घर में आयुर्वेद

ब्राह्मी के गुण

ब्राह्मी छोटे आकार की हर्ब होती है, जो सारे भारतवर्ष में 1320 मीटर की ऊंचाई तक अधिकतर नम जगह में पाई जाती है। इसकी जड़, तना, पत्ते, फूल, फल का ही औषधि में प्रयोग होता है। इसमें ब्राह्मीन, हरपेस्टिन, निकोटीन, बेकोसाइड ए और बेकोसाइड बी जैसे रासायनिक तत्त्व पाए जाते हैं।

गुण व कर्म

ब्राह्मी मेधा वर्धक, स्मरण शक्ति वर्धक होती है। इसका प्रयोग मानसिक विकारों, अवसाद, अनिद्रा, ज्वर हर, खून की कमी के रूप में किया जाता है।

मानसिक विकारों को दूर करने में

अलजाइमर में जब हमारे दिमाग की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं, तब इन्हे ये नष्ट होने से रोकती है। स्ट्रेस व मानसिक अवसाद को रोकती है, चिड़चिड़ेपन को रोकती है तथा  मिर्गी में भी इसका प्रयोग लाभप्रद है।

स्मरणशक्ति वर्धक

ब्राह्मी इंटेलिजेंस व स्मरणशक्ति को बढ़ाती  है। दिमागी एकाग्रता को बढ़ाती है, जब किसी का मन पढ़ाई में नहीं लगता हो, याद न होता हो व एकाग्रता की कमी हो, तो कुछ समय तक इसे लेने से लाभ होता है।

दीपन व पाचक

खाए भोजन को ठीक से पचाती है व उदर में अम्लता को दूर करके इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम को ठीक करती है।

एंटीऑक्सीडेंट के रूप में

इसमें विद्यमान विटामिन, मिनरल की वजह से यह एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करती है व हमारे दिल की रक्षा करती है, इसका टॉनिक के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।

चर्म रोगों में

ब्राह्मी हमारे शरीर के टॉक्सिंज को बहार निकालती है व हमारी त्वचा में निखार लाती है। जब किसी के सिर के बाल झड़ रहे हों और उसकी जगह नए बाल न उगते हों, तो ऐसी अवस्था में ब्राह्मी घृत का प्रयोग करने से लाभ होता है। ब्राह्मी घृत के साथ-साथ अगर भृंगराज तेल सिर में डाला जाए व मालिश की जाए, तो लाभ होता है, सिर के बाल उग आते हैं।

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