गुणा माता की महिमा… अंग्रेज शासक का बरतन भर दिया था सिक्कों से…

देवभूमि
हिमाचल प्रदेश को यूं ही देवी-देवताओं की भूमि नहीं कहा जाता है। प्रदेश में हर पहाड़ी से लेकर मैदानी क्षेत्र तक देवी-देवता का आशीर्वाद स्वाभाविक रूप से दिखाई देता है और भक्तजन इससे भलिभांति परिचित हैं। ऐसी ही एक देवी धौलाधार की पहाडि़यों की खूबसूरत धार नड्डी के बल्ह में विराजमान है। गुणा माता की महिमा से स्थानीय लोग भलीभांति परिचित हैं, लेकिन गुणा माता व उनके सच्चे भक्त चनालू सेठ की परीक्षा लेने पहुंचे अंग्रेज प्रशासक का बहुत बड़ा बरतन भी गुणा माता ने अपनी महिमा से सिक्कों से भर दिया था। जिसके बाद अंग्रेज अफसर ने भी गुणा माता मंदिर में शीश नवाया था। सैकड़ों वर्षाें से हजारों श्रद्धालुओं की मन्नते पूरी करती गुणा माता का मंदिर धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है। जहां हर वर्ष हजारों की संख्या में भक्तजन अपनी मुरादें लेकर पहुंचते हैं और मुराद पूरी होने पर जातर पर्व का आयोजन भी करते हैं। गुणा माता का मंदिर धर्मशाला के पर्यटक स्थल नड्डी के बल्ह गांव में स्थित है। एक सत्य घटना के अनुसार बल्ह गांव के रहने वाले गद्दी समुदाय के भ्याण की कुल देवी है और भ्याण जो कि अच्छी जमीन जायदाद के मालिक व एक सर्व संपन्न घराना था, इसलिए इन्हें आसपास के क्षेत्र के लोग सेठ कहकर पुकारते थे और आज भी सेठ ही कहा जाता है। सेठों के घर में एक बुजुर्ग थे, जिनका नाम चनालू सेठ था। कहते हैं कि चनालू सेठ पर साक्षात माता की कृपा दृष्टि थी। जब भी वह माता का ध्यान करते थे, तो गुणा देवी माता उन्हें अपना आशीर्वाद प्रदान करती थीं। जब इस बात का पता धर्मकोट में रहने वाले एक अंग्रेजी अफसर को चला, तो वह चनालू सेठ की परीक्षा लेने के लिए अपने कुछ कर्मचारियों के साथ बल्ह गांव में पहुंच गया और वहां पहुंच कर उसने चनालू सेठ से उसकी परीक्षा लेते हुए कहा कि सुना है, आप इस क्षेत्र के सेठ हैं यानी सबसे धनवान व्यक्ति हैं। मुझे थोड़े समय के लिए कुछ पैसे उधार चाहिए,अगर आप दे दें, तो ये आपका बड़प्पन होगा। इस पर बुजुर्ग जो कि उस समय अपने पशुओं की सेवा करने में व्यस्त था और हाथ में गोबर उठाए हुए था, उसने कहा कि मेरे हाथ तो गोबर से सने हुए हैं, मैं खुद नहीं दे पाऊंगा। आप खुद ही अंदर जाइए और ये (खारी) अनाज को उठाने व उसको छांटने के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला पात्र लेकर (पेडू) अनाज के भंडारण का एक बहुत बड़ा देसी पात्र से निकाल लीजिए। पेडू हालांकि अनाज से भरा था, फिर भी माता गुणा देवी का नाम लेकर चनालू सेठ ने अंग्रेज शासक को अंदर भेज दिया। जैसे ही अंग्रेज शासक ने खारी पेडू के नीचे रखकर उसका मुंह खोला, तो उससे चांदी के सिक्के गिरने लगे और देखते ही देखते खारी चांदी के रुपयों से भर गई। यह सब देख कर अंग्रेज शासक की आंखें खुली की खुली रह गइर्ं और बाहर आकर उसने चनालू सेठ को पूरी बात बताई कि मैं तुम्हारी आराध्य देवी मां गुणा देवी की परीक्षा लेने आया था, लेकिन आज मेरी आंखें खुल गई कि मां गुणा देवी सच में आपके साथ साक्षात है।    

— नरेन कुमार, धर्मशाला

ऐसे पहुंचें गुणा माता मंदिर

हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा की पर्यटन नगरी धर्मशाला से लगभग 11 किमी. पर वाहन योग्य मार्ग पर नड्डी गांव स्थित है। धर्मशाला-नड्डी गगल एयरपोर्ट, पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे लाईन और पठानकोट सड़क मार्ग व ऊना-ज्वालामुखी सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। नड्डी गांव से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर बल्ह गांव की धार है। इसके लिए अब बल्ह नाले तक कच्चे सड़क मार्ग का निर्माण कर लिया गया है, जबकि उसके बाद भक्तजनों के लिए अच्छा पैदल मार्ग उपलब्ध है। धौलाधार की पहाडि़यों से ठीक नीचे मनमोहक वादियों में मशहूर देवी माता गुणा का मंदिर है, जो जिला सहित प्रदेश व देश भर में प्रसिद्ध है। देवी माता अपने भक्तों की मनचाही मुरादें पूरी करती हैं और पर्यटन की दृष्टि से भी ये स्थल बहुत ही रमणीक है। मंदिर के सामने नजर आते बर्फ से ढके धौलाधार के पहाड़ इसकी सुंदरता पर चार चांद लगाते हुए मानो यह कहते हैं कि आओ इस मनमोहक दृश्य को उम्र भर के लिए यादगार के रूप में अपने हृदय पटल पर उकेर लें।

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