Friday, October 18, 2019 05:52 PM

गांवों में वैज्ञानिक तरीके से बनेंगे भवन

इंजीनियर्स-डे पर ‘दिव्य हिमाचल’ के सेमिनार में बोले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर

शिमला - हिमाचल में बार-बार प्राकृतिक आपदा के खतरे को देखते हुए प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में भी सुरक्षित और वैज्ञानिक मापदंड से भवनों के निर्माण पर बल देगी। ‘दिव्य हिमाचल’ द्वारा आयोजित इंजीनियर्स-डे के अंतिम सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने यह बात कही। यहां विराजमान इंजीनियर्स को संबोधित करते हुए जयराम ठाकुर ने पूरे प्रदेश को संदेश देते हुए कहा कि हर साल मानसून के दौरान सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं को होने वाले नुकसान को बचाने के लिए इंजीनियरों को आधुनिक तकनीकों का लाभ उठाने की संभावनाओं को तलाशना चाहिए। उन्हें विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित व वैज्ञानिक मापदंडों के आधार पर इमारतों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जहां लोग भूकंप और अन्य आपदाओं के कारण होने वाले खतरों के बारे में ज्यादा जागरूक नहीं हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विकासात्मक कार्यों के निष्पादन के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकी अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया है, ताकि इनमें गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रकृति और विकास में भी संतुलन बनाया रखा जा सके। उन्होंने कहा कि हालांकि विकास हमारी स्वाभाविक आवश्यकता है, लेकिन यह पर्यावरण की कीमत पर नहीं हो सकता और हमें प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम कम करने और बहुमूल्य पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने पर गहन चिंतन करना होगा। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र राज्य होने के कारण हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील है, जिसे ध्यान में रखते हुए पर्यावरण क्षरण की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। राज्य को हर साल बरसात और सर्दियों के मौसम में भारी बारिश, भू-स्खलन, बाढ़ और हिमपात तथा गर्मियों में सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण बहुमूल्य जीवन और संपत्ति को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में हमें विश्व स्तर की उन्नत तकनीकों को अपनाना होगा, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के खतरे कम हों और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति ने हिमाचल प्रदेश को अपार प्राकृतिक संसाधनों से नवाजा है, लेकिन भविष्य के परिणामों की परवाह किए बिना अपनी जरूरतों के लिए इसका अंधाधुंध दोहन करने से बचना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुनिश्चित हो सके और प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम भी कम हो सके। यह उचित समय है कि समाज का हर व्यक्ति पर्यावरण असंतुलन से पैदा होने वाली चुनौतियों को समझे और पर्यावरण संरक्षण में अपना भरपूर योगदान दे।

मैंने राजनीतिक सफर आपके साथ किया शुरू

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि मैंने राजनीतिक सफर 1998 से शुरू किया और ‘दिव्य हिमाचल’ की भी शुरुआत तभी की है। मुख्यमंत्री ने स्वच्छता अभियान, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के लिए ‘दिव्य हिमाचल’ के प्रयासों की सराहना की।  उन्होंने इंजीनियरों से राज्य के त्वरित विकास में सहयोग का आग्रह किया।

शिमला : 'दिव्य हिमाचल' की कॉफी टेबल बुक लांच करते मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर। साथ हैं मंत्री सरवीण चौधरी, विपिन सिंह परमार, मुख्य सचिव श्रीकांत बाल्दी व प्रधान संपादक अनिल सोनी