुल और उनकी मां सोनिया गांधी इसी व्यवस्था में सांसद का चुनाव जीते हैं। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब और पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकारें भी बनी हैं। कर्नाटक की गठबंधन सरकार का भी हिस्सा है कांग्रेस। सवाल है कि यदि कांग्रेस चुनाव हारती है, तो क्या हिंदुस्तान ही हार जाता है? कांग्रेस के 52 सांसद चुनकर लोकसभा में आए हैं। उनका चुनाव किस व्यवस्था के तहत किया गया? राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ा है। वह आम चुनाव में पार्टी की करारी पराजय का जिम्मेदार खुद को ही मानते हैं,जबकि चुनावी हार की जिम्मेदारी सामूहिक होती है। 2013 और उसके बाद 33 चुनावों में कांग्रेस की हार हुई। गांधी परिवार ने कांग्रेस से कितनी बार इस्तीफा दिया? 2014 के लोकसभा चुनाव में तो और भी करारी हार हुई थी और कांग्रेस 44 सांसदों तक सिमट गई थी। तब कांग्रेस अध्यक्ष का इस्तीफा क्यों नहीं हुआ? खुद राहुल गांधी भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे। राहुल गांधी ने पत्र में अकेले लड़ाई लड़ने की बात कही है। उनका स्पष्ट कहना है कि ‘चौकीदार चोर है’ नारे का समर्थन पार्टी के बडे़ नेताओं और मुख्यमंत्रियों ने नहीं किया। बेशक चुनाव का नेतृत्व अकेले राहुल गांधी ही करते रहे, क्योंकि यही कांग्रेस की संस्कृति है। बहरहाल अब एक बार फिर कांग्रेस ‘गांधी मुक्त’ होगी। देश की आजादी के बाद 38 साल तक नेहरू-गांधी परिवार ने कांग्रेस पर राज किया, जबकि 34 साल तक विभिन्न गैर-गांधी चेहरे पार्टी के अध्यक्ष बने, लेकिन उनकी स्थिति ‘अस्थायी’ ही रही है। सीताराम केसरी का उदाहरण हमारे सामने है। लिहाजा अब भी जो नया अध्यक्ष या अंतरिम अध्यक्ष बनेगा,क्या उसकी नियति भी वैसी नहीं होगी? पार्टी अध्यक्ष के पास पर्याप्त संसाधन होने चाहिए, जबकि ज्यादातर संसाधनों पर गांधी परिवार का कब्जा है। जाहिर है कि कांग्रेस अध्यक्ष गांधी परिवार के सामने हाथ फैलाए रखने को विवश होगा। जो भी नया अध्यक्ष होगा,वह सभी कांग्रेसियों का केंद्र बिंदु नहीं बन पाएगा, क्योंकि कांग्रेसी गांधी नाम के चौगिर्द ही जमा रहे हैं,लिहाजा जब भी गैर-गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बना है, पार्टी तभी विभाजित हुई है। इस बार भी आशंकाएं हैं, क्योंकि कांग्रेसी टूट-टूट कर भाजपा की तरफ  जा रहे हैं, लिहाजा देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी को यूं ही विखंडित नहीं होने दिया जा सकता। इस संदर्भ में खुद राहुल गांधी आत्मचिंतन करें कि देश और पार्टी के राजनीतिक हित में क्या है।