Tuesday, July 14, 2020 08:48 PM

घर के लिए मौत का सफर

सोलन के वार्ड नं एक ने कई दफा लगाई गुहार, फिर भी नहीं किया कोई समाधान

सोलन प्रदेश की सबसे बड़ी नगर परिषद सोलन शहरवासियों को सुख-सुविधाएं प्रदान करने में कथित तौर पर नाकाम साबित हो रही है। प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए की आय करने वाली नप मूलभूत सुविधाएं देने में पिछड़ रही है। आलम यह है कि लोगों को अपने घरों तक जाने के लिए सड़क नहीं है और बार-बार गुहार लगाने के बाद भी इसकी सुध नहीं ली जा रही है। नतीजतन लोगों ने स्वयं ही अस्थायी रास्ता बना दिया है, जिस पर वे प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर सफर तय करने के लिए विवश हैं। नप की इस लापरवाही के चलते लोगों में रोष पनप रहा है। नगर परिषद सोलन के तहत वार्ड नंबर एक के गौतम कुटीर के लोग पिछले तीन माह से अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने के लिए मजबूर हैं। जानकारी के अनुसार गौतम कुटीर की ओर जाने वाला मार्ग पहले एक व्यक्ति की निजी भूमि से होकर जाता था, लेकिन पिछले काफी समय से यह रास्ता उक्त व्यक्ति ने बंद कर दिया। इसके बाद लोगों ने नगर परिषद से गुहार लगाई कि उन्हें रास्ता प्रदान किया जाए, जिस पर कार्रवाई तो शुरू हुई थी लेकिन यह मुहिम जल्द ही ठंडे बस्ते में भी चली गई। इस कारण लोगों को आने-जाने के लिए अस्थायी रास्ते का निर्माण करना पड़ा। यह रास्ता पगडंडी पर बनाया गया है और मिट्टी के बार-बार खिसकने के चलते यह कभी भी ढह सकता है। इस रास्ते का उपयोग करीब पांच दर्जन परिवार करते हैं और उन्हें अपनी जान हथेली पर लेकर यहां से गुजरना पड़ता है। लोगों ने फिर से नप अधिकारियों से इस समस्या को हल करने की मांग की है। लोगों का क्या है कहना है कि हर पल सताता है डर वरुण का कहना है कि मैं प्रतिदिन इस रास्ते से अपने कार्य के लिए आता-जाता हूं। रास्ता अस्थायी रूप से बनाया गया है, जिससे हर वक्त खतरा बना हुआ है। नगर परिषद को इस विषय में जल्द से जल्द संज्ञान लेना चाहिए।  खुद ही बना डाला रास्ता मलकीत चौधरी ने कहा कि यह रास्ता लोगों द्वारा धनराशि एकत्रित कर स्वयं बनाया गया है। नगर परिषद को बार-बार कहने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिस कारण अस्थायी रास्ते का निर्माण करना पड़ा। बरसात के चलते रास्ते के गिरने का भी डर सता रहा है।  बारिश हो तो बढ़ जाता है खतरा पूजा चौहान ने कहा कि वह एक कंपनी में कार्यरत है और वापस आते हुए कई मर्तबा अंधेरा हो जाता है। अंधेरे में इस अस्थायी मार्ग से गुजरते हुए काफी डर लगता है और यदि बारिश हो तो यह डर अधिक बढ़ जाता है।  कई दफा उठाई मांग अंजू देवी का कहना है कि स्थानीय निवासियों ने कई बार कमेटी के अधिकारियों को इस बारे में सूचित किया है, लेकिन अभी तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया है। लोगों द्वारा अस्थायी रास्ते का निर्माण तो किया गया है लेकिन लोगों विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं व बच्चों के लिए काफी जोखिम भरा सफर है।

 

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