Monday, August 03, 2020 06:14 PM

गांवों की तस्वीर बदलना कंवर का मिशन

हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पशुपालन और मत्स्य पालन मंत्री वीरेंद्र कंवर गांवों की तस्वीर बदलने का मिशन लेकर आगे बढ़ रहे हैं। पहाड़ के परिश्रम को विश्वसनीय ब्रांड का चोला पहनाकर देश-दुनिया के बाजार को टक्कर देने का इरादा रखने वाले कंवर न चुनौतियों से डरते हैं और न ही उन्हें नए प्रयोगों से परहेज करते हैं। ‘दिव्य हिमाचल मुख्यालय’ पहुंचे वीरेंद्र कंवर से उनके अनुभव और योजनाओं पर बात की ‘दिव्य हिमाचल’की संपादकीय टीम ने...

दिव्य हिमाचल : हिमाचल में पशुपालन का क्या भविष्य है? हमारे प्रदेश में यह क्षेत्र हमेशा हाशिए पर रहा है। क्या आप बदलाव लाएंगे?

वीरेंद्र कंवर : आप मानिए बदलाव हमारी सरकार बनते ही शुरू हो चुका है और अब आप उसका प्रभाव देखेंगे। भेड़-बकरी पालन में उत्तर भारत में हिमाचल की ग्रोथ सबसे अधिक रही है। दुग्ध उत्पादन में भी आप शीघ्र क्रांति का सूत्रपात देखेंगे।

दिहि : हिमाचल में दुग्ध क्रांति की बात दूर की कौड़ी लगती है। यह कैसे संभव है?

वीरेंद्र कंवर : हम हिमाचल के दूध को लोकप्रिय ब्रांड बनाने जा रहे हैं। हमने प्रदेश की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से देशी गाय की तीन नस्लों साहीवाल, रेड सिंधी और गौरी की पहचान की है, जो दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ ही प्रदेश के बाहर इसकी डिमांड पैदा करेंगी।

दिहि :  क्या सिर्फ गाय पालन पर ही जोर देंगे?

वीरेंद्र कंवर :  जी नहीं। हम जल्द ही बकरी का दूध भी टेट्रा पैक में बाजार में उतारने जा रहे हैं। ऊना जिला में इस संबंध में पायलट प्रोजेक्ट जारी है। हम बकरी पालकों को सबसिडी के साथ ही प्री-फेब्रिकेटेड शैड भी मुहैया करवा रहे हैं, जिससे उन्हें व्यवसाय आगे बढ़ाने में आसानी रहेगी।

दिहि : प्रदेश में मछली पालन और मछली पालकों के लिए आपका विभाग क्या कर रहा है?

वीरेंद्र कंवर :  हिमाचल की ट्राउट मछली की बड़ी डिमांड है और हम इस दिशा में काम कर रहे हैं। यही नहीं, प्रदेश के तीन बड़े जलाशयों पौंग, गोबिंदसागर और कोलडैम में मिलने वाली बेमिसाल मछलियों को हम ‘हिमाचल फ्रेश वाटर फिश’ के नाम से देश-दुनिया में सप्लाई करने जा रहे हैं। आज ब्रांडिंग का जमाना है, तो भरोसेमंद ब्रांड उतारने में हर्ज क्या है। रही बात मछुआरों की, तो हम सभी को मुफ्त लाइफ जैकेट देने जा रहे हैं। साथ ही मछली व्यवसाय को ई-टेंडरिंग के दायरे में लाकर हम सबको फायदा दिलवाएंगे।

दिहि : पंचायतों के विकास को मिला धन वापस लौटने के समाचार मिल रहे हैं। सच्चाई क्या है?

वीरेंद्र कंवर :  देखिए, पंचायतों को धन सीधे मिल रहा है इसलिए उसमें हमारी भूमिका कुछ कम है, लेकिन फिर भी हम प्रभावी कदम उठा रहे हैं। केंद्र से मिले 1160 करोड़ रुपए में से लगभग 830 करोड़ रुपए इस्तेमाल किए जा चुके हैं। धन वापस नहीं गया, बल्कि हमें 490 करोड़ रुपए और मिले हैं।

दिहि : धन खर्च करने में परेशानी आखिर है क्या?

वीरेंद्र कंवर :  सबसे बड़ा कारण है आपसी विवादों के कारण पंचायतों में विकास कार्य लटकना। बहुत से कार्य ऐसे हैं, जो पिछले 20-25 सालों में शुरू तो हुए, लेकिन धन शेष होने के बावजूद कट गए। अब हमने योजना बनाई है कि 31 मार्च, 2019 तक ऐसे कार्यों की जितनी भी राशि बिना इस्तेमाल पड़ी है, उसे स्टेट में मर्ज कर इस्तेमाल में लाएंगे।

दिहि : क्या मनरेगा हिमाचल जैसे राज्य में उपयोगी है?

वीरेंद्र कंवर :  इसका उत्तर मैं इस प्रकार देना चाहूंगा कि हमने मनरेगा के जरिए न केवल पक्की सड़कें बनाई हैं, बल्कि बड़े पुलों का सपना भी साकार किया है। मनरेगा के जरिए लोगों को जो रोजगार मिला है, वह तो है ही।

दिहि : आप हिमाचल के गांवों और ग्रामीणों की दशा कैसे बदल रहे हैं?

वीरेंद्र कंवर :  हम गांवों का विकास कर ग्रामीणों को आर्थिक समृद्धि की ओर ले जा रहे हैं। एक उदाहरण के जरिए बताऊं तो ऊना जिला में मुख्य सड़कों के किनारे हम सौ स्थानों पर आधुनिक रेन शेल्टर बना रहे हैं। यहां टायलट की सुविधा होगी और साथ ही रेस्तरां भी। इसमें ग्रामीणों द्वारा तैयार ऐसे उत्पाद भी बेचे जाएंगे, जिन्हें लोग खरीदना तो चाहते हैं, पर ढूंढ नहीं पाते। सोचिए इस योजना से कितने लोगों को लाभ होगा? सफल रहने पर यह सारे प्रदेश में लागू होगी।

दिहि : इसके अलावा और क्या तरीके अपना रहे हैं?

वीरेंद्र कंवर :  प्रदेश के बीपीएल परिवारों को गरीबी से निकालने के लिए परिवार के सदस्यों को छोटे-छोटे व्यवसाय अपनाने की ट्रेनिंग देंगे। उन्हें तीन-तीन हजार रुपए अलग से देंगे। जिनकी जमीन बंजर है, उन्हें पेड़-पौधे फ्री देकर आजीविका की राह दिखाएंगे। हर विभाग के हवाले कुछ परिवार करेंगे, जिनकी जीवन दशा बदलने की जिम्मेदारी तय होगी।

दिहि : प्रदेश में पंचायतों के पुनर्गठन की आवाज उठ रही है। आपके विभाग की क्या योजना है?

वीरेंद्र कंवर :  हम इस विषय में कदम उठाने जा रहे हैं। हालांकि नई पंचायत में न्यूनतम 1200 मतदाता होने चाहिए। इसके अतिरिक्त जहां पंचायत मुख्यालय पांच किलोमीटर से दूर है, वहां भी नई पंचायत बनाएंगे। दो प्रशासनिक क्षेत्रों में बंटी पंचायतों पर भी यही नीति लागू होगी। हालांकि नई पंचायतों की संख्या कम ही होगी, यह तय है।

दिहि : बतौर मंत्री दो साल के कार्यकाल में आपकी सबसे बड़ी संतुष्टि क्या है?

वीरेंद्र कंवर :  मैं कहूंगा, मुख्यमंत्री ग्राम कौशल योजना हम गांवों के छोटे दस्तकारों-शिल्पकारों को पुनः स्थापित कर रहे हैं। नौकरी के पीछे भागने के बजाय अगर गांव का युवा अच्छा वेल्डर, बुनकर, कुक या कुछ और बनता है, तो सोचिए वह गांव, परिवार और समाज के लिए कितना उपयोगी हो सकता है।

दिहि : आप एक दिन में कितनी देर काम करते हैं?

वीरेंद्र कंवर :  सही कहूं, तो ऐसा हिसाब ही नहीं रखा। बस ऐसे समझ लीजिए कि सुबह पांच बजे उठता हूं और रात को 11 बजे के बाद ही सोता हूं।

दिहि : आप कुछ पढ़ना भी पसंद करते हैं?

वीरेंद्र कंवर :  अखबारों के अलावा समय मिले, तो अपने  विभाग से संबंधित किताबें पढ़ना पसंद हैं।

दिहि : अपने विभागों को लेकर क्या कहना चाहेंगे?

वीरेंद्र कंवर :  मेरे विभाग मेरे दिल के बहुत करीब हैं और मैं पूरी तरह इनके प्रति समर्पित भी हूं। जिंदगी में पद तो आते-जाते रहेंगे, लेकिन इन विभागों के माध्यम से जनता की सेवा करने में जो सुकून मिलता है, उसे व्यक्त करना मेरे लिए संभव नहीं।